नेपाल में जल प्रलय : डेढ़ सौ की मौत,सैंकड़ों लापता

निशंक न्यूज डेस्क

कानपुर। नेपाल में बुधवार को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने हिमालयी क्षेत्र में भारी तबाही मचा दी। नेपाल-चीन सीमा से लगे रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में अचानक आए सैलाब ने देखते ही देखते सड़कें, पुल, मकान और बिजली परियोजनाएं बहा दीं। कई गांवों का संपर्क टूट गया और बड़ी संख्या में लोग लापता हो गए। मृतकों और लापता लोगों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। अलग-अलग सरकारी और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में आंकड़े अलग हैं, लेकिन करीब डेढ़ सौ लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों लोगों के लापता होने की सूचना सामने आई है।

सबसे ज्यादा तबाही रसुवा, नुवाकोट और धादिंग जिलों में हुई है। बाढ़ का पानी और मलबा इतनी तेजी से नीचे आया कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। कई स्थानों पर वाहन, पुल और सड़कें बह गईं। रसुवागढ़ी सीमा चौकी और चीन के तिब्बत क्षेत्र से संपर्क भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। नेपाल और तिब्बत दोनों तरफ बड़ी संख्या में लोग फंसे हैं। चीन के जिरोंग क्षेत्र में भी मौतों और लापता लोगों की सूचना है।

ऐसे टूटा पहाड़ और आई जल-प्रलय

वैज्ञानिक आकलन के अनुसार यह सामान्य बारिश से आई बाढ़ नहीं थी। हिमालय के ऊंचे क्षेत्र में ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा टूटने और बर्फ-पत्थर के मलबे के नीचे गिरने से अचानक पानी और मलबे का जबरदस्त प्रवाह पैदा हुआ। इसने भोटेकोशी और उससे जुड़ी नदी प्रणाली को देखते ही देखते उफान पर ला दिया। विशेषज्ञों ने हाल के भूकंपीय झटकों और बढ़ते तापमान से ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने को संभावित कारणों में शामिल किया है। जांच अभी जारी है।

भारतीय भी फंसे, परिवारों में चिंता

नेपाल की इस त्रासदी ने भारत में भी चिंता बढ़ा दी है। लापता लोगों में भारतीय नागरिकों की बड़ी संख्या बताई जा रही है। शुरुआती सूचनाओं में 105 भारतीयों के लापता होने की बात सामने आई थी। इनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए यात्रियों के अलावा नेपाल के रास्ते यात्रा कर रहे अन्य भारतीय भी शामिल बताए गए हैं। काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास नेपाल सरकार और स्थानीय प्रशासन के संपर्क में है तथा भारतीय नागरिकों की जानकारी जुटाने और उनके बचाव के प्रयास किए जा रहे हैं।

दिल्ली समेत देश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले नेपाली परिवार भी अपने परिजनों से संपर्क नहीं होने के कारण बेहद परेशान हैं। संचार व्यवस्था प्रभावित होने से कई परिवारों को अपने लोगों की सही स्थिति की जानकारी नहीं मिल पा रही है। दिल्ली में रह रहे नेपाली नागरिकों के बीच भी चिंता का माहौल है और लोग लगातार नेपाल में अपने घर-परिवार से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं।

बिहार और यूपी पर भी बाढ़ का खतरा

नेपाल में जल प्रलय के बाद शहर की सड़कों पर भरा पानी

नेपाल में हुई इस जल प्रलय का असर भारत के सीमावर्ती राज्यों पर भी पड़ने की आशंका है। बिहार और उत्तर प्रदेश में नदियों के जलस्तर पर निगरानी बढ़ा दी गई है। नेपाल से निकलने वाली नदियों के तेज बहाव का असर नीचे के भारतीय क्षेत्रों में पड़ सकता है। केंद्र और राज्य सरकारों ने संवेदनशील इलाकों में प्रशासन तथा आपदा प्रबंधन तंत्र को सतर्क रहने को कहा है। भारत सरकार ने नेपाल की स्थिति पर करीबी नजर रखने और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की बात कही है।

सीमावर्ती क्षेत्रों में लोगों को नदी और नालों के किनारे जाने से बचने की सलाह दी गई है। नेपाल में भारी तबाही के बाद यदि नदियों का प्रवाह और बढ़ता है तो बिहार के सीमावर्ती जिलों के साथ उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र में भी पानी का दबाव बढ़ सकता है।

कई पुल और सड़कें बहीं, बिजली परियोजनाएं प्रभावित

बाढ़ ने नेपाल के आधारभूत ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। कई मोटरेबल पुल बह गए हैं और सड़कें मलबे से पट गई हैं। इससे राहत एवं बचाव दलों के लिए प्रभावित गांवों तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है। रसुवा क्षेत्र में कई जलविद्युत परियोजनाएं भी प्रभावित हुई हैं। सीमा क्षेत्र की महत्वपूर्ण सड़क और व्यापारिक कनेक्टिविटी पर भी इसका असर पड़ा है।

हेलीकॉप्टरों से रेस्क्यू, मलबे में जिंदगी की तलाश

नेपाल सेना, पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के जवान राहत एवं बचाव अभियान में जुटे हैं। हेलीकॉप्टरों की मदद से फंसे लोगों को निकालने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन कई जगह भारी मलबा, टूटी सड़कें और खराब मौसम बचाव अभियान में बाधा बन रहे हैं। अधिकारियों को आशंका है कि मलबे और नदी के किनारे अभी भी बड़ी संख्या में लोग फंसे हो सकते हैं।

भारत ने मदद का भरोसा दिया

नेपाल की आपदा के बाद भारत ने मानवीय सहायता और राहत-बचाव में सहयोग का भरोसा दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री से संपर्क कर हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया है। भारत की एजेंसियां नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों की जानकारी जुटाने और उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए नेपाली अधिकारियों के संपर्क में हैं।


दिल्ली में नेपाली परिवारों की बढ़ी बेचैनी

नेपाल में संचार व्यवस्था प्रभावित होने के कारण दिल्ली समेत भारत के कई शहरों में रहने वाले नेपाली परिवार अपने परिजनों की जानकारी के लिए परेशान हैं। कई लोगों का नेपाल में अपने घरवालों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। मोबाइल और इंटरनेट संपर्क बाधित होने से स्थिति और कठिन हो गई है। परिवारों को राहत एवं बचाव एजेंसियों से जानकारी मिलने का इंतजार है।

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