सरस वाजपेयी
कानपुर। नगर निगम में ठेका दिलाने के साथ ठेकेदारों और अधिकारियों पर दबाव बनाने के आरोपी गोविंद शर्मा का नाम कानपुर के लिए नया नहीं है। कभी सामान्य ठेकेदार के रूप में काम करने वाला गोविंद एक युवा आईएएस अधिकारी के संपर्क में आने के बाद देखते ही देखते ठेकेदारी की दुनिया में तेजी से आगे बढ़ा। जानकारों के मुताबिक, कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) में इस आईएएस अधिकारी की तैनाती के दौरान गोविंद का संपर्क उनसे हुआ। इसके बाद उसकी ठेकेदारी का दायरा बढ़ता चला गया। इसकेक पहले वह सरकारी कर्मचारी था।
बताया जाता है कि आईएएस अधिकारी के संपर्क में आने के बाद गोविंद को ठेकेदारी का काम शुरू करने का अवसर मिला। इसके बाद अधिकारी ने अपने संपर्क वाले अफसरों के माध्यम से गोविंद को दूसरे जिलों में भी काम दिलाने में मदद की। शुरुआत में छोटे कामों से सक्रिय हुआ गोविंद धीरे-धीरे नगर निगम और विकास प्राधिकरणों के बड़े कामों तक पहुंच बनाने में सफल रहा।
अफसरों की कृपा से कई जिलों में बना ली पकड़

गोविंद का नेटवर्क केवल कानपुर तक सीमित नहीं रहा। उसके संपर्क बढ़ते गए और कानपुर, आगरा समेत कई जिलों के नगर निगम और विकास प्राधिकरणों में उसकी आवाजाही बढ़ गई। जानकारों का कहना है कि अधिकारियों से बढ़ते संपर्क और ठेकेदारी के काम मिलने के साथ ही गोविंद की पकड़ भी मजबूत होती गई। कुछ समय बाद वह सामान्य ठेकेदार से ऐसा व्यक्ति बन गया, जिसकी नगर निगम और प्राधिकरणों के कामकाज में दखल की चर्चा होने लगी।
आईएएस के संपर्क में आकर गोविंद ने खड़ा किया ठेकेदारी में साम्राज्य

जानकारों के मुताबिक गोविंद शर्मा पहले सरकारी कर्मचारी था। आईएएस अधिकारी के संपर्क में आने के बाद उसने नौकरी से इस्तीफा दे दिया और पूरी तरह ठेकेदारी के कारोबार में उतर गया। इसके बाद उसने नगर निगम और विकास प्राधिकरणों में काम हासिल करने के लिए अपने संपर्कों का इस्तेमाल शुरू किया। धीरे-धीरे उसने अलग-अलग विभागों में अपना नेटवर्क खड़ा कर लिया।
कुछ अफसरों ने बदल दी गोविंद की दुनिया
गोविंद की कहानी में सबसे अहम मोड़ आईएएस अधिकारी से संपर्क को माना जा रहा है। इससे पहले जहां वह सामान्य ठेकेदार की तरह काम करता था, वहीं संपर्क बढ़ने के बाद कई जिलों में उसके काम का दायरा फैलता गया। अधिकारियों से सीधे संपर्क और विभागीय कामकाज की जानकारी ने उसे दूसरे ठेकेदारों से अलग स्थिति में पहुंचा दिया।
अब जब गोविंद के खिलाफ ठेका दिलाने और अधिकारियों-ठेकेदारों पर दबाव बनाने के आरोप में मुकदमा दर्ज हो चुका है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है, तब उसके पुराने संपर्क भी जांच के दायरे में आने की संभावना है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि गोविंद ने किन लोगों के सहारे अपना नेटवर्क खड़ा किया और किन अधिकारियों व ठेकेदारों से उसका लगातार संपर्क रहा।
गोविंद के खिलाफ चल रही जांच केवल मौजूदा आरोपों तक सीमित रहती है या उसके पुराने ठेकेदारी नेटवर्क तक पहुंचती है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। उसके पुराने मोबाइल नंबर, संपर्कों और विभिन्न जिलों में मिले ठेकों की पड़ताल से यह पता चल सकता है कि उसका प्रभाव किन-किन विभागों और अधिकारियों तक था। पुलिस की जांच आगे बढ़ने के साथ गोविंद के ठेकेदारी साम्राज्य के पीछे रहे लोगों की भूमिका भी सामने आने की संभावना है।
राजस्थान में मिली टेंडर माफिया की लोकेशन
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल का कहना है कि हर बिंदू पर जांच की जा रही है। जो लोग टेंडर माफिया मोविंद शर्मा की मदद करते थे उनका भी पता लगाया जा रहा है। फिलहाल गोविंद शर्मा की लोकेशन राजस्थान में मिली है। इसके पहले वह मध्य प्रदेश में था। गोविंद की गिरफ्तारी के लिये पुलिस टीम लगी है जल्द ही उसकी गिरफ्तारी की जाएगी।
