अनीता वाजपेयी
भीषण गर्मी पड़ रही है लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो रहा है। अभी सबसे गर्म दिन आना बाकी है। गर्मी के इन दिनों को सामान्य वातचीत में नौतपा के नाम से जाना जाता है। इस बार नौतपा 25 मई से पड़ रहे हैं जो 2 जून चक चलेगा। इन नौ दिनों आप दान कर पुण्य कमा सकते हैं खासकर जल का दान बहुत महत्वपूर्ण माना जाती है।

हर साल ज्येष्ठ मास के दौरान नौतपा का आरंभ होता है। इस दौरान सूर्य 15 दिनों तक रोहिणी नक्षत्र में भ्रमण करते हैं। इस 15 दिनों की अवधि के शुरुआती 9 दिनों को ही नौतपा कहा जाता है। इन दिनों में बारिश का होना बारिश के मौसम के लिए अच्छा नहीं मना जाता है। जबकि, नौतपा के दौरान बारिश का न होना मानसून में अच्छी बारिश का संकेत माना जाता है।

ज्येतिष सेवा संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष आचार्य पं. पवन तिवारी की कहना है कि 25 मई 2026 से 2 जून तक सूर्य वृषभ राशि में रोहिणी नक्षत्र में रहेंगे और इसके बाद मृगशिरा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। ज्योतिष में सूर्य की इसी अवधि को नौतपा कहा जाता है। इन नौ दिनों तक सूर्य की किरणें सीधे पृथ्वी पर पड़ती हैं, जिसकी वजह से गर्मी का असर सबसे अधिक रहता है। 10वें दिन से सूर्य और पृथ्वी की दूरी बढ़ने लगती है। नौतपा के दौरान भयंकर गर्मी पड़ती है और देश के ज्यादातर हिस्सों में हीटवेव चलती है।

नौतपा के नौ दिनों को गर्मी के सबसे भीषण दिनों में गिना जाता है। खेती के लिए नौतपा बहुत जरूरी है। इसको लेकर एक कहावत भी है ‘तपै नवतपा नव दिन जोय, तौ पुन बरखा पूरन होय’ यानी नौतपा के इन दिनों में जितनी अधिक गर्मी पड़ेगी आने वाले मानसून में उतनी ही अच्छी बारिश होगी। नौतपा के दौरान पानी का अधिक सेवन करना चाहिए। इस दौरान नारियल पानी, दही और मौसमी फलों शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं।
यह करने से नौतपा में मिलता है पुष्य
सुबह उठकर स्नान करने के बाद सूर्यदेव को अर्घ्य दें।
नौतपा के दिनों में आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ करें।
इस दौरान सूर्य मंत्र और सूर्य गायत्री मंत्र का जाप भी किया जा सकता है।
नौतपा के दौरान पानी का दान करना शुभ माना जाता है।
सूर्य को प्रसन्न करने के लिए गुड़, घी, गेहूं, लाल कपड़ा गरीबों को दान करें।

यह होता है नौतपा
“नौतपा” शब्द दो शब्दों “नौ” और “तपा” से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है नौ दिनों की तीव्र गर्मी। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में रहने के शुरुआती नौ दिन विशेष प्रभावशाली माने जाते हैं। ग्रामीण भारत में यह मान्यता आज भी प्रचलित है कि यदि नौतपा के दौरान तेज गर्मी पड़े, तो मानसून अच्छा होता है और कृषि उत्पादन बेहतर रहता है। किसान समुदाय इन दिनों को मौसम परिवर्तन के महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखता है।
नौतपा में यह भी है परंपरा
नौतपा भारतीय संस्कृति और लोकजीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा भी है। इस नौ दिनों में जलदान, अन्नदान और पशु पक्षियों की सेवा को विशेष पुण्यकारी माना जाता है।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोग राहगीरों के लिए प्याऊ लगाते हैं, मिट्टी के घड़ों में ठंडा पानी रखते हैं तथा पक्षियों के लिए दाना पानी की व्यवस्था करते हैं। कई स्थानों पर छाछ, बेल शरबत, सत्तू और नींबू पानी का वितरण भी किया जाता है।
नौतपा में यह भी कर सकते हैं दान
मिट्टी का घड़ा और ठंडा पानी, छाता, गमछा और सूती वस्त्र, सत्तू, गुड़, बेल शरबत और फल, पशु पक्षियों के लिए पानी और दाना, मजदूरों और राहगीरों को ओआरएस और पानी की बोतलें
दोपहर में न निकलें घर से
डाक्टर इस बात की देते हैं सलाह
कानपुर के प्रमुख नर्सिंग होम नार्थ स्टार के संचालक प्रमुख चिकित्सक डाक्टर अभिषेक त्रिवेदी का कहना है कि नौतपा के दौरान लू, डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों, बुजुर्गों और बाहर काम करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिये। डाक्टर त्रिवेदी का कहना है कि वर्तमान मौसम खासकर नौतपा के दिनों लोगों को दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक अनावश्यक रूप से घर से बाहर नहीं निकलना चाहिये। उन्होंने लोगों को पर्याप्त पानी पीने और हल्का भोजन लेने की सलाह दी है।
कानपुर दक्षिण के प्रमुख नर्सिंग होम अहाना हास्पिटल के संचालक प्रमुख चिकित्सक डाक्टर अनिकेत त्रिपाठी का कहना है कि गर्मी के इस मौसम में शरीर को हाइड्रेट रखना, सूती कपड़े पहनना और सिर ढककर बाहर निकलना आवश्यक है।
