MNREGA : विकसित भारत जी-राम-जी को लेकर आमने-सामने आए राहुल और शिवराज

निशंक न्यूज नेटवर्क

नई दिल्ली : मनरेगा की जगह विकसित भारत जी-राम-जी (विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन–ग्रामीण) विधेयक लाने को लेकर संसद में सरकार और विपक्ष के बीच तकरार का सिलसिला शुरू हो गया है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है तो कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने भी विपक्ष के व्यवहार को लोकतंत्र को बदनाम करने वाला बता दिया है। राहुल और शिवराज अब आमने सामने आ गए हैं। इतना ही नहीं संसद में विपक्षी सांसदों ने महात्मा गांधी की तस्वीरों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया है।

मनरेगा की जगह वीबी जी राम जी बिल

बीते दिनों कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ग्रामीणों को रोजगार की गांटरी देने वाली योजना महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना की जगह विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन–ग्रामीण (विकसित भारत जी-राम-जी) बिल पेश किया था। इसमें साल में 100 दिन की जगह 125 दिन के रोजगार की गारंटी के साथ ही काम की अलग अलग चार श्रेणियां भी तय किए जाने समेत अन्य कई संशोधन शामिल हैं। नए बिल को लेकर विपक्ष अब विरोध पर उतर आया है।

राहुल लंबा ट्वीट करके सरकार पर बरसे

लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने मनरेगा की जगह विकसित भारत जी-राम-जी विधेयक को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। आरोप लगाया कि सरकार ने 20 साल पुराने मनरेगा कानून को “एक दिन में ध्वस्त” कर दिया और बिना पर्याप्त जांच-पड़ताल के नए विधेयक को संसद से जबरदस्ती पारित करा लिया। नए कानून को “गांव विरोधी और राज्य विरोधी” बताते हुए कहा कि यह अधिकार आधारित और मांग आधारित रोजगार गारंटी की आत्मा को खत्म करता है। सोशल मीडिया पर साझा पोस्ट में उन्होंने लिखा कि मनरेगा जैसी योजना, जो मजदूरों के अधिकार पर आधारित थी, उसे दिल्ली से नियंत्रित की जाने वाली “राशन-टाइप स्कीम” में बदल दिया गया है। उनका आरोप है कि इससे राज्यों की भूमिका कमजोर होगी और पंचायतों की स्वायत्तता पर भी असर पड़ेगा। आरोप लगाया कि नया विधेयक इसी ताकत को तोड़ने की कोशिश है।

कोविड में जीवन रेखा बना मनरेगा

राहुल गांधी ने दावा किया कि कोविड में मनरेगा करोड़ों लोगों के लिए जीवन रेखा साबित हुआ था। देश की अर्थव्यवस्था ठप होने पर लोगों की आजीविका खत्म हो गई, तब मनरेगा ने बचाया। इस योजना से महिलाओं को सबसे ज्यादा लाभ हुआ और हर साल महिलाओं के काम के दिनों में बढ़ोतरी देखी गई।

नए बिल पर राहुल ने उठाए सवाल

नए विधेयक पर राहुल गांधी ने गंभीर सवाल उठाए है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की मांग के बावजूद बिल को स्टैंडिंग कमेटी में नहीं भेजा गया। ऐसा कानून जो ग्रामीण सामाजिक अनुबंध को बदलता है और करोड़ों मजदूरों को प्रभावित करता है, उसे विशेषज्ञ सलाह, विस्तृत समिति जांच और सार्वजनिक सुनवाई के बिना पारित नहीं किया जाना चाहिए था। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि संसद में बहस को सीमित कर सरकार ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर किया।
केंद्र सरकार पर सीधे निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के लक्ष्य स्पष्ट हैं ग्रामीण भारत, खासकर दलितों, ओबीसी और आदिवासियों की सामूहिक ताकत को कमजोर करना, सत्ता का केंद्रीकरण करना और फिर इसे “सुधार” के रूप में पेश करना। उन्होंने मनरेगा को दुनिया के सबसे सफल गरीबी उन्मूलन और सशक्तिकरण कार्यक्रमों में से एक बताया और कहा कि कांग्रेस ग्रामीण गरीबों की “आखिरी सुरक्षा पंक्ति” को खत्म नहीं होने देगी। कांग्रेस इस कानून के खिलाफ सड़क से संसद तक संघर्ष करेगी।

प्रियंका ने भी उठाए सवाल

प्रियंका गांधी ने कहा कि विपक्ष इस बिल का ज़ोरदार विरोध करता रहेगा। उन्होंने पत्रकारों से कहा, “जो भी इसे पढ़ेगा, वह समझ जाएगा कि ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना कैसे खत्म होने वाली है। यह फंडिंग का बोझ राज्यों पर डालता है… लेकिन राज्यों के पास पैसे नहीं हैं। MGNREGA सबसे गरीब लोगों को सहारा देता है। यह बिल गरीब विरोधी है!”

शिवराज ने कहा, विपक्ष ने बदनाम किया लोकतंत्र

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा है कि “बापू ने राम राज्य की स्थापना की बात कही थी। मुझे समझ नहीं आ रहा कि विपक्ष ‘विकसित भारत – ग्राम राम जी’ नाम पर क्यों भड़क रहा है।” उन्होंने कहा कि संसद में विपक्ष के व्यवहार ने “लोकतंत्र को बदनाम किया है”। लोकसभा में G RAM G बिल पास होने के बाद हुए हंगामे का ज़िक्र करते हुए, जो महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम, या मनरेगा की जगह लेगा, उन्होंने कहा, “मैं दुखी हूँ। मेरा दिल भारी है। विपक्ष ने लोकतंत्र को भीड़तंत्र में बदल दिया है।”

मुझे सभी सवालों के देने थे जवाब : कृषि मंत्री

कृषि मंत्री ने कहा कि “संसद ईंट और सीमेंट की इमारत नहीं है… बल्कि लोकतंत्र का मंदिर है। सार्थक चर्चा होनी चाहिए। मैंने कल और आज बहस के दौरान हमारे विपक्षी दोस्तों ने जो कहा, उसे ध्यान से सुना, और मुझे सभी सवालों के जवाब देने थे,”। “लेकिन जिस तरह का अशोभनीय व्यवहार दिखाया गया… वह बापू के आदर्शों के साथ विश्वासघात है।” “मैं विपक्ष की कार्रवाई की कड़ी निंदा करता हूं। आज संसदीय परंपराओं को तोड़ा गया। लोकतंत्र को भीड़तंत्र में बदल दिया गया है।” “कांग्रेस के होठों पर ‘राम’ है लेकिन दिल में खंजर है…”।

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