नेपाल में मरने वालों की संख्या साढ़े छह सौ के पार, सैंकड़ों लापता

निशंक न्यूज डेस्क

कानपुर। नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के चौथे दिन शनिवार को भी तबाही का मंजर खत्म नहीं हुआ है। भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ और उसके बाद निचले इलाकों में आई बाढ़ से अब तक 626 शव बरामद किये जा चुके हैं, जबकि करीब 2400 लोग अब भी लापता हैं। राहत और बचाव दलों ने अब तक 4450 लोगों को सुरक्षित निकाला है। 101 घायलों का अस्पतालों में इलाज चल रहा है। नेपाल सरकार ने साफ किया है कि राहत, बचाव और लापता लोगों की तलाश उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

राहत और बचाव अभियान में मौसम और भौगोलिक परिस्थितियां सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। कई स्थानों पर सड़कें, पुल, मकान और संचार व्यवस्था ध्वस्त होने से प्रभावित इलाकों तक पहुंचना मुश्किल है। रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन जिलों में सेना, पुलिस, सशस्त्र पुलिस, स्थानीय प्रशासन और मेडिकल टीमें संयुक्त रूप से अभियान चला रही हैं। ड्रोन और हेलीकॉप्टरों की मदद से भी प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी तथा लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का काम जारी है।

सुरंगों में फंसी जिंदगी बचाने में जुटेगा भारत-चीन

बाढ़ के बाद कई बिजली परियोजनाओं की सुरंगों में लोगों के फंसे होने की आशंका ने बचाव अभियान को और मुश्किल बना दिया है। नेपाल सरकार ने अब सुरंगों को खोलने, मलबे के भीतर जीवित लोगों का पता लगाने, शवों की पहचान के लिए डीएनए जांच और शवों को सुरक्षित रखने के लिए विशेषज्ञ तकनीकी सहायता मांगी है।

भारत की 11 सदस्यीय विशेष तकनीकी टनल रेस्क्यू टीम नेपाल पहुंच चुकी है, जबकि चीन की टनल रेस्क्यू टीम भी भेजी जा रही है। नेपाल के विदेश मंत्रालय के अनुसार दोनों देशों की विशेषज्ञ टीमें स्थानीय सुरक्षा बलों के साथ मिलकर जटिल बचाव अभियान में सहयोग करेंगी।

भारत की राहत की तीन खेप

भारत ने नेपाल के लिए अब तक 57.5 टन मानवीय सहायता और दवाएं भेजी हैं। तीन चरणों में पहुंचाई गई सहायता में राहत सामग्री, जरूरी दवाएं और खाद्य सामग्री शामिल हैं। शुरुआती खेप में अस्थायी आश्रय, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप और दवाएं भेजी गई थीं।

भारत ने राहत सामग्री के साथ बचाव सहयोग भी बढ़ाया है। नेपाल की सरकार ने भारत की सहायता की सराहना करते हुए कहा है कि प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव के लिए दोनों देशों के बीच समन्वय जारी है।

मलबे में अपनों की तलाश

बाढ़ ने नेपाल के साथ बड़ी संख्या में विदेशी नागरिकों को भी प्रभावित किया है। नेपाल सरकार के मुताबिक अब तक 187 से अधिक विदेशी नागरिकों को बचाया जा चुका है, जबकि 517 विदेशी नागरिकों समेत करीब 2400 लोग अब भी लापता हैं। प्रभावित इलाकों में विदेशी नागरिकों के परिवार अपनों की जानकारी के लिए लगातार प्रशासन और दूतावासों से संपर्क कर रहे हैं।

नेपाल सरकार ने कहा है कि लापता लोगों की सूची का सत्यापन परिवारों, स्थानीय प्रशासन, अस्पतालों और संबंधित दूतावासों के साथ मिलकर किया जा रहा है। अधिकारियों ने अपुष्ट आंकड़े प्रसारित न करने की अपील की है क्योंकि बचाव और पहचान का काम अभी जारी है।

सिर्फ राहत नहीं, अब पुनर्वास की चिंता

बाढ़ से सड़क, पुल, मकान और जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान हुआ है। नेपाल सरकार ने माना है कि तबाही का पैमाना इतना बड़ा है कि राहत अभियान के बाद पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय सहायता की जरूरत पड़ेगी। जरूरतों का विस्तृत आकलन तैयार किया जा रहा है।

नेपाल के विदेश मंत्री ने शनिवार को यह भी स्पष्ट किया कि नेपाल ने अंतरराष्ट्रीय सहायता को खारिज नहीं किया है। देश को तत्काल राहत के साथ सुरंग बचाव, तकनीकी विशेषज्ञता, फोरेंसिक-डीएनए जांच और पुनर्निर्माण में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है।

नेपाल की मदद को आगे आए कई देश

भारत : तीन चरणों में 57.5 टन मानवीय सहायता, दवाएं और जरूरी राहत सामग्री। इसके साथ 11 सदस्यीय विशेषज्ञ टनल रेस्क्यू टीम भी भेजी गई।

चीन : टनल रेस्क्यू टीम भेज रहा है। नेपाल को 30 बेली ब्रिज उपलब्ध कराने और करीब 2000 शवों को सुरक्षित रखने के लिए एयरटाइट बैग देने पर सहमति जताई है।

ब्रिटेन : राहत और पुनर्वास के लिए 50 लाख पाउंड की मानवीय सहायता का पैकेज घोषित किया है। इसके अलावा ब्रिटिश नागरिकों की मदद के लिए रैपिड डिप्लॉयमेंट टीम भेजी गई है।

दक्षिण कोरिया : नेपाल के राहत और शुरुआती पुनर्प्राप्ति प्रयासों के लिए 10 लाख डॉलर की मानवीय सहायता देने की घोषणा की है।

ऑस्ट्रेलिया : राहत प्रयासों के लिए 20 लाख डॉलर विश्व खाद्य कार्यक्रम के जरिये उपलब्ध कराए गए हैं। प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री हेलीकॉप्टरों से पहुंचाई जा रही है।

जापान : नेपाल सरकार के अनुसार जापान से भी आवश्यक राहत सामग्री पहुंच रही है।

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