वेद गुप्ता
श्रीगणेश चतुर्थी महापर्व
भगवान श्रीगणेश की पूजा प्रत्येक कार्य में सर्वप्रथम होती है। भगवान गणेशजी शुभ लाभ देने वाले हैं। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को गणेश चतुर्थी के रूप में सम्पूर्ण विश्व में हर्ष, आनंद व उल्लास से मनाया जाता है। भगवान गणेश के प्रत्येक अंग हमें जीवन जीने की अद्भुत कला प्रदान करते हैं। भगवान गणेशजी हर रुप में मानव को प्रेरणा व शिक्षा देते हैं। भगवान के विशाल कान अच्छे से सुनो और समझ कर कार्य करो, इसकी शिक्षा देते हैं। व्यक्ति को कान का कच्चा कभी नहीं होना चाहिए।
बड़े कान देते अच्छे से सुनने व समझकर कार्य करने की सीख
बहुत से विवाद ठीक प्रकार से नहीं सुनने से हो जाते हैं। भगवान के विशालकाय कान इस बात की ओर इंगित करते हैं कि आप सुनने और समझने में स्पष्टता रखो, जिससे कि जीवन सुचारु चल सके और सभी में प्रेम और सौहार्द बना रहे।

भगवान की सूक्ष्म आंखें पैनी दृष्टि रखने की ओर इशारा करती हैं। मनुष्य को सूक्ष्म और पैनी दृष्टि से युक्त होना चाहिए। सूक्ष्म शक्ति मनुष्य को महान बनाती है। भगवान के नेत्र हमें अपने में सूक्ष्म शक्ति का विकास करने की प्रेरणा देते हैं।
विशाल मस्तक देता बड़ी सोंच रखने का संदेश
भगवान का विशाल मस्तक विजय पताका का प्रेरक है। विशाल मस्तक गहरी सोच में दृढ़ता का प्रतीक है। प्रत्येक मनुष्य को विशाल सोच रखनी चाहिए। इसी की शिक्षा हमें भगवान गणेश के विशाल मस्तक भाल से मिलती है।
भगवान गणेशजी प्रथम पूज्य है किंतु उनका वाहन मूषक है। रिद्धि सिद्धि, शुभ लाभ प्रदाता भगवान गणेश का तो वाहन कोई विशाल भी हो सकता था, परंतु मूषक वाहन भगवान गणेश का शीघ्रता के साथ सभी कार्य करने की प्रेरणा देता है। मूषक कूद फांद कर अपना कार्य करता है ऐसे ही भगवान गणेश शीघ्रता से सभी के मनोभाव जानकर अभीष्ट कार्य करने वाले हैं। भगवान गणेश अपने हाथ में लड्डू लिए हुए होते हैं ऐसे भगवान की छवि समृद्धि दायक व प्रेरणा देती है। भगवान गणेश एकदंत है अर्थात एक दांत वाले हैं। उन्हें मोदक अधिक प्रिय हैं। मोदक मिठास भरने वाले होते हैं तथा खाने में भी स्वादिष्ट और स्निग्ध होते हैं।
बैठने की मुद्रा देती योगमय रहने की प्रेरणा
भगवान गणेशजी की बैठने की मुद्रा भी हमें अनुशासन व आरोग्य की प्रेरणा देती है। गणेशजी की छवि ज्यादातर बैठी हुई है, भगवान की बैठी हुई प्रतिमा हमें जीवन में सहज सुगमता से कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करती है। भगवान गणपति की प्रतिमा हमें योगमय रहने की भी प्रेरणा देती है ।
भगवान गणेशजी लेखक के रूप में सशक्त प्रेरणा देते हैं। वेद व्यास जी ने वाचन किया और भगवान श्री गणेश ने सुंदरता व शीघ्रता से लेखन कार्य किया। मनुष्य को अच्छा सुनकर अच्छा लिखना चाहिए यह प्रेरणा भगवान गणेश से बढ़िया भला कौन दे सकता है? भगवान श्री गणेश भारत में ही नहीं वरन संपूर्ण विश्व में पूजनीय हैं। भगवान श्री गणपतिजी का जन्मोत्सव भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि, 27 अगस्त, बुधवार ( आज ) हर्षोल्लास से मनाया जा रहा है।