आलोक ठाकुर
कानपुर। बीते वर्ष 16 दिसंबर की शाम को मैनावती मार्ग स्थित एनआरआई सिटी में रहने वाले आठवीं के छात्र प्रखर त्रिवेदी की 9वीं मंजिल से गिरकर दर्दनाक मौत होने के मामले में एफआईआर दर्ज की जाएगी। अदालत ने पुलिस को एक सप्ताह के भीतर एफआईआर लिखकर जांच करने के आदेश दिये हैं।
दिसंबर माह में छात्र प्रखर की नवीं मंजिल से गिरने के कारण हो गई थी। उस समय प्रखर के घर वालों पुलिस को बताया था कि होमवर्क पूरा न करने पर ट्यूशन टीचर की शिकायत पर दादी ने उसे डांट-फटकार दिया था। अपनी बेटी के साथ अलग रह रही मृतक किशोर प्रखर की माँ ने पति और ससुराल वालों पर बेटे की हत्या किए जाने का आरोप लगाया था।
हाई प्रोफाइल मामले में पुलिस द्वारा कथित दबाव में एफआईआर दर्ज नहीं किए जाने पर मां बोस्की त्रिपाठी ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनके अधिवक्ता अयाज अहमद खान के अनुसार मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रदीप कुमार शुक्ला ने मां बोस्की त्रिपाठी का आवेदन बीएनएस की धारा 173 (4) के अंतर्गत स्वीकारते हुए प्रभारी निरीक्षक नवाबगंज को आदेशित किया है कि वो प्रार्थनापत्र में वर्णित घटना की बाबत सुसंगत धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर नियमानुसार विवेचना सुनिश्चित कराके एक हफ्ते के अंदर न्यायालय के समक्ष आख्या प्रस्तुत करें।
बता दें कि एनआरआई सिटी के टॉवर नंबर तीन के फ्लैट नंबर 904 में अधिवक्ता सुधांशु त्रिवेदी अपने पिता एडवोकेट राजकिशोर, मां सुमनलता और 14 वर्षीय बेटे प्रखर के साथ रहते हैं। उनकी पत्नी बोस्की त्रिपाठी चार साल से कल्याणपुर स्थित अपने मायके में छोटी बेटी के साथ रहती हैं। दोनों में तलाक का मुकदमा चल रहा है। मृतक किशोर प्रखर के दादा दादी के अनुसार ने प्रखर चिंटल्स स्कूल में पढता था। घटना की शाम 5:30 बजे ट्यूशन टीचर घर पहुंची। होमवर्क पूरा न होने पर टीचर ने दादी से शिकायत कर दी। टीचर ने कहा कि प्रखर उन्हें 3:30 बजे पढ़ाने के लिए बुला रहा था लेकिन वह दो घंटे बाद पहुंची फिर भी उसने होमवर्क पूरा नहीं किया। दादी ने कह दिया कि वह तो लैपटॉप में गेम खेल रहा था। इस पर नाराज होकर प्रखर जाकर फ्लैट की बालकनी से नीचे कूद गया।
प्रखर मां बोस्की त्रिवेदी ने ससुरालियों के इस बयान को नितांत फर्जी बताते हुए, शराबी पति और ताऊ पर, दादा दादी के संग मिलकर बेटे को लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने, फिर 9वें माले से फेंककर हत्या कर डालने, तत्पश्चात वारदात को आत्महत्या का रूप देने का आरोप लगाया था। पुलिस की जांच को प्रभावित किये जाने, एफआईआर नहीं लिखे जाने पर कोर्ट से मुकदमे का आदेश कर आया है।
