कई साल बाद रोहणी नक्षत्र में मनेगा श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव

पंडित पवन तिवारी

कई वर्षों के बाद इस बार श्री कृष्ण जन्माअष्ठमी पर अद्बभुद संयोग बन रहा है। इस बार रोहणी नक्षत्र में ही भगवान का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इस बार गृहस्थ व वैष्णव एक ही दिन जन्माअष्टमी मनाएंगे। 15 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है जब रोहणी नक्षत्र में श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। 4 सितंबर को रोहिणी नक्षत्र, हर्षण योग में जन्माष्टमी मनाई जाएगी। जन्मोत्सव पूजन का शुभ मुहूर्त मध्य रात्रि 11:57 से 12:43 तक रहेगा इस जन्माअष्टमी पर सदियों बाद ग्रहों का महासंयोग बन रहा है जो कई लोगों के लिये शुभ मंगलकारी हो सकता है। इसमें अष्टमी तिथि के साथ रोहणी नक्षत्र का दुर्लभ संयोग भी शामिल है। द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भी मध्यरात्रि में अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इस बार जन्माष्टमी पर भी इसी तरह का संयोग बन रहा है। रामानंदी संप्रदाय में जन्मोत्सव के लिए रोहिणी नक्षत्र को विशेष महत्व दिया जाता है। इस बार वैष्णव और रामानंदी समेत सभी प्रमुख संप्रदायों में 4 सितंबर को ही जन्माष्टमी मनाई जाएगी।

गृहस्थ व वैष्णव एक ही दिन मनाएंगे जन्माष्टमी

ज्योतिर्विद डा. प्रीती पवन तिवारी का कहना है कि सनातन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रोहिणी नक्षत्र से युक्त अष्टमी तिथि को जन्मोत्सव के लिए सर्वश्रेष्ठ और अत्यंत फलदायी माना गया है। इसी शुभ संयोग के चलते इस वर्ष गृहस्थ एवं वैष्णव संप्रदाय दोनों एक ही दिन चार सितंबर को एक साथ जन्माष्टमी का पर्व मनाएंगे।

जन्माष्टमी पर सदियों बाद बनेगा ग्रहों का महासंयोग

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस जन्माष्टमी पर ब्रह्मांड के 7 मुख्य ग्रहों में से 5 ग्रह अत्यंत शक्तिशाली और अनुकूल स्थिति में विराजमान रहेंगे जहां मन के कारक चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में संचार करेंगे, वहीं ज्ञान और भाग्य के दाता गुरु (बृहस्पति) अपनी उच्च राशि कर्क में स्थित होकर नवग्रह मंडल को अलौकिक ऊर्जा प्रदान करेंगे इसके साथ ही आत्मा के कारक सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में और दैत्य गुरु शुक्र अपनी स्वराशि तुला में विराजेंगे

इतना ही नहीं, बुद्धि के दाता बुध अपने मित्र ग्रह की राशि में रहकर शुभ फल देंगे, जबकि मंगल और शुक्र के बीच बन रहा ‘नवपंचम राजयोग’ धन, वैभव और ऐश्वर्य में अप्रत्याशित वृद्धि के द्वार खोलेगा ज्योतिषशास्त्र में जब इतने प्रमुख ग्रह एक साथ अपनी उच्च और स्वराशि में होते हैं, तो वह कालखंड महाकल्याणकारी माना जाता है

12 राशियों के लिए कान्हा को प्रसन्न करने के अचूक और सरल उपाय

मेष राशि

बाल गोपाल को लाल या केसरिया रंग के वस्त्र पहनाएं। लाल चंदन का तिलक लगाएं।कान्हा जी को मिश्री और गुड़ का भोग लगाएं। तुलसी की माला से “ॐ क्लीं कृष्णाय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें।

वृषभ राशि

लड्डू गोपाल को चमकीले सफेद या चांदी के रंग के वस्त्र धारण करवाएं।प्रभु को माखन-मिश्री और सफेद रसगुल्ले का भोग लगाएं। सुख-समृद्धि के लिए कान्हा जी को चांदी की छोटी बांसुरी अर्पित करें।

मिथुन राशि

कान्हा जी को हरे रंग की सुंदर पोशाक पहनाएं।बाल गोपाल को धनिया की पंजीरी में विशेष रूप से तुलसी के पत्ते डालकर अर्पित करें। इससे मानसिक तनाव दूर होता है।

कर्क राशि

भगवान कृष्ण को सफेद या रेशमी पीले वस्त्र पहनाएं। दूध से बनी खीर, मावा या पेड़े का भोग लगाएं, जिसमें तुलसी दल अवश्य हो।दक्षिणावर्ती शंख से गंगाजल भरकर बाल गोपाल का अभिषेक करें और उन्हें पीला चंदन लगाएं।

सिंह राशि

कान्हा जी को गुलाबी, सुनहरे या नारंगी रंग के वस्त्र अर्पित करें। मिश्री मिले हुए माखन या सूखे मेवों का भोग लगाएं।”ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें।

कन्या राशि

लड्डू गोपाल को हरे या गहरे रंग के वस्त्र पहनाएं और मोरपंख से उनका श्रृंगार करें। कान्हा को माखन, मिश्री और हरी इलायची अर्पित करें।

तुला राशि

कान्हा जी का भगवा या हल्के पीले रंग के वस्त्रों से श्रृंगार करें। बाल गोपाल को धनिया की पंजीरी, मिश्री और कलाकंद का भोग लगाएं। इससे बौद्धिक क्षमता और घर में सुख-शांति बढ़ती है।

वृश्चिक राशि

लड्डू गोपाल को लाल या मैरून रंग की पोशाक धारण करवाएं। भगवान को गुड़ का हलवा या माखन-मिश्री का नैवेद्य लगाएं।दक्षिणावर्ती शंख में जल भरकर बाल गोपाल को स्नान कराएं, इससे रुके हुए कार्य पूरे होंगे।

धनु राशि

कन्हैया को पीले रंग के रेशमी वस्त्र (पीतांबर) पहनाएं। पीले फल, बेसन के लड्डू या केसर की खीर का भोग लगाएं।

मकर राशि

बाल गोपाल को नीले या बहुरंगी (मल्टीकलर) वस्त्र पहनाएं। कान्हा को मिश्री, माखन और काली मिर्च मिलाकर भोग लगाएं।

कुंभ राशि

भगवान कृष्ण को नीले या आसमानी रंग की सुंदर पोशाक पहनाएं।कान्हा जी को धनिया की पंजीरी और मेवे का भोग लगाएं। तुलसी का पत्ता डालना न भूलें।

मीन राशि

लड्डू गोपाल को गहरे पीले या केसरिया रंग के वस्त्र पहनाएं।प्रभु को केसर युक्त पंचामृत, मिश्री और माखन का भोग लगाएं। पूजा के समय कान्हा जी को पीला चंदन लगाएं और झूला जरूर झुलाएं।

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