निशंक न्यूज डेस्क
कानपुर। नेपाल में बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के तीसरे दिन शुक्रवार को भी तबाही का मंजर बरकरार है। भोटेकोशी नदी में आए जलसैलाब ने कई बस्तियों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को तबाह कर दिया है। मलबे और नदी के किनारे से लगातार शव बरामद हो रहे हैं। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के शुक्रवार के अपडेट के अनुसार अब तक 538 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 977 लोग अभी भी लापता हैं। नेपाल पुलिस की बाद की सूचना में मृतकों की संख्या 547 बताई गई है।
538 शव बरामद, 977 लोग अब भी लापता

राहत कार्य में लगे प्रशासन की सबसे बड़ी चिंता उन 977 लोगों को लेकर है, जिनका अब तक कोई पता नहीं चल सका है, हालांकि अब तक 538 शव बरामद किये जा चुके हैं। लापता लोगों में स्थानीय नागरिकों के साथ बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक और कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए श्रद्धालु भी शामिल हैं। नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों को लेकर भी चिंता बनी हुई है। शुक्रवार को उपलब्ध विभिन्न सरकारी अपडेट में भारतीय नागरिकों की संख्या अलग-अलग बताई गई है, इसलिए अंतिम सूची आने तक संख्या में बदलाव की संभावना है।
मलबे के नीचे जिंदगी की तलाश
नेपाल सेना, पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के जवान मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं। 14,829 सुरक्षाकर्मियों को राहत और बचाव अभियान में लगाया गया है और अब तक 3,742 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। दुर्गम पहाड़ी इलाकों में सड़क और पुल बह जाने के कारण राहत टीमों को कई स्थानों तक पहुंचने में मुश्किल हो रही है। हेलीकॉप्टरों के जरिये लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है।
भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के किनारे बसे इलाकों में तबाही सबसे ज्यादा है। बाढ़ का पानी और मलबा कई किलोमीटर तक बहता हुआ निचले जिलों तक पहुंचा। रासुवा और नुवाकोट से बहकर आए शव चितवन, तनहूं, गोरखा और नवलपरासी तक बरामद किए गए हैं। शवों की संख्या बढ़ने के कारण कई स्थानों पर अस्पतालों और शवगृहों में जगह कम पड़ने लगी है। अज्ञात शवों की पहचान के लिए पुलिस ने अलग व्यवस्था शुरू की है।
फिर मंडराया नई बाढ़ का खतरा

जलप्रलय के बाद अब नेपाल के सामने एक और खतरा खड़ा हो गया है। बाढ़ और मलबे से बनी झीलों में पानी बढ़ने के कारण उनके टूटने की आशंका है। शुक्रवार को रासुवा क्षेत्र में पानी का स्तर बढ़ने की सूचना के बाद कुछ स्थानों पर राहत और सड़क निर्माण कार्य रोक दिए गए तथा लोगों और बचाव दलों को सुरक्षित ऊंचाई वाले स्थानों पर जाने की चेतावनी दी गई। एक झील के तट से पानी निकलने के बाद कुछ समय के लिए बचाव अभियान भी प्रभावित हुआ।
अधिकारियों ने भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के किनारे रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने को कहा है। राहत दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि जिस इलाके में वे मलबे में दबे लोगों की तलाश कर रहे हैं, वहीं अचानक पानी बढ़ने का खतरा भी बना हुआ है। इस कारण कई जगह बचाव अभियान बेहद सावधानी से चलाया जा रहा है।
तबाही की तस्वीर अभी पूरी तरह सामने नहीं आई

बाढ़ से प्रभावित इलाकों में हजारों मकान और व्यावसायिक प्रतिष्ठान क्षतिग्रस्त हुए हैं। सड़कें और पुल बहने से कई गांवों का संपर्क टूट गया है। जलविद्युत परियोजनाओं और सीमा से जुड़े महत्वपूर्ण ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचा है। करीब 90 हजार लोग मानवीय सहायता की जरूरत में बताए जा रहे हैं।
बुधवार को हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर/बर्फ और चट्टानों के बड़े पैमाने पर खिसकने के बाद अचानक पानी और मलबे का सैलाब नीचे की ओर आया, जिसने भोटेकोशी और त्रिशूली नदी तंत्र में तबाही मचा दी। पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि लोगों को संभलने और सुरक्षित निकलने का मौका तक नहीं मिला।
