महेश सोनकर
कानपुर। युजीसी के नए प्रावधानों को वापस लेने और आरक्षण व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर सोमवार को कानपुर की धरती पर युवाओं का आक्रोश सड़कों पर उतर आया। आरक्षण सुधार आंदोलन कानपुर के बैनर तले हजारों युवाओं ने मोतीझील से गोल चौराहे तक विशाल मशाल मार्च निकालकर सरकार के समक्ष अपनी मांगों की जोरदार दस्तक दी। हाथों में जलती मशालें, चेहरे पर आक्रोश और व्यवस्था में बदलाव का संकल्प लिए युवाओं का हुजूम देर शाम तक शहर में चर्चा का विषय बना रहा।मशाल आक्रोश मार्च की शुरुआत मोतीझील स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा से हुई। बड़ी संख्या में युवा यहां एकत्र हुए और मशालें लेकर गोल चौराहे की ओर बढ़े। रास्ते भर प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी के नए प्रावधानों पर पुनर्विचार तथा आरक्षण व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर नारे लगाए। मार्च का समापन गोल चौराहे स्थित शहीद चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा के समक्ष हुआ।मशालों के साथ बुलंद हुई ‘बदलाव’ की आवाज
आरक्षण व्यवस्था के खिलाफ मशाल जुलूस निकालकर दिखाया आक्रोश
प्रदर्शनकारियों के हाथों में जलती मशालें केवल विरोध का प्रतीक नहीं थीं, बल्कि युवाओं ने इन्हें व्यवस्था में बदलाव की अपनी मांग का प्रतीक बताया। आंदोलन में शामिल युवाओं का कहना था कि शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में अवसरों को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान संवाद और व्यापक सुधार के माध्यम से किया जाना चाहिए। वक्ताओं ने कहा कि उनका आंदोलन किसी जाति अथवा समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि वे ऐसी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं जिसमें सामाजिक न्याय के साथ समान अवसर, पारदर्शिता और योग्यता को भी उचित महत्व मिले। वक़्ताओ ने कहा कि कानपुर से उठी आवाज अब देश तक जाएगी, समापन स्थल पर आंदोलनकारियों ने एक स्वर में संकल्प लिया कि आरक्षण सुधार की मांग को अब केवल कानपुर तक सीमित नहीं रहने दिया जाएगा। युवाओं ने आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से देशव्यापी स्वरूप देने का ऐलान किया।वक्ताओं ने कहा कि यदि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती है तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से जनजागरण, संवाद और शांतिपूर्ण आंदोलनों के माध्यम से देशभर के युवाओं को इस मुद्दे से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
युवा बोले पीढ़ियों के भविष्य का सवाल है
आंदोलन में शामिल युवाओं ने कहा कि यह केवल आज की पीढ़ी का प्रश्न नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा विषय है। उनका कहना था कि शिक्षा और रोजगार जैसे क्षेत्रों में नीतियां ऐसी होनी चाहिए जो समाज के सभी वर्गों के लिए न्यायपूर्ण और पारदर्शी अवसर सुनिश्चित करें। युवाओं ने सरकार से मांग की कि यूजीसी के नए प्रावधानों पर पुनर्विचार किया जाए और आरक्षण व्यवस्था की मौजूदा संरचना की व्यापक समीक्षा कर आवश्यक सुधार किए जाएं।
अंत में मशाल उठाकर लिया संघर्ष का संकल्प, गोल चौराहे पर आयोजित समापन कार्यक्रम में युवाओं ने हाथों में मशाल लेकर आंदोलन को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। आंदोलनकारियों ने कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर लंबी लड़ाई के लिए तैयार हैं और व्यक्तिगत त्याग से भी पीछे नहीं हटेंगे।
हालांकि आंदोलन के आयोजकों ने स्पष्ट किया कि संघर्ष को लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। उनका कहना था कि जनसमर्थन जुटाकर सरकार तक अपनी बात मजबूती से पहुंचाना ही आंदोलन का प्रमुख उद्देश्य है।

