निशंक न्यूज ब्यूरो।
पश्चिम बंगाल में चुनाव हारने के बाद अपनो के ही निशाने पर आयी टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी अब अपना व पार्टी का वजूद बचाने के लिए कांग्रेस की शरण में पहुंच गयी है। वह किसी भी तरह कांग्रेस से पुराने संबंध मजबूत करने के प्रयास में लगी है। इधर कभी उनके इशारे पर कुछ भी करने को तैयार रहने वाले उनकी पार्टी के सांसद व विधायक ही उन्हें घेरने की तैयारी में है। बुधवार को उनकी पार्टी की एक अौर सांसद ने अपने को टीएमसी से किनारे कर लिया।
कांग्रेस ने ही ममता को दिलायी थी पहचान

राजनीति के जानकारो की मानी जाये तो ममता बनर्जी को कांग्रेस ने ही राजनीतिक पहचान दिलायी थी। बंगाल से बामपंथिअों की सरकार को हटाकर सत्ता में काबिज होने के लिए कांग्रेस हाईकमान ने तमाम प्रयास किए लेकिन कांग्रेस बामपंथिअों की सरकार को मात नही दे सकी। इसके बाद दिल्ली में बैठे तत्कालिन कांग्रेस नेताअों को यह समझ में आया कि बंगाल से बामपंथिअों की सरकार को हटाना है तो वही की तेजतर्रार महिला नेता पर दांव लगाना होगा। इसके बाद कांग्रेस हाईकमान ने ममता बनर्जी को महत्व देना शुरू किया, और प्रणव मुखर्जी जैसे कद्दावर व प्रभावशाली नेता के होने के बाद भी बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी को मजबूती से खड़ा करने के लिए उन्हें केन्द्र सरकार में मंत्री भी बनाया। लेकिन ममता बनर्जी को परोक्ष रूप से बंगाल संभालने की जिम्मेदारी सौंपी गयी।
पकड़ मजूबत होने पर छोड़ा कांग्रेस का हांथ

राजनीति के जानकार बताते है कि कांग्रेस ने हमेशा ममता बनर्जी को बंगाल में मजबूती दी। जिसके चलते वह बंगाल के तत्कालीन वामपंथी सरकार के खिलाफ मुखर होकर खड़ी हो सकी और वामपंथी सरकार के विकल्प के रूप में ममता बनर्जी की पहचान बनने लगी। इस बीच जब केन्द्र में कांग्रेस कमजोर हुई तो ममता बनर्जी ने कांग्रेस से किनारा कर एनडीए से गलबहिया कर ली। एडीए को भी कांग्रेस के खिलाफ खुला मोर्चा लेने वाली महिला नेता मिल गयी। एनडीए ने भी ममता बनर्जी को मजबूती दी जिसके सहारे वह बंगाल में अपनी जड़ो को अौर मजबूत कर सकी। बाद में उन्होंने अपना राजनीतिक दल (तृणमूल कांग्रेस) बनाकर स्वयं को बंगाल की ही राजनीति में केन्द्रित कर लिया। इस बीच वह लगातार कांग्रेस व भाजपा पर तीखे राजनीतिक हमले करती रही, और तृणमूल कांग्रेस को बंगाल की सत्ता तक लाने में कामियाब रही।
सब कुछ जाने के बाद आयी कांग्रेस की याद
लगातार 15 साल तक बंगाल की सत्ता में रही टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने सत्ता में रहते हुए लगातार कांग्रेस अौर भाजपा पर तीखे राजनीतिक हमले बोले। उनके निशाने पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी व सोनियां गांधी ही रहते थे। इण्डिया गठबंधन बनने पर भी उन्होंने कई बार गठबंधन का नेता बनने से राहुल व सोनियां को रोकने के लिए तमाम प्रयास किए। पिछले दिनो हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा के हांथो मिली हार के बाद एक बार फिर ममता ने कांग्रेस को घेरने का प्रयास किया, लेकिन जब उनके अपने सांसद व विधायक ही उनके खिलाफ खड़े होने लगे तो ममता की ममता कांग्रेस के प्रति बढ़ी और कांग्रेस की शरण में पहुंच गयी।
