अमित गुप्ता
नौकरी हो या फिर ठेकेदारी अगर अधिकारी आप पर मेहबान हे तो सरकारी नियम कोई मायने नहीं रखते। इसके सरकारी राजस्व का नुकसान हो या विभाग की किरकिरी होती हो सब मैनेज हो जाता है। कानपुर के आबकारी विभाग में ऐसा ही एक मामला सामने आया है। जिसमें अवैध शराब बेंचने के आरोप में जेल जा चुके एक व्यक्ति से चरित्र प्रमाण पत्र लिये बबगैर ही उसे देशी शराब के ठेंके का अावंटन कर दिया गया। मामला जिलाधिकारी तक पहुंचा तो सरकारी राजस्व बढ़ाने और आम लोगों की समस्या सुन उनका निस्तारण कराने के लिये लगातार सक्रिय रहने वाले जिलाधिकारी ने सबंधित प्रकरण पर आबकारी विभाग से रिपोर्ट मांगी है।
चरित्र प्रमाण पत्र में नहीं किया गया मुकदमों का उल्लेख
आबकारी विभाग से जुड़े जानकार लोगों की मानी जाए तो शराब ठेंका आवंटन में पारदर्शिता बनाए रखने और ज्यादा राजस्व हासिल करने के लिये शासन ने कई नियम बना रखे हैं जिसमें एक नियम यह भी है कि गंभीर अपराधिक मुकदमों में नामजद किसी व्यक्ति को शराब का ठेका आवंटित नहीं किया जाएगा। शराब ठेके के लिये आवेदन के साथ ही आवेदक का चरित्र प्रमाण पत्र भी लिया जाता है ताकि स्पष्ट हो सके कि आवेदक अवैध शराब बेंचने सहित अन्य किसी गंभीर अपराध में लिप्त तो नहीं रहा है। ऐसा इसलिये भी किया जाता है ताकि शराब की दुकान का ठेंका लेने वाला अपनी अपराधिक छवि का लाभ उठाकर आम जनता को परेशान न कर सके क्योंकि साफ है कि अगर शराब का ठेकेदार आसपास रहने वाले आम लोगों को परेशान करता है तो इससे शासन की छवि आम लोगों के बीच खराब होती है।
अधिवक्ता की शिकायत पर सामने आया मामला

फर्जी चरित्र प्रमाण पत्र बनवाने तथा अवैध शराब बेंचने के आरोप में जेल गये युवक को देशी शराब का ठेंका आवंटित करने का मामला समाजसेवा में लगे एक अधिवक्ता की शिकायत पर सामने आया। शिवाकत में अधिवक्ता ने आबकारी विभाग के अधिकारियों की पोल खोलते हुए कहा कि पुष्पेंद्र सिंह के खिलाफ विधनू पर हनुमंत बिहार थानों में अवैध शराब की बिक्री सहित पांच मुकदमें दर्ज हैं और पूर्व में डीसीपी दक्षिण द्वारा उसे जिलाबदर भी किया जा चुका है। इस मामले में मंडलायुक्त कार्यालय से उसे कुछ राहत मिली थी। बताया गया है कि इन मुकदमों को नजर अंदाज कर एक फर्जी चरित्र प्रमाण पत्र के आधार पर उसे रतन लाल नगर क्षेत्र में देशी शराब की दुकान का आवंटन कर दिया गया। जो शासन के आनियमों का उलंघन है। अधिवक्ता ने गलत तरीके से जारी चरित्र प्रमाण पत्र रद करने और पूर्व में जारी चरित्र प्रमाण पत्र में दर्ज अपराधिक मुकदमों का जिक्र न करने की जांच करने की मांग की है।

अभिलेखों से फर्जी चरित्र प्रमाण पत्र हटवाने का खेल
बताया गया है कि कानपुर में तैनाती के बाद लगातार आम पीड़ित की मदद करने व सरकारी योजनाओं को आगे बढ़ाने के काम में सक्रिय करने वाले जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने चरित्र प्रमाण पत्र में मुकदमों की अनदेखी करने व अवैध शराब की बिक्री सहित अन्य मुकदमें दर्ज होने के बाद भी किसी को शराब की दुकान का आवंटन करने की बात को गंभीरता से लेकर आबकारी विभाग से जवाब मांगा है। जिलाधिकारी द्वारा फर्जी तरीके से चरित्र प्रमाण पत्र बनवाने के मामले को गंभीरता से लेने पर आबकारी विभाग के उन अधिकारियों में हड़कंप मचा है जिनकी मेहबानी इस ठेकेदार पर बनी रहती है। जानकारों का कहना है कि ठेकेदार को फर्जी चरित्र प्रमाण पत्र बनवाने के आरोप से बचाने के लिये आबकारी विभाग की फाइल से उसका चरित्र प्रमाण पत्र हटाने की तैयारी की जा रही है। इधर आबकारी विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि सजायाफ्ता को ठेंका नहीं दिया जा सकता है। आरोपी ठेकेदार किसी मामले में सजायाफ्ता नहीं है। पेशबंदी में उसके खिलाफ कुछ मुकदमें लिखाए जाने की बात सामने आई है।

