निशंक न्यूज
कानपुर। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर का 41वां दीक्षांत समारोह गुरुवार को वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई प्रेक्षागृह में बेहद भव्यता और हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। नैक (NAAC) द्वारा A++ ग्रेड प्राप्त और क्यूएस एशियन यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स में विशिष्ट स्थान रखने वाले सीएसजेएमयू का दीक्षांत समारोह इस बार डिजिटल नवाचार, वीरांगनाओं-बेटियों की सफलता और आत्मनिर्भर भारत की नई सोच का गवाह बना।
बेटियों के नाम रहा 41वां दीक्षांत समारोह: 82% मेडल जीतकर छात्राओं ने रचा इतिहास
दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता कुलाधिपति एवं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने की। मुख्य अतिथि के रूप में अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) के चेयरमैन एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में उत्तर प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री श्री योगेन्द्र उपाध्याय और उच्च शिक्षा राज्य मंत्री श्रीमती रजनी तिवारी शामिल हुए। सभी अतिथियों का स्वागत कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक और प्रति कुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी ने किया।
इस वर्ष के दीक्षांत समारोह में बेटियों की मेधा का एक बार फिर बोलबाला रहा। विश्वविद्यालय द्वारा कुल 96 पदक प्रदान किए गए, जिनमें से कुल 51 मेधावी छात्र-छात्राओं को पदक मिले। इन 51 विद्यार्थियों में 42 छात्राएं और केवल 9 छात्र शामिल रहे। पदक प्राप्त करने में बेटियों का प्रतिशत 82.35% रहा, जिसे देखकर प्रेक्षागृह तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। राज्यपाल ने स्वयं 25 मुख्य मेधावियों को मंच पर मेडल पहनाकर सम्मानित किया। इसके अतिरिक्त कुल 92 शोधार्थियों को पी-एच.डी. की उपाधि दी गई, जिनमें 50 महिला और 42 पुरुष विद्यार्थी शामिल रहे।

पढ़ाई के साथ कोई भी कला अथवा हुनर जरूर सीखें: राज्यपाल
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं प्रदेश की राज्यापाल आनंदी बेन पटेल ने दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय की अभूतपूर्व उपलब्धियों पर गर्व व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि पिछले 5 वर्षों में कैंपस में छात्रों की संख्या में 131.7% की शानदार वृद्धि दर्ज की गई है। इसके साथ ही, एनआईआरएफ, क्यूएस एशिया रैंकिंग और ग्लोबल सस्टेनेबिलिटी इंडेक्स में मिली राष्ट्रीय व वैश्विक पहचान संस्थान के दृढ़ संकल्प और शैक्षणिक उत्कृष्टता को प्रमाणित करती है। उन्होंने डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में विश्वविद्यालय के प्रयासों को सराहते हुए कहा कि एडमिनिस्ट्रेशन, रिसर्च और एकेडमिक्स में एआई समावेश तथा ‘सस्टेनेबिलिटी डैशबोर्ड’ (STARS) की शुरुआत पर्यावरण व आधुनिकता के प्रति हमारी जिम्मेदारी को दर्शाती है। राज्यपाल ने सभी छात्रों से डिग्रियों के ऑनलाइन डिज़िलॉकर अपलोड का शत-प्रतिशत लाभ उठाने और उन्हें अनिवार्य रूप से डाउनलोड करने की अपेक्षा की।
युवाओं को संदेश देते हुए राज्यपाल ने कहा, “जिस प्रकार हम कपड़ों को निचोड़कर पानी अलग करते हैं, ठीक उसी तरह समाज में जहाँ भी आप जाएँ, अपने ज्ञान को देश सेवा में पूरी तरह निचोड़ दें।” उन्होंने पढ़ाई के साथ कोई न कोई हुनर व कला अवश्य सीखने पर जोर दिया जो युवाओं को आत्मनिर्भर बनाए।

संस्कार और माता-पिता की सेवा का पाठ पढ़ाते हुए राज्यपाल ने भावुक अपील की कि जीवन में चाहे आईएएस जैसे किसी भी ऊंचे पद पर पहुँचें, अपने पारिवारिक मूल्यों को कभी न भूलें। उन्होंने विशेष रूप से बेटियों से अनुरोध किया कि वे शादी या पारिवारिक दायित्वों के बाद अपने करियर और पढ़ाई को सीमित न करें, बल्कि समाज व माता-पिता के त्याग से मिले इस ज्ञान का लाभ राष्ट्र कल्याण में अवश्य दें।
राज्यपाल ने उर्जा संरक्षण पर दिया बल
अंत में, उन्होंने विश्वविद्यालय प्रबंधन को महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि परिसर में ऊर्जा संरक्षण के लिए खाली कमरों के लाइट-पंखे बंद रखे जाएँ और कैंपस व हॉस्टल्स में स्वच्छता, सुरक्षा तथा व्यवस्थाओं का निरंतर निरीक्षण किया जाए। साथ ही, समाज में गर्भवती महिलाओं के सही मार्गदर्शन हेतु गर्भ संस्कार जैसे विषयों पर व्यापक जागरूकता फैलाने का प्रयास किया जाए। दीक्षांत समारोह को जीवन का केवल एक पड़ाव और समाज के बीच असली परीक्षा की शुरुआत बताते हुए उन्होंने सभी मेधावियों के उज्ज्वल व मंगलमय भविष्य की कामना की।

