निशंक न्यूज
कानपुर । कानपुर में एलडीटीए (LDTA) के मैनेजिंग डायरेक्टर जानसन टी. जॉन ने आरोपित डी के सिंह ,अखिलेश सिंह ,सरफराज़ मसीह ,पॉल जिनिया पर उनकी संस्थान से जुड़ी जमीन पर कब्जा करने की साजिश रचने और झूठे मुकदमों में फंसाने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि डी.के. सिंह, अखिलेश सिंह, सरफराज मसीह और पॉल जिनिया समेत कुछ अन्य लोग माल रोड और चुन्नीगंज स्थित एलडीटीए की संपत्तियों पर कब्जा करना चाहते हैं। इसी उद्देश्य से उन्हें लगातार झूठे मुकदमों में फंसाने, धमकाने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का प्रयास किया जा रहा है। जानसन टी. जॉन ने बताया कि उन्हें अभी भी अपनी जान-माल का खतरा बना हुआ है। उनका कहना है कि 7 जून को उन्होंने इस पूरे मामले की शिकायत लेकर एडीसीपी पूर्वी शिवा सिंह से मुलाकात करने का प्रयास किया था। हालांकि, इसी दौरान उनके खिलाफ न्यायालय से जारी गैर-जमानती वारंट (NBW) के चलते पुलिस ने उन्हें कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें एक अन्य मामले में एक दिन के लिए जेल भी जाना पड़ा। उनका आरोप है कि यह मामला भी उन्हें परेशान करने और दबाव बनाने की साजिश का हिस्सा है।

उन्होंने आगे दावा किया कि जब उन्हें पुलिस अभिरक्षा में कोर्ट ले जाया जा रहा था, उसी समय डी के सिंह ,अखिलेश सिंह ,सरफराज़ मसीह ,पॉल जिनिया अपने 8-10 अज्ञात साथियों के साथ वहां पहुंच गए और उन्हें घेरने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि पुलिस की मौजूदगी और सुरक्षा के कारण कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। जानसन टी. जॉन ने पुलिस की कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि पुलिस उन्हें सुरक्षा और सहयोग दे रही है, लेकिन उन्हें आशंका है कि विरोधी पक्ष भविष्य में भी किसी झूठे आरोप या मुकदमे में फंसाकर जेल भेजने की कोशिश कर सकता है, ताकि एलडीटीए की संपत्तियों पर कब्जा करना आसान हो सके।इस मामले में जानसन टी. जॉन के अधिवक्ता अमर विहारी सेठ भी मीडिया के सामने आए।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में थाना कोतवाली में मुकदमा संख्या 108/2018 दर्ज कराया गया था, जिसमें भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत उनके मुवक्किल को आरोपी बनाया गया। अधिवक्ता का आरोप है कि यह मुकदमा एलडीटीए की जमीन पर कब्जा करने की मंशा से दर्ज कराया गया था। उनका कहना है कि उनके मुवक्किल ने जब अपने अधिकारों की कानूनी लड़ाई शुरू की तो उनके खिलाफ कई अन्य मुकदमे भी दर्ज करा दिए गए।अधिवक्ता अमर विहारी सेठ ने कहा कि उनके मुवक्किल स्वयं को निर्दोष बताते हैं और उनका पक्ष है कि उन्हें एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत कानूनी मामलों में उलझाया गया, जिसके कारण उन्हें जेल तक जाना पड़ा। उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण से जुड़े मामले वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन हैं और उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।
