फिर उफनाई मंदाकिनी,चित्रकूट-मानिकपुर में बाढ़ का खतरा बरकरार

शेष मणि गुप्ता

चित्रकूट। मंदाकिनी नदी की बाढ़ से अभी चित्रकूट-मानिकपुर क्षेत्र पूरी तरह उबर भी नहीं पाया था कि लगातार बारिश ने एक बार फिर संकट बढ़ा दिया। रविवार रात से हुई तेज बारिश के बाद मंदाकिनी का जलस्तर दोबारा तेजी से बढ़ा और नदी खतरे के निशान से ऊपर बहने लगी। रामघाट, नदी किनारे के निचले इलाकों और मानिकपुर तहसील के कई गांवों में बाढ़ का पानी पहुंचने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। प्रशासन ने निचले इलाकों को खाली कराने के साथ राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है।

बीते दिनों आई बाढ़ ने क्षेत्र में पहले ही भारी नुकसान पहुंचाया है। परसौंजा समेत कई गांवों में कच्चे मकानों को नुकसान पहुंचा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार चित्रकूट में 100 से अधिक परिवार बाढ़ से प्रभावित हुए हैं और 80 से अधिक कच्चे मकान ढहने की सूचना है। रामघाट, तरीहा, गोबारिया और मानिकपुर क्षेत्र के कई गांवों में बिजली व्यवस्था प्रभावित होने से जलापूर्ति और रोजमर्रा की जिंदगी पर भी असर पड़ा है।

रामघाट से पाठा तक पानी का दबाव

मंदाकिनी का पानी बढ़ने से रामघाट क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। नदी किनारे की दुकानें, आश्रम और मकान प्रभावित हुए हैं। रामघाट क्षेत्र में कई स्थानों पर पानी भरने से सामान्य गतिविधियां थम गई हैं। नदी का पानी लगातार बढ़ने के कारण लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम जारी है।

उधर पाठा क्षेत्र में मंदाकिनी के साथ बरदहा और बाल्मीकि नदियों के उफान ने भी चिंता बढ़ा दी है। जलस्तर बढ़ने के कारण निचले इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। बरुआ बांध के तीन गेट खोले जाने की सूचना है, जिससे पानी का दबाव नियंत्रित किया जा सके।

मानिकपुर में भी बढ़ी मुश्किल

मानिकपुर तहसील के नदी और नालों से लगे गांवों में बाढ़ के पानी का असर साफ दिखाई दे रहा है। कई स्थानों पर रास्ते जलमग्न होने से आवागमन प्रभावित हुआ है। कुछ गांवों में बिजली आपूर्ति बाधित होने से ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ गई है। प्रशासन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने में जुटी हैं।

बाढ़ के पानी के कारण सड़क मार्ग से आवागमन में भी दिक्कत आई है। कुछ स्थानों पर एंबुलेंस तक पानी में फंसने की स्थिति सामने आई। प्रशासन ने संवेदनशील मार्गों पर निगरानी बढ़ाते हुए लोगों को जलभराव वाले रास्तों से नहीं गुजरने की हिदायत दी है।

दोबारा बारिश ने बढ़ाई चिंता

सबसे बड़ी चिंता यह है कि क्षेत्र में बारिश का दौर पूरी तरह थमा नहीं है। मौसम विभाग ने प्रदेश के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में मंदाकिनी और दूसरी नदियों का जलस्तर फिर बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

प्रशासन के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक तरफ बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित रखना है, वहीं दूसरी तरफ पहले से क्षतिग्रस्त मकानों, सड़कों, बिजली और पेयजल व्यवस्था को बहाल करना है। बाढ़ का पानी उतरने के बाद नुकसान का व्यापक सर्वे भी बड़ी जरूरत होगा।

प्रशासन ने संभाला मोर्चा

बाढ़ की गंभीरता को देखते हुए मंडलायुक्त चित्रकूटधाम मंडल बांदा अजीत कुमार और डीआईजी बांदा परिक्षेत्र राजेश एस ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने रामघाट से नयागांव पुल तक हवाई और जमीनी निरीक्षण कर राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की। प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

नावों के जरिए लोगों को सुरक्षित निकालने का काम किया जा रहा है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और प्रशासन की टीमें संवेदनशील इलाकों में तैनात हैं। पहले चरण में बड़े पैमाने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। बाढ़ के पिछले दौर में सेना और आपदा राहत दलों ने भी रेस्क्यू अभियान चलाया था।


प्रशासन ने तैयार की नाव, राहत शिविर और रेस्क्यू टीमें

चित्रकूट। मंदाकिनी के दोबारा उफान पर आने के बाद जिला प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। जरूरत वाले स्थानों पर नावों से रेस्क्यू की व्यवस्था की गई है।

  • निचले इलाकों को खाली कराने पर जोर, लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा।
  • नावों से रेस्क्यू अभियान, जलभराव वाले इलाकों में टीमें सक्रिय।
  • एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें तैनात, पुलिस व प्रशासन के अधिकारी मौके पर।
  • राहत शिविरों में भोजन और जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है।
  • रामघाट, मानिकपुर, राजापुर और पहाड़ी क्षेत्र में निगरानी बढ़ाई गई।
  • बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखने के साथ अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद रहने के निर्देश दिए गए हैं।
  • बीते रेस्क्यू अभियान में सेना, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की मदद से करीब 1500 लोगों को सुरक्षित निकाला गया था।

बाढ़ उतरने के बाद भी बड़ी चुनौती

बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी चित्रकूट-मानिकपुर क्षेत्र के सामने संकट खत्म नहीं होगा। कच्चे मकानों के गिरने, सड़कों के क्षतिग्रस्त होने, बिजली-पानी की व्यवस्था प्रभावित होने और किसानों की फसलों को हुए नुकसान का आकलन करना होगा। प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता के साथ मकान और गृहस्थी के नुकसान का मुआवजा दिलाना प्रशासन की अगली बड़ी चुनौती होगी।

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