निशंक न्यूज नेटवर्क
यूपीए की सरकार में वर्ष 2005 ग्रामीण परिवारों को वर्ष में 100 दिन रोजगार की गारंटी देने वाली नरेगा (NREGA)और मौजदूा समय में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम मनरेगा (MGNREGA)जल्द ही बंद हो सकती है। हालांकि इस योजाना का लाभ पाने वाले घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि मौजूदा भाजपा गठबंधन वाली एनडीए की सरकार ग्रामीण रोजगार से जुड़ी नई योजना लेकर आ रही है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस योजना से जुड़ा नया बिल भी लोकसभा में पेश कर दिया है।
खास है VB–G RAM G
अभी बिल को मंजूरी के लिए दोनों सदनों में रखा जाना है। यदि बिल पारित होता है तो मनरेगा का सदा के लिए बंद होना तय है। लेकिन, आने वाला नया कानून नया कानून ‘विकसित भारत – रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025’ (VB–G RAM G)में कई खास प्रावधान शामिल करके और बेहतर किया गया है। नया कानून अब मनरेगा की जगह ले लेगा।
100 नहीं 125 दिन का मिलेगा रोजगार
जानकारी के अनुसार इस कानून में 100 नहीं 125 दिन के रोजगार की गारंटी होगी। इसमें ग्रामीण परिवारों को हर वित्त वर्ष में 125 दिन के रोजगार की गारंटी का प्रावधान है, जबिक मनरेगा में 100 दिन है। सरकार का मानना है कि यह कानून ग्रामीण रोजगार को केवल मजदूरी तक सीमित न रखकर उसे ग्रामीण बुनियादी ढांचे, आजीविका सृजन और जलवायु अनुकूलन से जोड़ गया है।
काम के लिए चार प्रमुख श्रेणियां
जल सुरक्षा से जुड़े कार्य : जल संरक्षण, सिंचाई, भूजल रिचार्ज, जल स्रोतों का पुनर्जीवन, वॉटरशेड का विकास और वृक्षारोपण जैसे कार्य।
ग्रामीण बुनियादी ढांचा : ग्रामीण सड़कों, पुलों, पंचायत भवनों, आंगनवाड़ी केंद्रों, स्कूल भवनों, पेयजल, स्वच्छता, सौर ऊर्जा और अन्य सामुदायिक सुविधाओं का निर्माण और मरम्मत जैसे कार्य।
आजीविका से जुड़े ढांचागत कार्य : कृषि भंडारण, ग्रामीण हाट, कौशल विकास केंद्र, पशुपालन और मत्स्य पालन से जुड़ा ढांचा, स्वयं सहायता समूहों के लिए भवन और वैल्यू चेन से जुड़े काम।
मौसम और आपदा प्रबंधन : बाढ़, सूखा, चक्रवात, भूस्खलन और अन्य आपदाओं से निपटने के लिए ढांचे, शरण स्थल, मरम्मत और पुनर्वास कार्य।
नए काननू से राज्यों पर बढ़ सकता वित्तीय बोझ
नया कानून आने पर राज्यों पर वित्तीय बोझ बढ़े सकता है। साथ ही केंद्र के पास अधिकार सुरक्षित होंगे कि योजना को कहां और कैसे लागू किया जाएगा। इसके बिंदु 4(5) में प्रावधान किया गया है, “केंद्र सरकार हर वित्त वर्ष में राज्यों के लिए अलग-अलग आवंटन तय करेगी, जो केंद्र सरकार द्वारा तय मानक पर आधारित होगा।” मनरेगा योजना मांग आधारित थी, जिसमें जरूरत के हिसाब से बजट बढ़ाया जा सकता था। नए प्रस्तावित कानून के तहत राज्यों के लिए आवंटन केंद्र सरकार के फिक्स्ड बजट के अंदर ही सीमित रहेंगे। रोजगार सिर्फ केंद्र द्वारा तय ग्रामीण इलाकों में ही दिया जाएगा। केंद्र हर राज्य के लिए बजट और खर्च दोनो तय करेगा। केंद्र सरकार को किसी राज्य में ग्रामीण इलाकों को नोटिफाई करने का अधिकार देता है, जहां योजना लागू की जाएगी। जबकि मनरेगा में यह सर्वव्यापी है।
फिलहाल मनरेगा वाली ही मजदूरी दर
नए अधिनियम में हर ग्रामीण परिवार, जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने को इच्छुक हों, को साल में कम से कम 125 दिन का काम दिया जाएगा। काम करने वाले श्रमिकों को मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक या अधिकतम एक पखवाड़े के भीतर करना अनिवार्य होगा। मजदूरी की दर को लेकर केंद्र सरकार की तरफ से नई मजदूरी दर अधिसूचित किए जाने तक मनरेगा के तहत लागू न्यूनतम मजदूरी दर ही लागू रहेगी, यानी मजदूरी में किसी भी तरह की कमी नहीं की जा सकती।
पूरी व्यवस्था की आधारशिला होगी ग्राम पंचायत
इसकी विशेषता यह है कि सभी कार्य ‘विकसित ग्राम पंचायत योजना’ से ही निकलेंगे। ग्राम पंचायत स्तर पर भागीदारी आधारित प्रक्रिया के जरिए तैयार किया जाएगा और फिर इन्हें ब्लॉक, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर इंटीग्रेट किया जाएगा। सभी योजनाओं को मिलाकर एक ‘विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक’ तैयार किया जाएगा, जिसमें देशभर में होने वाले ग्रामीण कार्यों का एक साझा और समन्वित खाका होगा। सरकार का दावा है कि इससे सरकारी निवेश भी ज्यादा प्रभावी होगा।
