स्वतंत्रता दिवस के स्वागत में रोशनी से जगमगाया कानपुर

विकास वाजपेयी

कानपुर। स्वतंत्रता दिवस के स्वागत के लिये गुरुवार की रात कानपुर रोशनी से जगमग हो गया। सरकारी कार्यालय हो या अधिकारियों के आवास या फिर शहर के घंटाघर चौराहे सहित हर प्रमुख स्थान पर की गई रोशनी इस बात का संदेश दे रही थी कि आजादी के इस पर्व को लेकर कानपुर के लोगों में कैसा गजब का उत्साह है। शाम को घंटाघर चौराहे पर देर रात शुरू हुई देश भक्ति के गीतों की श्रंखला ने यहां से निकलने वालों का दिल जीत लिया और तमाम लोग देश भक्ति के गीतों पर थिरकने लगे। रात बारह बजे कई स्थानों ध्वजारोहण करने की तैयारी की गई थी।

तिरंगे रंग में सजा जिलाधिकारी का आवास

स्वतंत्रता दिवस पर मंडलायुक्त आवास पर की गई रोशनी

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर जिलाधिकारी का आवास तिरंगे रंग की रोशन से जगमगा रहा था तो मंडला युक्त का आवास व कार्यालय भी कुछ इस तरह ही रोशनी से जगमग हो रहा था। पुलिस आयुक्त के आवास में की गई रोशनी देखते ही बन रही थी।

उर्सला अस्पताल की गई रोशनी।

आकर्षित कर रही थी उर्सला अस्पताल में की गई रोशनी

इस मौके पर शहर की ऐतिहासिक लाल इमली को रोशनी को जगमग किया गया था तो उर्सला अस्पताल में की गई रोशन लोगों को अपनी तरफ आकर्षित कर रही थी।

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर जान गंवाने वालों को दी श्रद्धांजलि

इससे पहले गुरुवार को 14 अगस्त पर किये जाने वाले विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर 1947 के ऐतिहासिक विभाजन में अपनी जान गंवाने वाले लाखों अनाम व्यक्तियों के सम्मान में आज छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय स्थित वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई प्रेक्षागृह में स्मृति कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में इस ऐतिहासिक त्रासदी में अपना जीवन गंवाने वाले लाखों लोगों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

विभाजन में गंवानी पड़ी थी दस लाख लोगों को जान

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह।

इस अवसर पर जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि भारतीय सभ्यता अत्यंत पुरानी है। मौर्य काल, गुप्त काल एवं ब्रिटिश शासन के दौरान देश अखंड स्वरूप में था। विभाजन की त्रासदी में हमने अपने देश के एक बड़े हिस्से को खोया है। 1947 में भारतीय उपमहाद्वीप में लोगों का बड़े पैमाने पर विस्थापन हुआ था। लगभग 10 लाख लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। साठ लाख से अधिक लोग पश्चिमी पंजाब, सिंध से आये थे। बड़ी संख्या में लोग बेघर हो गए और उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। इन लोगों ने असंख्य मुसीबतों को झेला और संघर्ष किया। आज स्वतंत्र भारत की मौजूदा प्रगति में इनका अतुलनीय योगदान है।

त्रासदी से जुड़ी पुस्तकों का प्रदर्शन

सीडीओ दीक्षा जैन ने कहा कि विभाजन की त्रासदी झेलने वाले लोगों के दुखों को शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता है। उनके सम्मान में विभाजन से जुड़े राष्ट्रीय अभिलेखागार के अभिलेखों एवं ऐतिहासिक त्रासदी से जुड़ी पुस्तकों का प्रदर्शन किया गया है। विभाजन में अंग्रेजों की भूमिका, मुस्लिम लीग की भूमिका, विभाजन के दौरान अनिश्चित भविष्य की यात्रा करते लोग, तत्कालीन प्रेस का नजरिया, महिलाओं के साथ हुई हिंसा की भयावहता को उकेरते चित्र शामिल हैं। बड़ी संख्या में लोगों ने इस प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

पुरखों से जुड़ी यादों को साझा किया

उत्तर प्रदेश सिंधी समाज के महामंत्री महेश मेघानी ने कहा कि सिंधी समाज ने 1947 की त्रासदी को झेला है। हम लोग तिरंगे पर विश्वास करते हैं और धरती को नमन करते हैं। सरदार गुरविंदर सिंह छाबड़ा व सरदार गुरुदेव सिंह ने भी अपने पुरखों से जुड़ी यादों को साझा किया। कार्यक्रम के दौरान विभाजन की त्रासदी से जुड़ी लघु फिल्म भी दिखाई गई।

इस अवसर पर महेश मेघानी, लाल चंद्र, हेमंत कुमार गोपालानी, गुरविंदर सिंह छाबड़ा, डॉ मनप्रीत सिंह भट्टी, भजनवीर सिंह पाहुजा, नवजोत सिंह, रविंदर सिंह, त्रिलोचन पाल सिंह, हरमिंदर सिंह पुन्नी, दिलीप पलानी, मुरलीधर आहूजा, रमेश राजपाल, ललित कुमार, लक्ष्मण दास को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष के प्रतिनिधि सुरेंद्र अवस्थी ने भी श्रद्धाजंलि अर्पित की।

राष्ट्रगान से हुआ समापन

कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान से किया गया। कार्यक्रम का संचालन राजेश यादव ने किया। इस दौरान एडीएम सिटी डॉ राजेश कुमार,डीडीओ आलोक कुमार सिंह, डीआईओएस संतोष राय, बीएसए सुरजीत कुमार सिंह, डीपीआरओ मनोज कुमार सहित विभिन्न अधिकारी एवं प्रबुद्ध जन उपस्थित थे।

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