Kanpur: इंद्रपाल की कृपा से यादव जी भी चलाते रहे सिंडीकेट

आलोक ठाकुर

कानपुर। नगर निगम में ठेकों पर कथित तौर पर प्रभाव रखने वाले ठेकेदारों के सिंडीकेट पर मुख्यमंत्री की नजर टेढ़ी होने के बाद अब कार्रवाई का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। गुरुवार को सिंडीकेट चलाने के आरोप में दो ठेकेदारों की गिरफ्तारी, करीब आधा दर्जन ठेकेदारों की फर्मों को ब्लैकलिस्ट किए जाने और लगभग सौ करोड़ रुपये के टेंडर निरस्त किए जाने के बाद नगर निगम में ठेका व्यवस्था को भी बदल दिया गया है। अब ठेके ई-टेंडरिंग के जरिए देने की व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। पुलिस के सामने गोविंद शर्मा की तरह ही नगर निगम में दबाव बनाकर सिंडीकेट चलाने वाले यादव जी का नाम सामने लाया गया है। कहा जा रहा है कि यह यादव जी दिल्ली की राजनीति में सक्रिय एक प्रमुख सत्ताधारी नेता के करीबी के सहारे नगर आयुक्त के सहारे ठेंकेदारी का बड़ा खेल करते रहे हैं।

पूर्व नगर आयुक्त के करीबी यादव जी की गुपचुप शुरू की गई जांच

जांच में सामने आए तथ्यों ने नगर निगम में लंबे समय से प्रभावी बताए जा रहे एक और कथित सिंडीकेट की ओर पुलिस का ध्यान खींच दिया है। सूत्रों के मुताबिक, गोविंद शर्मा के सक्रिय होने से पहले नगर निगम में एक ‘यादव जी’ भी ठेकेदारों के बीच खासा प्रभाव रखते थे। बताया जा रहा है कि वह तत्कालीन नगर आयुक्त के करीबी होने का दावा करते हुए नगर निगम के ठेकों में अपनी पकड़ बनाए हुए थे।

दिल्ली के नेता का नाम लेकर नगर निगम में चलाता रहा सिंडीकेट

जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में सत्तारूढ़ दल के एक नेता और उनके कार्यालय से जुड़े कानपुर के दक्षिणी इलाके में रहने वाले एक युवक के संपर्क के सहारे यादव जी ने नगर निगम में अपना नेटवर्क मजबूत किया था। आरोप है कि किसी बड़े ठेके के लिए ठेकेदारों के नाम आगे बढ़ने से पहले अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच उनकी राय को महत्वपूर्ण माना जाता था। यहां तक बताया जा रहा है कि कई मामलों में ठेका किस फर्म को मिलेगा, इसे लेकर भी उनकी सहमति को अहम माना जाता था।

अब पुलिस इस पूरे नेटवर्क की भूमिका की पड़ताल कर रही है। जांच का अहम बिंदु यह है कि नगर निगम के ठेके दिलाने के नाम पर कथित तौर पर किस तरह का लेनदेन या प्रभाव का खेल चलता था और इसमें कौन-कौन लोग जुड़े थे। पुलिस पुराने टेंडरों, संबंधित फर्मों, अधिकारियों से संपर्क और ठेकेदारों के बीच हुई गतिविधियों की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

गोविंद शर्मा के नेटवर्क की जांच के दौरान खुल रही पुरानी परतें

नगर निगम में ठेका सिंडीकेट के खिलाफ शुरू हुई कार्रवाई को केवल मौजूदा ठेकों तक सीमित नहीं माना जा रहा है। जांच आगे बढ़ने के साथ पुराने ठेकों और उनसे जुड़े लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। इसी दौरान गोविंद शर्मा के अलावा पूर्व में प्रभावी रहे कथित नेटवर्क की जानकारी पुलिस के सामने आने की बात कही जा रही है।

करीब सौ करोड़ रुपये के टेंडर निरस्त किए जाने और ठेकेदारों की फर्मों पर कार्रवाई के बाद नगर निगम के भीतर यह सवाल भी उठ रहा है कि वर्षों से ठेकों की प्रक्रिया पर प्रभाव रखने वाले लोगों ने किस तरह अपनी पकड़ बनाई। पुलिस की जांच में यदि यादव जी की भूमिका की पुष्टि होती है तो नगर निगम के ठेका कारोबार में प्रभाव और कथित संरक्षण के एक पुराने अध्याय की भी परत खुल सकती है।

दिल्ली कनेक्शन की भी पड़ताल में जुटी पुलिस

नगर निगम के कथित सिंडीकेट की जांच में दिल्ली कनेक्शन भी पुलिस के रडार पर है। सूत्रों के मुताबिक, ‘यादव जी’ को दिल्ली में सत्तारूढ़ दल के एक नेता का करीबी बताया जाता था। नेता के कार्यालय में काम करने वाले एक युवक के जरिए यादव जी की पहुंच और प्रभाव बढ़ने की बात भी जांच में सामने आई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह संपर्क केवल राजनीतिक पहचान तक सीमित था या नगर निगम के ठेकों में इसका इस्तेमाल भी किया जाता था। हालांकि इस संबंध में जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

यादव जी की सलाह से तय होते थे ठेकेदार?

जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि नगर निगम में कुछ ठेकों के लिए ठेकेदारों के नाम तय होने से पहले ‘यादव जी’ की राय ली जाती थी। उनकी सहमति के बाद ही संबंधित फर्म को ठेका मिलने का रास्ता साफ होने की बात कही जा रही है। अब पुलिस पुराने टेंडरों और उनमें शामिल फर्मों का रिकॉर्ड खंगालकर यह पता करने का प्रयास कर रही है कि यह प्रभाव वास्तव में कितना व्यापक था और इसके पीछे कोई आर्थिक लेनदेन हुआ था या नहीं।

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