आलोक ठाकुर
कानपुर। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर शुक्रवार को धर्मनगरी कानपुर समेत देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उल्लास छाया रहा। अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के शुभ संयोग के बीच श्रद्धालुओं ने दिनभर व्रत रखकर भगवान श्रीकृष्ण की आराधना की। मंदिरों में विशेष शृंगार, झांकियों और भजन-कीर्तन के आयोजन हुए तो घरों में भी बाल गोपाल के स्वागत की तैयारियां होती रहीं। रात बढ़ने के साथ मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती गई। मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ ही शंख-घड़ियाल और घंटों की गूंज के बीच ‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारे गूंज उठे।
घरों में राधा कृष्ण बने बच्चों ने खेली लीला

जन्माष्टमी को लेकर सुबह से ही शहर का वातावरण भक्तिमय रहा। श्रद्धालुओं ने स्नान-ध्यान के बाद व्रत का संकल्प लिया और भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा की। घरों में बच्चों ने कान्हा और राधा का रूप धारण किया। कई स्थानों पर आकर्षक झांकियां सजाई गईं, जिनमें श्रीकृष्ण के जन्म से लेकर गोकुल में बाल लीलाओं तक का चित्रण किया गया। बाजारों में भी जन्माष्टमी की रौनक रही। पूजन सामग्री, कान्हा की पोशाक, मुकुट, बांसुरी और सजावटी सामान की खूब खरीदारी हुई।
, जन्म के साथ गलियों मंदिरों में उमड़ा उल्लास
जन्माष्टमी का मुख्य आकर्षण मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव रहा। श्रद्धालुओं ने मंदिरों में पहुंचकर भगवान के जन्म की प्रतीक्षा की। रात 12 बजे के आसपास जैसे ही जन्म का समय हुआ, मंदिरों में घंटा-घड़ियाल बजने लगे। भगवान के बाल स्वरूप का पंचामृत से अभिषेक कर नवीन वस्त्र और आभूषणों से शृंगार किया गया। इसके बाद आरती और प्रसाद वितरण हुआ। श्रद्धालुओं ने भगवान से सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

इस बार जन्माष्टमी का धार्मिक महत्व इसलिए भी खास रहा कि अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र का संयोग रहा। धार्मिक मान्यता में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से रोहिणी नक्षत्र का विशेष संबंध माना जाता है। इसी कारण श्रद्धालुओं में पर्व को लेकर विशेष उत्साह रहा।
घरों में भी सजे नंदलाल

शहर के मोहल्लों और कॉलोनियों में घर-घर जन्माष्टमी मनाई गई। लोगों ने घरों के मंदिरों को फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया। बाल गोपाल को नए वस्त्र पहनाकर मुकुट, मोरपंख और बांसुरी से उनका शृंगार किया गया। माखन-मिश्री, फल और विभिन्न प्रकार के पकवानों का भोग लगाया गया। बच्चों में जन्माष्टमी को लेकर खास उत्साह रहा। कई परिवारों ने घरों में छोटी-छोटी झांकियां तैयार कीं।
भक्ति गीतों और संकीर्तन से गूंजे मंदिर
शहर के प्रमुख कृष्ण मंदिरों में दिनभर धार्मिक कार्यक्रम चलते रहे। भजन-कीर्तन, संकीर्तन, कथा और आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। विशेष रूप से इस्कॉन मंदिर में सुबह से ही भक्तों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा और संकीर्तन के बीच श्रद्धालु कृष्ण भक्ति में झूमते नजर आए। मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था।
जन्माष्टमी के प्रमुख आयोजनों को देखते हुए शहर में यातायात व्यवस्था भी बदली गई। जेके मंदिर और इस्कॉन मंदिर की ओर जाने वाले मार्गों पर यातायात पुलिस ने विशेष रूट डायवर्जन लागू किया, ताकि श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच यातायात व्यवस्था सुचारु रखी जा सके।
बाजारों में भी दिखा जन्माष्टमी का असर

जन्माष्टमी से पहले ही बाजारों में कान्हा की पोशाक और सजावटी सामान की दुकानें सज गई थीं। छोटे बच्चों के लिए कृष्ण वेशभूषा, मुकुट, मोरपंख और बांसुरी की मांग रही। घरों में झांकी सजाने के लिए रंग-बिरंगी लाइटें, फूल और सजावटी सामग्री भी खरीदी गई। मिठाई की दुकानों पर माखन-मिश्री और अन्य प्रसाद की विशेष तैयारी की गई।
धर्म के साथ लोक संस्कृति का उत्सव

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल धार्मिक पर्व ही नहीं बल्कि भारतीय लोक संस्कृति और पारिवारिक परंपराओं का भी उत्सव है। कान्हा की बाल लीलाओं, राधा-कृष्ण की झांकियों और भजन-कीर्तन के माध्यम से शहर में कृष्ण की बाल छवि जीवंत हुई। मंदिरों से लेकर घरों तक हर तरफ ‘राधे-राधे’ और ‘जय श्रीकृष्ण’ के जयकारे सुनाई दिए। आधी रात को भगवान के जन्म के साथ श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया और एक-दूसरे को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं।
रात 12 बजते ही घर-घर गूंजा जय कन्हैया लाल की
कानपुर के मंदिरों में उमड़ा आस्था का सैलाब

इस्कॉन मंदिर, जेके मंदिर, सनातन धर्म मंदिर, राम मानस मंदिर के साथ ही गली मोहल्लों में स्थित मंदिरों में समेत प्रमुख मंदिरों में विशेष सजावट और धार्मिक आयोजन। घर-घर पूजा स्थलों को घर की गृहणियों ने फूल मालाओं से सजाया। सुबह से श्रद्धालुओं की कतार, भजन-कीर्तन और संकीर्तन से भक्तिमय हुआ वातावरण। रात में जन्मोत्सव के दौरान उमड़ी भीड़। जैसे ही रात के 12 बजे घरों तथा मंदिरों में जय कन्हैया लाल के जयकारे गूंजने लगे।
आधी रात को जन्में नंदलाल
मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ मंदिरों में शंखनाद और घंटा-घड़ियाल गूंजेंगे। पंचामृत अभिषेक, शृंगार, आरती और प्रसाद वितरण के बाद श्रद्धालु दर्शन करेंगे।
कान्हा की पोशाक में सजे नन्हे-मुन्ने
जन्माष्टमी पर बच्चों में खास उत्साह। घरों और स्कूलों में कृष्ण-राधा की वेशभूषा, झांकियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने पर्व की रौनक बढ़ाई।
मंदिरों के आसपास बदली यातायात व्यवस्था
जेके मंदिर और इस्कॉन मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए यातायात पुलिस ने विशेष रूट डायवर्जन किया। व्यवस्था शुक्रवार दोपहर से कार्यक्रम समाप्त होने तक लागू रही।
