गुस्से में मां मंदाकिनी , अभी न जाएं चित्रकूट

शेष मणि गुप्ता

चित्रकूट। लगातार बारिश और पहाड़ी इलाकों से उतरकर आए पानी ने मंदाकिनी नदी को रौद्र रूप दे दिया है। चित्रकूट में नदी का जलस्तर रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने से रामघाट समेत नदी किनारे के बड़े हिस्से में बाढ़ का पानी भर गया। घाट की दुकानें डूब गईं, कई घरों में पानी पहुंच गया और कर्वी शहर को जोड़ने वाले मंदाकिनी पुल की एप्रोच रोड का हिस्सा तेज बहाव में बह गया। हालात को देखते हुए पुल से भारी वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है। इससे झांसी-प्रयागराज मार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ है। ऐसे में कहाजा सकता है कि अभी आप लोग फिलहाल चित्रकूट न जाएं।

मंदाकिनी की बाढ़ का असर केवल चित्रकूट तक सीमित नहीं है। यूपी-एमपी की सीमा से लगे सतना जिले में भी मंदाकिनी, शरभंगा समेत कई नदियों और नालों के उफान ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। सतना-चित्रकूट क्षेत्र में कई सड़कें पानी में डूब गईं और कुछ पुलों को नुकसान पहुंचा है। रेलवे ट्रैक पर पानी भरने से मुंबई-हावड़ा रेलमार्ग के सतना-मानिकपुर खंड पर भी ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित हुई। कई यात्री और मालगाड़ियां रोकी गईं और बाद में धीमी गति से संचालन शुरू किया गया।

रामघाट से आश्रमों तक पानी

मंदाकिनी का पानी रामघाट और आसपास के निचले इलाकों में घुसने से सैकड़ों दुकानों और मकानों पर असर पड़ा है। दीनदयाल शोध संस्थान परिसर, आरोग्यधाम, सियाराम कुटीर, तुलसीपीठ कांच मंदिर तथा जानकीकुंड आश्रम क्षेत्र तक बाढ़ का पानी पहुंचने की खबर है। रामघाट की दुकानों में पानी भरने से व्यापारियों को भारी नुकसान हुआ है। कई स्थानों पर लोग घरों की छतों पर फंसे रहे। चित्रकूट के रामघाट, जानकीकुंड और नदी से सटे निचले इलाकों के अलावा रामधाम मोहल्ले में भी बाढ़ का पानी घरों और दुकानों तक पहुंचा है। मध्यप्रदेश की ओर चित्रकूट क्षेत्र में भी सेमरावल और मंदाकिनी के बढ़े जलस्तर से घरों और बाजारों में पानी भरने की सूचना है।

23 साल का रिकॉर्ड टूटा

शनिवार को नदी का जलस्तर असाधारण रूप से ऊपर पहुंच गया था। रविवार को पानी में कुछ कमी के संकेत जरूर मिले, लेकिन नदी अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही थी और निचले इलाकों में खतरा बरकरार रहा।

छतों पर फंसे लोगों का रेस्क्यू

जानकारों का कहना है कि बाढ़ की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कई लोग घरों की छतों पर फंस गए। चित्रकूट प्रशासन ने नावों और स्टीमर की मदद से बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। राहत एवं बचाव के लिए एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें लगाई गईं। कुछ स्थानों पर वायुसेना के हेलीकॉप्टरों से भी रेस्क्यू अभियान चलाया गया। सतना-चित्रकूट क्षेत्र में हेलीकॉप्टर से लोगों को सुरक्षित निकाला गया। प्रशासन ने होटल और लॉज में फंसे श्रद्धालुओं तथा पर्यटकों को भी सुरक्षित निकालने की कार्रवाई की। बाढ़ प्रभावितों को राहत सामग्री और भोजन उपलब्ध कराने के लिए आश्रय स्थलों की व्यवस्था की गई है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रविवार को चित्रकूट पहुंचकर हवाई सर्वे किया और प्रभावित इलाकों में पहुंचकर लोगों से मुलाकात की।

