निशंक न्यूज डेस्क
कानपुर। नेपाल में आई जलप्रलय के बाद अब भारत के सीमावर्ती इलाकों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। नेपाल के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से अचानक पानी आने के कारण गंडक नदी का बहाव तेज हो गया है। उत्तर प्रदेश में महराजगंज और कुशीनगर को हाई अलर्ट पर रखा गया है, जबकि बिहार में गंडक समेत कई नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है।
महराजगंज-कुशीनगर हाई अलर्ट, बिहार के कई जिलों में बाढ़ का खतरा
सबसे ज्यादा चिंता गंडक नदी के रास्ते आने वाले पानी को लेकर है। नेपाल में आई बाढ़ के बाद वाल्मीकिनगर बैराज पर गंडक का डिस्चार्ज रात में तेजी से बढ़ा और करीब 1.50 लाख क्यूसेक तक पहुंच गया। हालांकि शुक्रवार को कुशीनगर के कुछ इलाकों में जलस्तर नीचे आने से तत्काल बाढ़ का खतरा कम हुआ है, लेकिन प्रशासन ने निगरानी जारी रखी है।
महराजगंज-कुशीनगर में सबसे पहले असर की आशंका

नेपाल से निकलने वाली नदियों का पानी सबसे पहले उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों को प्रभावित कर सकता है। महराजगंज और कुशीनगर में नदी किनारे तथा निचले इलाकों को विशेष निगरानी में रखा गया है। जिला प्रशासन को संवेदनशील गांवों में सतर्क रहने, राहत-बचाव दल तैयार रखने और जलस्तर में बदलाव की लगातार जानकारी लेने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी दोनों जिलों के प्रशासन को पूरी तरह सतर्क रहने को कहा है।
गोरखपुर मंडल में भी नदियों पर नजर रखी जा रही है। शुक्रवार को उपलब्ध जानकारी के अनुसार राप्ती और रोहिन का जलस्तर घट रहा है, जबकि सरयू में धीरे-धीरे बढ़ोतरी दर्ज की गई। फिलहाल गोरखपुर में तत्काल बाढ़ जैसी स्थिति नहीं है, लेकिन नेपाल से आने वाले पानी और अगले कुछ घंटों के जलस्तर को देखते हुए प्रशासन सतर्क है।
बिहार में गंडक के साथ कई नदियां खतरे के निशान के ऊपर
नेपाल से आने वाले पानी का बड़ा दबाव बिहार में दिखाई पड़ सकता है। पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज और मुजफ्फरपुर समेत गंडक के निचले इलाकों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। इसके अलावा गंगा, कोसी और बूढ़ी गंडक के जलस्तर में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है और कई स्थानों पर नदियां खतरे के निशान के ऊपर पहुंच गई हैं।
बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग ने लोगों को घबराने के बजाय सावधानी बरतने की सलाह दी है। गंडक नदी के किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को नदी के पास अनावश्यक रूप से नहीं जाने तथा प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने को कहा गया है। अफवाहों से बचने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील भी की गई है।
बैराजों और तटबंधों पर बढ़ाई निगरानी
नेपाल से पानी आने के बाद दोनों राज्यों में बैराजों, तटबंधों और नदी किनारे के संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। राहत और बचाव दलों को तैयार रखा गया है। प्रशासन की प्राथमिकता निचले इलाकों में पानी पहुंचने की स्थिति में लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना है।
हालांकि केंद्रीय स्तर पर स्थिति पर नजर रखी जा रही है और एनडीआरएफ ने फिलहाल भारत की ओर नेपाल की बाढ़ का कोई गंभीर प्रतिकूल प्रभाव सामने नहीं आने की बात कही है, फिर भी नदियों के जलस्तर में अचानक बदलाव को देखते हुए यूपी-बिहार में हाई अलर्ट जैसी सतर्कता बरती जा रही है।
यानी नेपाल की जलप्रलय के बाद असली परीक्षा अब भारत के सीमावर्ती जिलों की है। पानी कितना और किस तेजी से नीचे आता है, इसी पर तय होगा कि गंडक और उससे जुड़ी नदियों के किनारे बसे गांवों में खतरा कितना बढ़ता है।
इन जिलों पर सबसे ज्यादा नजर
उत्तर प्रदेश:
महराजगंज • कुशीनगर • गोरखपुर मंडल के निचले क्षेत्र
बिहार:
पश्चिम चंपारण • पूर्वी चंपारण • गोपालगंज • मुजफ्फरपुर
नदियां:
गंडक/नारायणी • राप्ती • रोहिन • सरयू • बूढ़ी गंडक • कोसी • गंगा
सबसे बड़ा खतरा: नेपाल से गंडक में अचानक बढ़ने वाला पानी और उसके बाद निचले इलाकों में जलस्तर बढ़ना।
