Bengal elections: बंसल की रणनीति से टूटा ममता का तिलिस्म

सरस वाजपेयी
संगठन स्तर पर भाजपा के चाणक्य कहे जाने वाले पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सुनील बंसल ने एक बार फिर दिखा दिया कि उनकी रणनीति की किसी के पास काट नहीं है। अपनी रणनीति से उत्तर प्रदेश में भाजपा को सत्ता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सुनील बंसल की ही रणनीति का असर रहा कि भाजपा बंगाल में ममता बनर्जी का तिलिस्म तोड़ कर पहली बार सरकार बनाने में सफल हो सकी। बंगाल में चुनाव जीतकर सत्ता तक पहुंचने के बाद भाजपा के नेता सामूहिक प्रयास को जीत का कारण बता रहे हों लेकिन बंगाल चुनाव में सक्रिय रहे भाजपा से जुड़े लोगों का कहना है कि बंगाल के प्रभारी बनने के बाद सुनील बंसल द्वारा पिछले करीब एक साल से जिस तरह जमीनी स्तर पर काम किया व कराया जा रहा था ममता बनर्जी उसकी काट नहीं ढूंढ सकी और नतीजा यह रहा कि सरकार बनाने का दावा करने वाली ममता बनर्जी की टीएमसी इस बार चुनाव में सौ सीटों पर भी चुनाव नहीं जीत सकी।

कार्यकर्ताओं के साथ इस तरह संवाद कर उनमें जोश भरते हैं भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव सुनील बंसल।

उत्तर प्रदेश में दो चुनाव में दिलाई भाजपा को जीत
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों में जिस तरह से भाजपा ने लंबे समय से सत्ता में काबिज टीएमसी के साथ ही उसकी मुखिया का तिलिस्म तोड़ा और दो सौ से ज्यादा सीटें जीतकर सरकार बनाने में सफलता हासिल की उसके बाद बंगाल भाजपा से जुड़े लोगों तथा बंगाल में विशेष तौर पर गए कानपुर और उत्तर प्रदेश के लोगों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा बंगाल के प्रभारी व भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव सुनील बंसल की ही हो रही है। इन्हें भाजपा में संगठन का चाणक्य कहा जा रहा है। भाजपा से जुड़े लोगों का कहना है कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं में जोश भरने में माहिर और बूथ स्तर पर युवाओं की फौज तैयार करने का महारथ हासिल करने वाले सुनील बंसल ने ही अपने कार्यकाल में 2014 तथा 2017 में पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अपनों की तरह बात कर कार्यकर्ता का उत्साह बढ़ाते भाजपा के चाणक्य सुनील बंसल (फाइल फोटो)

यूपी के बाद बंगाल में चला बंसल का जादू
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे गृह मंत्री अमित शाह के विश्वासपात्र माने जाने वाले सुनील बंसल को पहले उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया था यहां दो चुनाव में भाजपा को पूर्ण बहुमत दिलाने की पटकथा लिखकर इस हकीकत में उतारने वाले सुनील बंसल को इस बार पश्चिम बंगाल में भाजपा का चुनाव प्रभारी बनाया गया था। संगठन स्तर पर जमीन तक समर्थकों की टीम तैयार करने में माहिर सुनील बंसल ने अपने अनुभव का इस्तेमाल कर बंगाल के हर जिले में ‘बूथ मैनेजमेंट’ को इतना मजबूत किया है कि टीएमसी के कार्यकर्ता भी हैरान रह गए और वह मतदान के अंत तक बंसल द्वारा बनाई गई रणनीति की काट ढंढने में ही लगे रहे और भाजपा बंगाल में ममता बनर्जी के ‘अजेय’ किले को ढहाने में सफल हो गई।

फीडबैक लेकर आम मतदाताओं को भाजपा के साथ जोड़ा
पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने के लिये महीनों पहले से अपना घर छोड़कर बंगाल में डेरा डालने वाले कानपुर के भाजपाईयों की मानी जाए तो यूपी में भाजपा को बेहतरीन जीत दिलाने वाले सुनील बंसल ने इस बार उन मतदाताओं पर नजर रखी जो ज्यादा बोलते नहीं थे वह केवल वोट डालने जाते थे। उन्होंने हर विधानसभा क्षेत्र का बिंदुवार फीडबैक लिया और इसके आधार पर अपने लोगों को लगाकर इन मतदाताओं को ब्रेन वॉश करने में सफलता हासिल कर ली। बंसल की इस रणनीति को टीएमसी के लोग तथा स्वयं टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी समझ ही नहीं सकीं।

ममता के गढ़ में बना ली पैठ
टीएमसी के लिए सबसे बड़ी चिंता यह रही कि भाजपा के इस कुशल रणनीतिकार सुनील बंसल ने उन इलाकों में बीजेपी की पैठ बनानें में सफलता हासिल कर ली जिन क्षेत्रों का टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी का गढ़ माना जाता था. बंसल ने बंगाल बीजेपी के बिखरे हुए संगठन को एक सूत्र में पिरोया और इनमें जीत का जज्बा भर दिया। कहा जा रहा है कि सुनील बंसल ने स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय चर्चा का हिस्सा बना दिया जिसे भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं ने भी स्वीकार कर इसे आम लोगों के बीच चर्चा में ला दिया। जिसका नतीजा यह रहा कि टीएमसी को रक्षात्मक मुद्रा में आना पड़ा।

अपनों से बात करते भाजपा नेता सुनील बंसल साथ में कानपुर के चिन्मय शुक्ला(फाइल फोटो)

कंधे से कंधा मिलाए रहे कानपुर के भाजपाई

जानकार लोगों की मानी जाए तो इस बार बंगाल में हर हाल में भाजपा को सत्ता में लाने के लिये रणनीति बनाने वाले सुनील बंसल ने पूरे देश से अपने खास लोगों को कई महीने पहले से ही बंगाल में बुलाकर जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूती देने के काम में लगा दिया था। इनमें भाजपा की कानपुर में रहने वाले विधान परिषद सदस्य अरुण पाठक, भाजपा के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ चुके सुरेश अवस्थी, संगठन के लिये काम करने वाले मनोज कांत मिश्रा, चिन्मय शुक्ला आदि प्रमुख रूप से शामिल थे। इसके अलावा संगठन की तरफ से सांसद रमेश अवस्थी, भूपेश अवस्थी, रघुनंदन सिंह भदौरिया जैसे जमीनी नेताओं को भी बंगाल चुनाव में आम लोगों के बीच लगाया गया था।

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