वेद गुप्ता
कानपुर। नगर निगम में ठेकेदारों के सिंडीकेट और टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठने के बाद अब चहेते ठेकेदारों को काम दिलाने के लिए नियमों में कथित तौर पर फेरबदल किए जाने के मामले भी सामने आने लगे हैं। एक तरफ बड़े अधिकारी पर अपने पसंदीदा ठेकेदार को करीब 20 करोड़ रुपये का व्हाइट टैपिंग का काम दिलाने के लिए नियमों में बदलाव का आरोप सामने आया है तो दूसरी तरफ एक अन्य अधिकारी पर अपने करीबी ठेकेदार को करीब 13 करोड़ रुपये का वाल पेंटिंग का काम दिलाने के लिए टेंडर प्रक्रिया में खेल करने का आरोप है। दोनों मामलों में सवाल एक ही है—क्या नगर निगम में ठेका देने के नियम काम के हिसाब से तय होते हैं या ठेकेदार के हिसाब से?
नगर निगम में सामने आए इन मामलों ने अधिकारियों और चहेते ठेकेदारों के बीच कथित गठजोड़ की तस्वीर को और गहरा कर दिया है। खास बात यह है कि दोनों ही मामलों में काम की जरूरत और प्रक्रिया से ज्यादा चहेते ठेकेदार को काम दिलाने की कवायद नजर आने के आरोप हैं।
20 करोड़ के काम के लिए तय किये नए नियम!

नगर निगम में एक बड़े इंजीनियर पर अपने चहेते ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के लिए व्हाइट टैपिंग के करीब 20 करोड़ रुपये के काम में नियमों में बदलाव कराने का आरोप सामने आ चुका है। आरोप है कि सामान्य प्रक्रिया और प्रतिस्पर्धा के बजाय ऐसी व्यवस्था तैयार की गई जिससे पसंदीदा फर्म के लिए रास्ता आसान हो गया।
टेंडर की शर्तों और तकनीकी पात्रता में किए गए बदलावों को लेकर भी सवाल उठे हैं। मामला सामने आने के बाद अब यह जांच का विषय है कि आखिर जिन शर्तों के आधार पर करोड़ों रुपये का काम दिया गया, उन्हें तैयार करने के पीछे क्या आधार था और बदलाव से किसे लाभ मिला।
13 करोड़ की वाल पेंटिंग में ‘एक घंटे’ का खेल

दूसरे मामले में नगर निगम के एक अधिकारी पर अपने करीबी ठेकेदार को करीब 13 करोड़ रुपये का वाल पेंटिंग का काम दिलाने के लिए टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी किए जाने का आरोप है। इस मामले में सबसे बड़ा सवाल टेंडर की समय-सीमा को लेकर है। आरोप है कि टेंडर की अवधि समाप्त होने से महज एक घंटे पहले टेंडर साइट पर निविदा अपलोड की गई। इससे दूसरे संभावित ठेकेदारों को पर्याप्त समय मिला या नहीं, इसे लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। इतनी बड़ी राशि के काम में निविदा जारी करने और प्रचार-प्रसार की प्रक्रिया में किया गया खेल नगर निगम कार्यालय में चर्चा का विषय बना है। सामान्य लोग भी इस पूरे खेल की जांच कराने की मांग कर रहे हैं।
बारिश में मौसम में शुरू कराया गया पेंटिंग का काम
यही नहीं, आरोप है कि बारिश का मौसम शुरू होने से ठीक पहले वाल पेंटिंग का काम शुरू करा दिया गया। सवाल यह भी है कि जब बरसात में दीवारों पर पेंटिंग की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका रहती है तो करोड़ों रुपये का यह काम इसी समय क्यों शुरू कराया गया।
चहेता ठेकेदार… और नियम उसके मुताबिक!
कहा जा रहा है कि नगर निगम के इन दोनों मामलों को साथ रखकर देखा जाए तो तस्वीर कुछ ऐसी बनती है कि अधिकारी पहले ठेकेदार तय करते हैं और फिर उसके मुताबिक नियम और प्रक्रिया का रास्ता तैयार होता है। एक मामले में 20 करोड़ रुपये के व्हाइट टैपिंग काम की शर्तों पर सवाल हैं तो दूसरे में 13 करोड़ रुपये की वाल पेंटिंग के टेंडर की समय-सीमा और काम शुरू कराने के समय पर।
नगर निगम में ठेकेदारों के कथित सिंडीकेट पर कार्रवाई के बीच सामने आए इन दोनों मामलों की खेल की जांच कराए जाने की बात उठाई जाने लगी है। माना जा रहा है कि जांच में यह बात सामने आ सकती है कि कितने टेंडरों में अधिकारियों ने नियमों में बदलाव किए, कितने काम चहेती फर्मों को मिले और इन फर्मों का अधिकारियों से क्या संबंध रहा।

अब जांच में खुलेंगे ‘किसके लिए’ बदले नियम
करोड़ों रुपये के दोनों कामों से जुड़े टेंडर दस्तावेज, तकनीकी शर्तें, निविदा जारी होने की तारीख, पोर्टल पर अपलोड होने का समय, पात्र फर्मों की सूची, तकनीकी और वित्तीय बिड तथा वर्क ऑर्डर की जांच की जाए तो पूरा खेल सामने आ सकता है।
नगर निगम में ठेकेदारों के कथित सिंडीकेट पर जांच चल रही है। ऐसे में यह भी बड़ा सवाल है कि सिंडीकेट सिर्फ ठेकेदारों तक सीमित था या उसके तार उन अधिकारियों तक भी जुड़े हैं जो पसंदीदा फर्मों को काम दिलाने के लिए प्रक्रिया में बदलाव कर सकते हैं।