कानपुर में हुए इस विशाल मशाल मार्च ने आरक्षण और यूजीसी से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रही बहस को एक नया राजनीतिक-सामाजिक आयाम देने का प्रयास किया है। आंदोलनकारियों का दावा है कि आने वाले दिनों में देश के अन्य शहरों में भी जनजागरण और आंदोलन की गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।मशाल आक्रोश मार्च के अंत में आंदोलनकारियों ने दोहराया कि “यह शुरुआत है, अंत नहीं।” उनका कहना था कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार गंभीरता से विचार नहीं करती, तब तक लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को आगे बढ़ाया जाता रहेगा।कानपुर की सड़कों पर देर शाम तक दिखाई देती मशालों की कतार ने आंदोलनकारियों के इरादे स्पष्ट कर दिए—आरक्षण व्यवस्था में सुधार और यूजीसी के प्रावधानों पर पुनर्विचार की मांग को अब राष्ट्रीय बहस के केंद्र तक पहुंचाने की तैयारी है।
मुख्य रूप से छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष व युवा मोर्चा प्रदेश मंत्री अरविंद राज त्रिपाठी, पूर्न महापौर रविंद्र पाटनी,सोनू पाण्डेय, आशुतोष दीक्षित, राघवेंद्र मिश्रा, पूर्व पार्षद, धीरू त्रिपाठी, पार्षद, भानु भदौरिया, पूर्व बार महामंत्री, पीयूष मिश्रा, अधिवक्ता विजय त्रिवेदी, योगेंद्र अग्निहोत्री, आलोक मिश्रा, अनुराग मिश्रा ऋषि आदि प्रमुख रूप से शामिल रहे।
सवर्ण एकता मौर्चा ने जताया आक्रोश

दूसरी तरफ प्रस्तावित UGC के काले कानून और जातिगत आरक्षण के विरोध में सोमवार को कानपुर में सवर्ण समाज का जनसैलाब उमड़ पड़ा। सवर्ण एकता मोर्चा के बैनर तले सरसैया घाट पर सर्व ब्राह्मण विकास परिषद और अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के सैकड़ों पदाधिकारी हाथों में तख्तियां, बैनर और झंडे लेकर एकत्र हुए और जमकर नारेबाजी की। UGC काला कानून वापस लो “आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करो”, “मेरिट से खिलवाड़ बंद करो” के नारों से पूरा सरसैया घाट गूंज उठा। इसके बाद सभी पदाधिकारी पैदल मार्च करते हुए नारेबाजी करते हुए जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और जिलाधिकारी कानपुर नगर को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को संबोधित 5-सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई है कि UGC के नए कानून को तत्काल वापस लिया जाए और 70 साल पुरानी जातिगत आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा कर आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू किया जाए। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के प्रदेश अध्यक्ष एवं सवर्ण एकता मोर्चा के संयोजक कुंवर मनोज भदौरिया ने कहा कि, “आज सरसैया घाट पर उमड़ा यह जनसैलाब इस बात का सबूत है कि सवर्ण समाज अब जाग गया है। यह UGC कानून नहीं, सवर्णों के बच्चों के भविष्य को अंधकार में धकेलने का षड्यंत्र है। आज ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, कायस्थ सब एक मंच पर इसलिए आए हैं क्योंकि अब पानी सिर के ऊपर चला गया है। गरीब सवर्ण भूखा मर रहा है, योग्य होने के बाद भी उसके बच्चे नौकरी से वंचित हैं। सरकार कान खोलकर सुन ले, अगर इस काले कानून को वापस नहीं लिया तो 2027 के विधानसभा चुनाव में सवर्ण समाज वोट की चोट से जवाब देगा। यह तो सिर्फ झांकी है, दिल्ली के जंतर-मंतर तक जाना बाकी है। सर्व ब्राह्मण विकास परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष पं. कमल किशोर अवस्थी ने कहा कि “हम आरक्षण के विरोधी नहीं हैं, हम न्याय चाहते हैं। गरीबी की कोई जाति नहीं होती। जातिगत आरक्षण खत्म कर सभी गरीबों को आर्थिक आधार पर आरक्षण मिलना चाहिए।”
जिलाध्यक्ष संजीव मिश्रा ने कहा कि “सरसैया घाट से लेकर कलेक्ट्रेट तक सवर्णों की एकता दिखा दी है कि अब मेरिट के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा। प्रदेश वरिष्ठ महामंत्री धीरेंद्र भदौरिया ने कहा कि “हमने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी है। सरकार जल्द निर्णय ले, नहीं तो आंदोलन हर तहसील, हर जिले में होगा। इस दौरान मंडल अध्यक्ष महेन्द्र तोमर, प्रदेश अध्यक्ष पं. कौशल किशोर अवस्थी, वैश्य और कायस्थ समाज के पदाधिकारियों सहित भारी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।