असली ज्ञान तो वह है जो आपके किरदार (चरित्र) से झलकता: मुख्य अतिथि
कार्यक्रम के मुख्य अथिथि एआईसीटीई के चेयरमैन व डीयू के कुलपति प्रो.योगेश कुमार सिंह ने विद्यार्थियों को जीवन के नए सफर के लिए प्रेरित करते हुए एक अत्यंत प्रभावशाली और सारगर्भित संबोधन दिया। प्रोफेसर सिंह ने शिक्षा की वास्तविक सार्थकता को स्पष्ट करते हुए कहा कि “डिग्रियां तो केवल तालीम के खर्चों की रसीद हैं, असली ज्ञान तो वह है जो आपके किरदार (चरित्र) से झलकता है।” उन्होंने विद्यार्थियों को याद दिलाया कि उनकी डिग्री कागज का एक टुकड़ा मात्र है, जबकि उनका व्यवहार ही उनकी वास्तविक शिक्षा का परिचायक होगा। उन्होंने युवाओं को जीवन में दर्शक बनने के बजाय ‘खिलाड़ी’, ‘कप्तान’ या ‘कोच’ बनने का आह्वान किया। नेतृत्व की महत्ता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी निभाने के काबिल बनना चाहिए क्योंकि ईश्वर भी जिम्मेदारी उसी को देता है जो उसे निभाने में सक्षम होता है।
हवाई जहाज का उदाहरण देते हुए उन्होंने समझाया कि जैसे विमान हवा के विरोध में ही ऊपर उठता है, वैसे ही जीवन में आने वाला विरोध और चुनौतियां व्यक्ति की प्रगति के लिए ‘लिफ्ट’ का काम करती हैं। उन्होंने सलाह दी कि जब विरोध अधिक हो, तो अपनी गति और बढ़ा देनी चाहिए।
विकसित भारत 2047 के निर्माण में युवाओं की भूमिका सबसे अहम: उच्च शिक्षा मंत्री
उच्च शिक्षा मंत्री ने विद्यार्थियों को भावुक संदेश देते हुए कहा कि आज वे जिस मुकाम पर हैं, उसके पीछे उनके माता-पिता का वर्षों का कठिन संघर्ष, उनकी इच्छाओं का दमन और अनगिनत बलिदान छिपे हैं। उन्होंने गुरुओं के मार्गदर्शन को भी इस सफलता का आधार बताया और कहा कि जीवन में माता, पिता और गुरु इन तीनों का स्थान देवताओं के समान (मातृ देवो भव, पितृ देवो भव, आचार्य देवो भव) है और इनके ऋण से कभी उऋण नहीं हुआ जा सकता। उन्होंने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि कुछ लक्ष्यों को प्राप्त न कर पाने पर निराश होने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने प्रसिद्ध पंक्तियों को उद्धृत करते हुए कहा, “कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती” और “कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है।” उन्होंने युवाओं को अपनी अंतरात्मा की शक्ति पहचानने और उसे राष्ट्र हित में लगाने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को साझा करते हुए श्री उपाध्याय ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस महायज्ञ में शिक्षा और शिक्षण संस्थाओं की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, एक विकसित भारत में गाँव, गरीब, किसान का उत्थान, महिलाओं का सम्मान, और ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में नए अनुसंधानों का होना अनिवार्य है।
उन्होंने विद्यार्थियों को “हनुमान जी” की तरह अपनी शक्तियों को पहचानने की प्रेरणा दी और कहा कि युवा ही देश की तकदीर और तस्वीर बदल सकते हैं। उन्होंने आह्वान किया कि सभी शिक्षक, शिक्षार्थी और संस्थान एकजुट होकर देश की प्रगति में अपनी आहुति दें ताकि भारत दुनिया के विकसित राष्ट्रों की अग्रिम पंक्ति में खड़ा हो सके। यहां प्रदेश की उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने युवाओं में नई ऊर्जा का संचार किया। उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन की चुनौतियों का डटकर सामना करने और निरंतर परिश्रम करने का संदेश दिया। रामचरितमानस की चौपाई “कर्म प्रधान विश्व करि राखा” का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि जैसा कर्म और मेहनत हम करते हैं, उसका फल हमें निश्चित तौर पर प्राप्त होता है।
राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका: प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि देश को विकसित बनाने में सबसे बड़ा योगदान युवाओं का होगा। उन्होंने विद्यार्थियों को याद दिलाया कि समाज और राष्ट्र की उनसे बहुत बड़ी अपेक्षाएं हैं। श्रीमती तिवारी ने अंत में विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा हब के रूप में उभरने की भी सराहना की।
मीडिया प्रभारी डॉ दिवाकर अवस्थी ने बताया कि इस बार के दीक्षांत में छात्राओं ने मेडल से पीएचडी की डिग्री तक हर क्षेत्र में निर्णायक बढ़त हासिल की है। विवि परिसर से लेकर सम्बद्ध महाविद्यालयों तक हर श्रेणी में छात्राएं आगे हैं।
अंत में दीक्षांत समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया।
दीक्षांत समारोह के दौरान मंच पर कुलाधिपति एवं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्य अतिथि दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह, उच्च शिक्षा मंत्री श्री योगेन्द्र उपाध्याय और उच्च शिक्षा राज्य मंत्री श्रीमती रजनी तिवारी, शिल्पाचार्य श्री अंचल पी. बिजलानी, कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक, प्रति कुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी और कुलसचिव राकेश कुमार मिश्रा उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन विश्वविद्यालय की शिक्षिका डॉ. रत्नार्थु मिश्रा ने किया। दीक्षांत समारोह का लाइव प्रसारण विश्वविद्यालय के सभी ऑफिशियल सोशल मीडिया अकाउंट्स पर किया गया।
