फर्जी सरकारी दस्तावेज बनाकर लोगों को ठगने वाले गिरफ्तार

महेश सोनकर

कानपुर। कल्याणपुर पुलिस और साइबर क्राइम की टीम ने एक ऐसे गिरोह का खुलासा किया है जो फर्जी दस्तावेज तैयार कर जरूरतमंद भोले भाले लोगों को ठगता था। पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार कर इनके पास से कई कुट रचित दस्तावेज बरामद किये। यह जालसाज लोगों के फर्जी आधार कार्ड तथा अन्य प्रपत्र बनवाते थे इसके पास से विधायकों की फर्जी मोहर सहित तमाम सामान बरामद हुआ।

पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ लोग जरूरत मंद तो कभी जालसाज दिमाग के लोगों के लिये फर्जी प्रपत्र तैयार कर रहे हैं। जिनका प्रयोग नियम विरुध तरीके से किया जाता है। इस बात की जानकारी डीसीपी कासिम आबिदी को मिली तो उन्होंने अपने लोगों को इस गिरोह का खुलासा करने में लगाया। सूचना पुख्ता होने के बाद डीसीपी की टीम तथा कल्याणपुर पुलिस ने शुक्रवार को कल्याणपुर क्षेत्र में एक साल से अधिक समय से फर्जी जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, मार्कशीट, सरकारी दस्तावेज सहित अन्य कई दस्तावेज तैयार करने वाले तीन कैफे संचालकों को गिरफ्तार किया गया है। जिनके पास से कई मोबाइल फोन, लैपटॉप डेस्कटॉप,कंप्यूटर सीपीयू, फिंगर प्रिंट स्कैनर, वेब कैमरा, की-बोर्ड,लैपटॉप, 21 सरकारी गजट, 120 जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र, 112 जाति एवं निवास प्रमाण पत्र, विधायक की फर्जी मोहर लगी दो संदिग्ध आधार अपडेट प्रमाण पत्र, 7 फर्जी स्टाम्प एवं मोहरें, 3 ड्राइविंग लाइसेंस, पांच वोटर आईडी कार्ड, 8 पैन कार्ड, 47 आधार कार्ड, व्यक्तियों के सरकारी एवं व्यक्तिगत दस्तावेजों का बंडल, उन्नतीस हजार दो सौ बीस रुपये बरामद हुए हैं। अभियुक्त अपने कैफे में बैठकर दर्जन भर से अधिक फर्जी पोर्टल के माध्यम से लोगों की व्यक्तिगत जानकारी भरकर फर्जी कागजात तैयार कर रहे थे।

कानपुर पश्चिम डीसीपी एस एम कासिम आबिदी ने खुलासा करते हुए बताया कि ग्रेजुएशन कर रहे अभियुक्त कल्याणपुर नानकारी आईटी निवासी तेजस पाल, इंटर पास नारामऊ बिठूर निवासी नितेश कुमार और लव-कुश पुरम थाना कल्याणपुर निवासी अनुराग बीते कई वर्षों से आनंदेश्वर, माही और मनी नाम से कैफे चलाते हैं, बीते एक साल से तीनों अभियुक्त कई फर्जी पोर्टल के माध्यम से लोगों की व्यक्तिगत जानकारी भरकर फर्जी जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, वोटर कार्ड, आईडी, पैन कार्ड, आय जाति, एवं निवास प्रमाण पत्र तैयार करते थे। दस्तावेज असली दिखें इसके लिए वह विभिन्न सरकारी कार्यालय एवं संस्थाओं, विधायक, प्रधानाचार्य एवं डिजिटल सेवा केंद्रों के नाम की मोहरों का प्रयोग करते थे। जिसके एवज में वह फर्जी कागज बनवाने वालों से मोटी रकम वसूलते थे। आधारकार्ड में फर्जी संशोधन के नाम पर 17 हजार से बीस हजार रुपए की रकम वसूलते थे।

फ़र्जी कागजात बनवाने वालों की भी खैर नहीं

साइबर टीम ने जांच की तो अभियुक्तों द्वारा बताए गए पोर्टल, प्रमाणपत्रों में दर्ज क्यूआर कोड स्कैन करने पर वेबसाइड फर्जी निकली। एक पोर्टल का संबंध कजाकिस्तान से मिलने के प्रमाण मिले हैं जिसकी जांच की जा रही है। अभी तक कितने लोगों ने फर्जी दस्तावेज तैयार कराए हैं इसके संबंध में भी आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। मिली जानकारी और दस्तावेजों के आधार पर उनकी भी पुलिस पहचान कर रही है।

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