निशंक न्यूज ब्यूरो।
अयोध्या के राम मंदिर में चंदा चोरी की जांच कर रही एसआईटी ने अपनी प्रारम्भिक जांच रिपोर्ट में ट्रस्ट से जुड़े किसी भी सदस्य अथवा चंदे की गिनती में लगे किसी भी कर्मचारी को क्लीनचिट नही दी गयी है। जांच रिपोर्ट में चंदे की गिनती से जुड़े कर्मचारियों पर संदेह जताया है। जिससे माना जा रहा है कि इस मामले में जल्द कोई काररवाई हो सकती है। एसआईटी ने अपनी प्रारम्भिक जांच रिपोर्ट मंगलवार को शासन को सौप दी।
बताते चले कि पिछले दिनो करोडो लोगो की आस्था के केन्द्र अयोध्या के राम मंदिर में चंदा चोरी करने की बात सामने आयी थी। कुछ लोगो ने करोडो़ रूपये चंदा चोरी की बात कही थी। लेकिन बाद में कई और लोग सामने आये अौर इन लोगो ने करीब 200 करोड़ रूपये के चंदा चोरी के आरोप लगाये। इनका यह भी कहना था कि राम मंदिर ट्रस्ट से जु़ड़े कई लोग पिछले कुछ वर्षो में करोड़पति हो गये। दुपहिया वाहनो से चलने वाले कई लोग वर्तमान में कई चार पहिया वाहनो के मालिक बन गये है।
मंदिर से चंदा चोरी की बात को गम्भीरता से लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया जिसमें आईएस व आईपीएस अधिकारियों को शामिल किया गया। जिसमें आईएएस व लखनई के कमिश्नर विजय विश्वास पंत तथा आईजी स्तर के आईपीएस अधिकारी किरण यश को शामिल किया गया।

जानकार सूत्रो का कहना है कि एसआईटी ने मंगलवार को शासन के प्रतिनिधि वरिष्ठ आईएएस संजय प्रसाद को अपनी प्रारम्भिक जांच रिपोर्ट सौंप दी। जानकार सूत्रो का कहना है कि इस जांच रिपोर्ट में एसआईटी ने किसी को भी क्लीनचिट नही दी है। लोगो ने ट्रस्ट से जुड़े चंपत राय, गोपाल राव, अनिल मिश्रा सहित प्रमुख लोगो के साथ ही चंपत राय के ड्राइवर पर आरोप लगाये गये। एसआईटी टीम ने किसी को क्लीनचिट नही दी। एसीएस गृह संजय प्रसाद को सौंपी गयी रिपोर्ट में दान की रकम गिनने से जुड़े कुछ कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा लिखने की भी संस्तुति की गयी है। एसआईटी की टीम ने ट्रस्ट की व्यवस्था पर भी सवाल उठाये है। एसआईटी ने प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए और समय मांगा है।