बांदा में भी बढ़ी चिंता, चित्रकूट जाने पर रोक जैसी स्थिति

मंदाकिनी के उफान का सीधा असर बांदा पर भी दिखाई देने लगा है। चित्रकूट जाने वाले प्रमुख मार्गों पर पानी और तेज बहाव के कारण यातायात बाधित हुआ है। बांदा-अतर्रा-चित्रकूट मार्ग, बिसंडा मार्ग और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से जुड़े रास्तों पर लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बांदा पुलिस ने एडवाइजरी जारी कर लोगों से अति आवश्यक होने पर ही चित्रकूट की यात्रा करने की अपील की है।

बांदा प्रशासन ने बाढ़ की स्थिति पर नजर रखने के लिए निगरानी बढ़ाई है। जिले में यमुना और केन के जलस्तर को लेकर भी प्रशासन पहले से सतर्क है और बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए नियंत्रण कक्ष को सक्रिय रखने की व्यवस्था की गई है।

प्रयागराज में गंगा-यमुना ने बढ़ाई चिंता

चित्रकूट में मंदाकिनी के उफान के साथ प्रयागराज में गंगा और यमुना का बढ़ता जलस्तर भी चिंता का कारण बन गया है। संगम क्षेत्र में पानी बढ़ने से तटवर्ती इलाकों में अलर्ट की स्थिति है। बड़े हनुमान मंदिर तक पानी पहुंचने की सूचना है। प्रशासन ने एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और जल पुलिस को हाई अलर्ट पर रखा है। आने वाले तीन-चार दिनों में जलस्तर बढ़ने की स्थिति पर विशेष निगरानी की जा रही है।

सतना में सड़क-रेल संपर्क पर असर

मध्यप्रदेश के सतना जिले में भी भारी बारिश और नदियों के उफान ने तबाही मचाई है। चित्रकूट क्षेत्र में पुल और सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। रेलवे ट्रैक पर पानी भरने के कारण कई ट्रेनों को अलग-अलग स्टेशनों पर रोकना पड़ा। बाद में प्रभावित रेलखंड पर काशन देकर सीमित गति से ट्रेनों का संचालन किया गया। इससे यूपी और एमपी के बीच सड़क और रेल संपर्क पर असर पड़ा है।

अभी थमा नहीं खतरा

हालांकि कुछ स्थानों पर नदी का पानी घटने के संकेत मिले हैं, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। मौसम विभाग ने चित्रकूट में 31 अगस्त को भी बारिश की संभावना जताई है और पूर्वी उत्तर प्रदेश में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी है। ऐसे में नदी के जलस्तर में दोबारा वृद्धि की आशंका से प्रशासन अलर्ट है।

बाढ़ का असर एक नजर में

• मंदाकिनी: 23 साल के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंची
• रामघाट: घाट और बड़ी संख्या में दुकानें पानी में डूबीं
• कर्वी: मंदाकिनी पुल की एप्रोच रोड का हिस्सा बहा
• चित्रकूट: नदी किनारे के निचले मोहल्लों और आश्रमों में पानी
• सतना: सड़क, पुल और रेलवे ट्रैक प्रभावित
• बांदा: चित्रकूट जाने वाले प्रमुख मार्गों पर यातायात बाधित
• प्रयागराज: गंगा-यमुना का जलस्तर बढ़ा, तटवर्ती इलाकों में अलर्ट
• राहत: एनडीआरएफ-एसडीआरएफ, नावों और हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू

प्रशासन ने संभाला मोर्चा

चित्रकूट: नदी किनारे के इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई। नाव और स्टीमर से लोगों को सुरक्षित निकाला गया। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें राहत कार्य में जुटीं। होटल-लॉज में फंसे श्रद्धालुओं को भी सुरक्षित निकाला गया। बां

बांदा: चित्रकूट जाने वाले मार्गों पर पुलिस की निगरानी बढ़ाई गई। लोगों से अनावश्यक यात्रा नहीं करने की अपील की गई है। यमुना-केन के जलस्तर पर भी निगरानी रखी जा रही है।

सतना: आश्रय स्थलों में भोजन और चिकित्सा की व्यवस्था की गई। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन और बचाव दल सक्रिय हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वे कर राहत कार्यों की समीक्षा की।

प्रयागराज: गंगा-यमुना के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और जल पुलिस को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

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