नगर निगम में अब ‘विभीषणों’ की तलाश, एसआईटी ने जाल बिछाया

वेद गुप्ता

कानपुर। नगर निगम में ठेकेदारी के खेल और सिंडीकेट के खुलासे के बाद अब जांच का फोकस ठेकेदारों से आगे बढ़कर नगर निगम के भीतर बैठे उन अधिकारियों और कर्मचारियों पर हो गया है, जिन्होंने कथित तौर पर सिंडीकेट को मदद पहुंचाई। दो ठेकेदारों की गिरफ्तारी के बाद तेज हुई जांच में गुरुवार को एसआईटी ने नगर निगम में अपना संजाल फैला दिया। टीम ने विभाग के भीतर से जानकारी जुटाने के साथ उन अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका का पता लगाना शुरू कर दिया है, जो पर्दे के पीछे रहकर ठेकेदारों के नेटवर्क को मदद पहुंचाते रहे।

कई अभिलेख कब्जे में, शुरुआती पड़ताल में मिलीं खामियां

बुधवार को एसआईटी ने नगर निगम पहुंचकर जांच शुरू की थी। इस दौरान चीफ इंजीनियर और एक्सईएन से पूछताछ की गई तथा ठेकेदारी से जुड़े कई अभिलेख कब्जे में लिए गए। इन अभिलेखों की शुरुआती पड़ताल में ही कई खामियां सामने आने की बात कही जा रही है। अब इन्हीं दस्तावेजों और नगर निगम के अंदर से जुटाई जा रही सूचनाओं के आधार पर एसआईटी यह पता लगाने में जुटी है कि ठेकों की प्रक्रिया में कहां-कहां गड़बड़ी हुई और इसमें किस अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका रही।

कर्मचारियों की भूमिका जांचने को नगर आयुक्त ने शासन से मांगा अलग अधिकारी

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर आयुक्त अर्जित उपाध्याय ने भी अपने स्तर से विभागीय जांच शुरू करा दी है। इसके साथ ही उन्होंने शासन को पत्र भेजकर सिंडीकेट की मदद करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की जांच के लिए अलग से एक अधिकारी तैनात करने का अनुरोध किया है। नगर आयुक्त के इस पत्र को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नगर निगम के अधिकारी-कर्मचारियों की भूमिका की जांच यदि स्थानीय स्तर पर ही होती है तो जांच प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। इसी वजह से शासन स्तर से अलग अधिकारी की तैनाती की मांग की गई है, ताकि जांच में नगर निगम के भीतर के प्रभाव और दबाव की गुंजाइश कम हो और जिम्मेदारी तय करने में निष्पक्षता बनी रहे।

ठेकेदार गिरफ्तार हुए अब उनके ‘मददगारों’ की तलाश

सिंडीकेट से जुड़े दो ठेकेदारों की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस की एसआईटी यह पता लगाने में जुटी है कि नगर निगम की पूरी प्रक्रिया में उन्हें मदद कौन-कौन करता था। टेंडर की शर्तें तैयार करने, फर्मों को पात्र बनाने, तकनीकी प्रक्रिया पूरी कराने, फाइल आगे बढ़ाने और भुगतान तक की प्रक्रिया में किस स्तर पर किसकी भूमिका रही, इसकी पड़ताल की जा रही है।

एसआईटी की नजर ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी है, जिनके पास ठेकों से संबंधित फाइलें आती-जाती थीं। टीम यह जानने का प्रयास कर रही है कि किन अधिकारियों के कार्यकाल में संबंधित फर्मों को बड़े पैमाने पर काम मिले और किन कर्मचारियों ने फाइलों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

गुरुवार को एसआईटी ने नगर निगम में बिछाया‘संजाल’

गुरुवार को एसआईटी ने नगर निगम में अपनी गतिविधियां और बढ़ा दीं। टीम ने अलग-अलग स्तर पर जानकारी जुटाने का प्रयास किया। अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच से भी यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ठेकेदारों का नेटवर्क किस तरह काम करता था और निगम के भीतर उसका संपर्क किन लोगों से था।

जांच टीम उन लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है, जो सीधे तौर पर किसी ठेकेदार के साथ सामने नहीं आते थे, लेकिन फाइलों और विभागीय प्रक्रिया में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण थी। माना जा रहा है कि ऐसे लोगों से मिली जानकारी के आधार पर सिंडीकेट के पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा सकती हैं।

अभिलेखों की शुरुआती जांच में मिलीं कई खामियां

बुधवार को कब्जे में लिए गए अभिलेख अब जांच का अहम आधार बन गए हैं। एसआईटी इनकी जांच कर यह पता लगा रही है कि टेंडर प्रक्रिया नियमों के मुताबिक हुई या किसी फर्म को फायदा पहुंचाने के लिए उसमें बदलाव किया गया। फाइलों में दर्ज नोटिंग, अधिकारियों की संस्तुति, तकनीकी योग्यता, टेंडर की शर्तों और काम आवंटन की प्रक्रिया को एक-दूसरे से मिलाया जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक शुरुआती जांच में कुछ ऐसी खामियां मिली हैं, जिनसे ठेकों की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि इन खामियों की पूरी तस्वीर विस्तृत जांच और अभिलेखों के परीक्षण के बाद ही साफ होगी।

किसके इशारे पर बदलीं शर्तें, अब यह भी जांच का हिस्सा

जांच का एक अहम बिंदु यह भी है कि नगर निगम में जिन ठेकों को लेकर सवाल उठे, उनकी शर्तें किस स्तर पर तय हुईं। यदि किसी टेंडर की शर्त किसी विशेष फर्म को लाभ पहुंचाने वाली थी तो उसे तैयार करने और मंजूरी देने वालों की भूमिका भी जांची जाएगी।

एसआईटी यह भी देख रही है कि एक ही फर्म या उससे जुड़े लोगों को लगातार काम कैसे मिले। संबंधित अवधि में अधिकारियों की तैनाती, ठेकेदारों को मिले काम और फाइलों पर अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका का मिलान किए जाने की संभावना है। इससे सिंडीकेट और निगम के भीतर उसके कथित मददगारों के बीच संपर्क की तस्वीर सामने आ सकती है।

शासन के अधिकारी की तैनाती से जांच को मिलेगी धार

नगर आयुक्त की ओर से शासन को भेजे गए पत्र के बाद अब निगाह इस बात पर है कि शासन इस मामले में किस अधिकारी को जांच की जिम्मेदारी देता है। नगर निगम स्तर की जांच के समानांतर यदि शासन स्तर का अधिकारी लगाया जाता है तो अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की स्वतंत्र जांच हो सकेगी। नगर निगम में ठेकेदारी के सिंडीकेट पर कार्रवाई के बाद अब जांच का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। गिरफ्तार ठेकेदारों से पूछताछ, एसआईटी द्वारा कब्जे में लिए गए अभिलेख और नगर निगम के भीतर से जुटाई जा रही सूचनाएं अब जांच की अगली दिशा तय करेंगी। यदि इनसे ठेकेदारों के साथ अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत के ठोस साक्ष्य सामने आते हैं तो आने वाले दिनों में कार्रवाई का दायरा नगर निगम के भीतर भी पहुंच सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *