निशंक न्यूज
कानपुर/बिठूर। गंगा घाटों की सुरक्षा को लेकर पुलिस-प्रशासन की चौकसी के दावों के बीच सोमवार को बिठूर के गुदारा घाट पर बड़ा हादसा हो गया। चकरपुर मंडी में रहने वाले दो किशोर गंगा में स्नान के दौरान गहरे पानी में चले गए और डूब गए। सूचना मिलते ही जल पुलिस और स्थानीय गोताखोरों ने दोनों की तलाश शुरू की, लेकिन देर शाम तक उनका कोई सुराग नहीं लग सका।
डीसीपी ने निरीक्षण कर दिये थे घाटों पर चौकसी बरते रहने के निर्देश
बताया गया है कि सावन का सोमवार होने के कारण पहले ही इस बात की संभावना थी कि बिठूर में गंगा स्नान करने के लिये तमाम लोग पहुंच सकते हैं इसकी चलते डीसीपी कासिम आबिदी ने मोटरबोट से बिठूर के गंगा घाटों का निरीक्षण किया था। उन्होंने पुलिसकर्मियों को घाटों पर विशेष चौकसी बरतने और श्रद्धालुओं को गंगा में अधिक गहराई तक जाने से रोकने के निर्देश दिए थे। इसके बाद पुलिस भी सक्रिय थी लेकिन सोमवार की सुबह बिटूर के गुदारा घाट में गंगा स्नान करने लिये पहुंचे सचेंडी थानाक्षेत्र के चकरपुर मंडी में रहने वाले सतीश सोनकर (17) और आशिक सोनकर (16) गहरे पानी में पहुंच गए और तेज धारा की चपेट में आकर गंगा में डूब गए।
गंगा में डूब रहे दो युवकों का शोर सुनकर आसपास मौजूद गोताखोर इन्हें बचाने के लिये गंगा में कूद गए लेकिन तमाम प्रयास के बाद भी यह लोग दोनों को ढूंढ नहीं सके। इस बीच जानकारी मिलने पर कानपुर कमिश्नरेट पुलिस के जवान भी पहुंचे और मोटर वोट के सहारे डूबे युवकों को तलाशने के काम में लग गए लेकिन काफी देर तक इन दोनों को ढूंढा नहीं जा सके। दोनों के डूबने की जानकारी मिलने पर दोनों के परिजन भी घाट पर पहुंच गए। वहां चीख-पुकार मच गई। जल पुलिस और गोताखोर गंगा में दोनों की तलाश करते रहे।
गहराई तक पहुंचने से रोकने की व्यवस्था पर सवाल
सावन में गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ जाती है। ऐसे में केवल घाट पर पुलिसकर्मियों की तैनाती पर्याप्त नहीं है। संवेदनशील घाटों पर पानी की गहराई के अनुसार डीप-वॉटर बैरिकेडिंग, लगातार पेट्रोलिंग और प्रशिक्षित गोताखोरों की मौजूदगी जरूरी है। कानपुर में घाटों के निरीक्षण के दौरान भी गहरे पानी और फिसलन वाले हिस्सों में मजबूत बैरिकेडिंग तथा बड़े चेतावनी बोर्ड लगाने के निर्देश दिए जा चुके हैं। गंगा के बढ़ते जलस्तर और तेज बहाव की स्थिति में घाटों पर जल पुलिस की संख्या बढ़ाने तथा जरूरत पड़ने पर नौका संचालन रोकने जैसे कदम भी प्रशासन द्वारा अपनाए जाते रहे हैं।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
दोनों किशोरों के गंगा में डूबने की खबर मिलते ही परिजन घाट पर पहुंच गए। देर तक तलाश के बावजूद दोनों का पता नहीं चलने से परिजनों की चिंता बढ़ती गई। जल पुलिस और गोताखोर लगातार गंगा में संभावित स्थानों पर तलाश करते रहे।
