निशंक न्यूज
कानपुर। नगर निगम में ठेकेदारों का सिंडीकेट चलाने, ठेकेदारों से वसूली करने और दबाव बनाने के आरोप में गिरफ्तार रज्जन वाजपेयी की ठेकेदारी का सफर कभी वार्ड स्तर पर सफाई के छोटे ठेके से शुरू हुआ था। कुछ साल पहले तक वह नगर निगम के एक वार्ड में सफाई का ठेका लेकर खुद खड़े होकर सफाई का काम कराता था। आरोप है कि इसी दौरान एक जनप्रतिनिधि और नगर निगम के पुराने सिंडीकेट से जुड़े एक यादव जी के संपर्क में आने के बाद उसकी ठेकेदारी का दायरा तेजी से बढ़ता गया। देखते ही देखते उसने नगर निगम के ठेकों से बाहर भी अपना कारोबार खड़ा कर लिया और करोड़ों की संपत्तियों से लेकर क्रशर और खनन से जुड़े काम तक उसकी पहुंच बन गई।
रमईपुर से आकर कानपुर दक्षिण में बनाया आशियाना
रज्जन मूल रूप से बिधनू थानाक्षेत्र के रमईपुर का रहने वाला बताया जाता है। कारोबार बढ़ाने के लिए वह रमईपुर से नौबस्ता क्षेत्र में आकर रहने लगा। यहीं से उसकी मुलाकात एक युवा नेता से हुई और दोनों ने मिलकर ठेकेदारी के काम में कदम आगे बढ़ाए। बाद में यही युवा नेता कानपुर के पड़ोसी जिले से विधायक चुना गया। उसके राजनीतिक रूप से मजबूत होने के साथ ही रज्जन के ठेकेदारी कारोबार का दायरा भी लगातार बढ़ने की चर्चा है।
विधायक साथी बना तो बढ़ता गया कारोबार

पुलिस जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, साथी के विधायक बनने के बाद रज्जन ने ठेकेदारी में अपनी पकड़ और मजबूत की। नगर निगम के सफाई कार्यों से आगे बढ़ते हुए उसने अलग-अलग नामों और फर्मों के माध्यम से मौरंग और क्रशर से जुड़े ठेके लेने शुरू किए। कारोबार बढ़ा तो परिवार के लोगों को भी इसमें शामिल किया गया। रज्जन ने अपने भाई को भी ठेकेदारी के काम में उतारा और नौबस्ता क्षेत्र में ही उसे आलीशान मकान दिलाने की बात सामने आ रही है।
सूत्रों का कहना है कि समय के साथ रज्जन ने क्रशर कारोबार में भी अपनी गहरी पैठ बना ली। उसके पास पहाड़ तोड़ने और उससे जुड़े काम होने की भी जानकारी सामने आई है। इस तरह वार्ड में कूड़े की सफाई का ठेका लेकर काम कराने वाले रज्जन की पहचान धीरे-धीरे बड़े ठेकेदार के रूप में बनने लगी।
सिंडीकेट में सक्रिय भूमिका का आरोप
नगर निगम में ठेकों के बंटवारे और ठेकेदारों पर दबाव बनाने को लेकर पुलिस की जांच में रज्जन वाजपेयी का नाम सामने आया। आरोप है कि वह ठेकेदारों के सिंडीकेट में सक्रिय भूमिका निभाता था और ठेके हासिल करने के लिए दूसरे ठेकेदारों पर दबाव बनाया जाता था। ठेकों में हिस्सेदारी और वसूली को लेकर भी उसके खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पुलिस अब उसके ठेकेदारी कारोबार, फर्मों, संपत्तियों और नगर निगम से मिले ठेकों की भी पड़ताल कर रही है।
पुराने संपर्कों से मजबूत हुई पकड़
रज्जन के कारोबार के विस्तार की कहानी में नगर निगम के पुराने ठेकेदार सिंडीकेट और एक जनप्रतिनिधि से संपर्क को महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। सफाई के छोटे ठेके से शुरुआत करने वाला रज्जन कुछ ही वर्षों में बड़े निर्माण और खनन से जुड़े कारोबार तक कैसे पहुंचा, पुलिस अब इसकी भी पड़ताल कर रही है। जांच में उसके साथ कारोबार करने वाले लोगों, फर्मों और ठेकों का ब्योरा भी जुटाया जा रहा है।
गोविंद फरार, रज्जन और संजीव जेल में

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद कानपुर पुलिस ने नगर निगम में ठेकों का सिंडीकेट चलाकर करोड़ों रुपये का काम करने वाले ठेकेदारों के खिलाफ अभियान तेज किया है। इसी कार्रवाई में सिंडीकेट के कथित सरगना गोविंद शर्मा के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है। गोविंद अभी फरार है। पुलिस रज्जन वाजपेयी और संजीव जैन को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य ठेकेदारों, फर्मों और कारोबारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
जांच का अगला फोकस: रज्जन के नगर निगम के ठेकों से लेकर मौरंग, क्रशर और पहाड़ तोड़ने के कारोबार तक पहुंचने के बीच बने नेटवर्क, फर्मों और संपत्तियों की पड़ताल पर पुलिस की नजर है।
