सुधीर दीक्षित
कानपुर के सबसे प्राचीन इलाकों में एक ग्वालटोली का क्षेत्र इन दिन भक्ति रस में डूबा है। कारण यह कि यहां 29 अप्रैल को एक प्रतिमा के रूप में भगवान परशुराम पधार रहे हैं। इसके साथ ही सैंकड़ों साल पुरान प्राचीन फूलमती मंदिर तथा ब्रह्मेश्वर मंदिर में मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा की जा रही है। इस चार दिवसीय धार्मिक आयोजन की शुरूआत रविवार 26 अप्रैल से शुरू हो गई। तीस अप्रैल को विशाल भंडारे के साथ आयोजन का समापन होगा।
प्राचीन है फूलमती की मंदिर
शहर के सबसे पुरान मोहल्लों में एक ग्वालटोली इलाके में माता का प्राचीन मंदिर है। वैसे तो इसकी स्थापना की तय तारीख क्षेत्रीय लोग भी नहीं बता सके लेकिन करीब 75 वर्ष के ग्वालटोली निवासी ठाकुर अजमेर सिंह तथा भाजपा से जुड़े सेवानिवृत्त स्वास्थ्य कर्मी विनीत मिश्रा का कहना है कि वह जब से ग्वालटोली में रह रहे हें अपने व क्षेत्र के बुजुर्गों से सुनते आ रहे हैं कि यह मंदिर आजादी के पहले का है। अंग्रेजों द्वारा अपने सामान को लाने ले जाने के लिये परमट घाट व रानी घाट का इस्तेमाल किया जाता था। परमट में भगवान महादेव का आनंदेश्वर मंदिर स्थापित है और रानी घाट में कई मंदिर हैं। इन दोनों स्थानों से अंग्रेजों का व्यापार होने के कारण उस समय ही ग्वालटोली इलाका बसा जिसमें बीच बाजार में फूलमती मंदिर की स्थापना की गई। जिसमें ग्वालटोली खलासी लाइन तथा अहिराना के तलाम श्रद्धालु पूजा करने आते हैं।
इसलिये पड़ी मूर्तियों के प्राण प्रतिष्ठा की आवश्यकता

ग्वालटोली में रहने वाले संघ परिवार से जुड़े विनीत मिश्रा, किशन साहू तथा अनिल पांडे आदि का कहना है। प्राचीन फूलमंती मंदिर क्षेत्रीय लोगों की आस्था का केंद्र रहा। इस मंदिर मेंशुरुआत से ही पत्थर की मूर्तियां स्थापित थीं। भक्तों द्वारा प्रसाद लगाने से चीटियां यहां आने लगीं और धीरे-धीऱे मूर्तियां का कुछ हिस्सा खराब होने लगा। इस बात से क्षेत्र के श्रद्धालु आहत थे। इसके बाद तय किया गया है कि मंदिर में दूसरी पीतल की मूर्तियां स्थापित की जाएं। इसके लिये काफी समय से मंथन चल रहा था। सभी लोगों से चर्चा होने के बाद क्षेत्र में रहने वाले प्रमुख समाजसेवी जेएमडी ग्रूप के डायरेक्टर संजीव दीक्षित, उनके बड़े भाई दीप चंद्र दीक्षित, संघ परिवार से जुड़े शेखर शरण त्रिपाठी,मनोज पांडेय तथा नरेश माहेश्वरी आदि ने इस मंदिर के साथ ही सूटर गंज में स्थित ब्रह्मेश्वर मंदिर के जीर्णोद्धार तथा मूर्तियों की स्थापना की की बात पर सहमित जताई। इसके बाद जेएमडी के निदेशक संजीव दीक्षित ने इस काम की अगुवाई की और दीपचंद्र दीक्षित ने जयपुर जाकर मूर्तियों को बनवाने की जिम्मेदारी निभाई और इसके बाद क्षेत्र के प्रमुख दोनों मंदिरों में मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा कर इनकी स्थापना की तारीख तय की गई और 26 अप्रैल से चार दिवसीय आयोजन की शुरुआत कर दी गई। कार्यक्रम की शुरुआत में पंडित पुत्तन मिश्रा तथा मुनिया अग्निहोत्री ने बेदी पूजन किया।
भगवा झंडों से पाटा गया ग्वालटोली क्षेत्र
चार दिवसीय धार्मिक आयोजन के लिये ग्वालटोली-सूटर गंज क्षेत्र को भगवा झंडों से पाटा गया है। यहां दिन में भक्ति गीतों से लोगों को कार्यक्रम में जोड़ा जा रहा है और शाम होते ही धार्मिक कार्यक्रम शुरू हो जाते हैं। 26 अप्रैल रविवार की शाम को निकली कलश यात्रा में सौ से ज्यादा महिलाएं पीले कपड़ों में कलश लेकर निकलीं तो माहौल पूरी तरह धार्मिक हो गया और लोग भक्ति रस में डूबे नजर आये। 27 अप्रैल को गणपति पंचाग पूजन समस्त वेदी पूजन, मंदिर वास्तु पूजन, पर्णकुटी होम, जलाधिवास, धान्याधिवास, आरती तथा 28 अप्रैल को प्रातः 9 बजे आवाहित देवता पूजन, नित्य होम, घृताधिवास, पुष्पाधिवास, महास्नान, तत्वाधिवास, शैव्याधिवास, शांति पौष्टिक होम, आरती, विशाल शोभा यात्रा सार्यकाल 5:30 बजे। दिनांक 29 अप्रैल प्रातः 9 बजे से आवाहित देवता, पूजन नित्य, होम मूर्तिन्यास, पिण्डिका पूजन, मूर्ति प्रतिष्ठा, पूर्णाहुति दी जाएगी। 30 अप्रैल को विशाल भण्डारा, प्रसाद वितरण अपरान्ह 12 बजे से प्रभु इच्छा तक आयोजन किया गया है।
