आलोक ठाकुर
कानपुर। गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ने से कानपुर की कटरी में बाढ़ का संकट गहरा गया है। गंगा का पानी खतरे के निशान को पार कर कटरी क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांवों में घुस गया है। घरों और रास्तों में पानी भरने के बाद ग्रामीणों के सामने सुरक्षित स्थान पर पहुंचने का संकट खड़ा हो गया। कई परिवार नाव के सहारे घर छोड़कर राहत शिविरों की ओर पहुंचने लगे हैं। गांवों में पानी भरने की सूचना के बाद गुरुवार को जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह समेत संबंधित विभागों के अधिकारी कटरी क्षेत्र में पहुंच गए। अधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित गांवों का जायजा लेने के साथ ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और राहत एवं बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए।
गंगा का पानी बढ़ने के साथ कटरी के निचले इलाकों में स्थिति तेजी से बिगड़ी है। पानी गांवों की गलियों और संपर्क मार्गों तक पहुंच गया है। कई स्थानों पर लोगों को आवागमन के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। घरों में पानी घुसने की आशंका को देखते हुए ग्रामीण परिवार और जरूरी सामान लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे हैं। प्रशासन ने प्रभावित लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाने की व्यवस्था शुरू कर दी है।
कटरी में पहुंची प्रशासन की टीम
गुरुवार को जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने अधिकारियों की टीम के साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने ग्रामीणों से सीधे बातचीत कर पानी की स्थिति, आवागमन, भोजन, पेयजल और अन्य समस्याओं की जानकारी ली। ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने गांवों में बढ़ते पानी और सुरक्षित निकासी की समस्या रखी। डीएम ने संबंधित अधिकारियों को प्रभावित लोगों तक तत्काल राहत पहुंचाने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए।
नावों से सुरक्षित निकाले जा रहे लोग
गांवों में पानी बढ़ने के बाद प्रशासन की ओर से नावों का इंतजाम किया गया है। जरूरत के अनुसार ग्रामीणों को नाव के जरिए सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों तक पहुंचाया जा रहा है। प्रशासन की प्राथमिकता बाढ़ में फंसे परिवारों को सुरक्षित निकालना और प्रभावित क्षेत्रों में भोजन, पेयजल व दूसरी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
जिलाधिकारी ने मौके पर जाकर जानी समस्याएं
कटरी के गांवों में गंगा का पानी पुहंचने की सूचना के बाद गुरुवार को जिलाधिकारी श्री जितेंद्र प्रताप सिंह ने बनियापुरवा गांव के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण कर जलस्तर एवं राहत व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने मौके पर तैनात अधिकारियों को स्थिति पर लगातार नजर रखने और आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित परिवारों को तत्काल सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने बताया कि भगवानदीन का पुरवा में करीब 35 परिवार बाढ़ से प्रभावित हैं। बनियापुरवा एवं भोपालपुरवा के आसपास के क्षेत्रों में भी जलस्तर बढ़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि पीछे से आने वाले पानी के डिस्चार्ज और उसके ट्रेंड में कमी आई है, जिसका असर शुक्रवार शाम तक दिखाई पड़ने की संभावना है। इससे जलस्तर में कमी आ सकती है। हालांकि मौजूदा स्थिति को देखते हुए प्रशासन को पूरी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। तहसील के अधिकारी एवं कर्मचारी मौके पर तैनात हैं और आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। उन्होंने तहसीलदार सदर को निर्देश दिए कि जलस्तर एवं बाढ़ की स्थिति की निरंतर निगरानी की जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित लोगों को सुरक्षित रूप से बाढ़ चौकी में शिफ्ट कराया जाए।
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट कर रहे लगातार निगरानी
इधर गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने के दृष्टिगत ज्वाइंट मजिस्ट्रेट,उपजिलाधिकारी सदर अनुभव सिंह लगातार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों पर नजर रखे हैं। तिवारी घाट, पुराना कानपुर की गलियों में पानी भरने से जनजीवन प्रभावित होने की सूचना पर गुरुवार को ज्वाइंट मजिस्ट्रेट अनुभव सिंह ने मौके पर पहुंचकर स्थिति देखी। यहां प्रभावित सात परिवारों के कुल 35 लोगों को कंपोजिट विद्यालय कन्या, पुराना कानपुर में संचालित बाढ़ राहत शिविर में सुरक्षित रूप से शिफ्ट कराया गया। शिविर में प्रभावित परिवारों के ठहरने और भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
स्थापित की गई बाढ़ राहत चौकी

इसी क्रम में भोपालपुरवा, भगवानदीनपुरवा और बनियापुरवा की आबादी में गंगा का पानी पहुंचने की सूचना पर स्थलीय निरीक्षण कराया गया। मौके पर पाया गया कि घरों में पानी नहीं पहुंचा है, लेकिन संपर्क मार्गों पर पानी भरने से आवागमन प्रभावित हुआ है। लोगों की आवाजाही सुगम बनाने के लिए प्रशासन ने चार नाव और दो ट्रैक्टर निःशुल्क लगाए हैं। बढ़ते जलस्तर को देखते हुए बनियापुरवा चौराहे पर बाढ़ राहत चौकी स्थापित कर दी गई है। भोपालपुरवा-बनियापुरवा बैराज मार्ग पर राहत शिविर संचालित किया जा रहा है। आमजन के साथ मवेशियों के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए मेडिकल कैंप भी सक्रिय कर दिए गए हैं।
