निशंक न्यूज।
कानपुर। मुकदमें दर्ज कराकर लोगों से वसूली करने के आरोप में कानपुर के एक और अधिवक्ता को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा है। रविवार को गिरफ्तार अधिवक्ता श्याम नगर के रामपुरम के रहने वाले अवध बिहारी यादव कुछ वर्ष पहले शासकीय अधिवक्ता थे, उनपर आरोप है कि वह सहकारी आवास समिति के सचिव थे और सोसाइटी क्षेत्र की आसपास की जमीनों पर मकान बनाने के बदले खरीदारों से जबरन वसूली करते थे। जो भी उन्हें पैसा देने से मना करता था वह उसके खिलाफ अदालत से फर्जी मुकदमा दर्ज कराने के बाद जमीन को विवादित बनाकर निर्माण रुकवा देते थे।
ज्ञान सहकारी आवास समिति का काम देखते थे पूर्व डीजीसी
पुलिस सूत्रों की मानी जाए तो करीब पचास साल पहले रामसिंह कोरी ने अपनी मां ज्ञानकली की याद में ज्ञान सहकारी आवास समिति बनाकर करीब दस बीघा जमीन में प्लाटिंग करना शुरू किया। बताया गया है कि उस समय जमीनों की खरीद-फरोख्त लीज-डीड के आधार पर होती थी। इस जमीन में निकाले गये प्लाट बिकने के बाद रामसिंह ने करीब 20 साल पहले आवास समिति को अवधबिहारी यादव के जिम्मे सौंप दिया। इसका लाभ उठाकर प्लाट को लीज-डीड से फ्री-होल्ड कराने के बदले पैसे की मांग करने लगे। इसके साथ ही आसपास की जमीनों पर सोसाइटी का स्वामित्व बताकर प्रत्येक निर्माण पर आपत्ति करने लगे। अधिवक्ता होने के कारण वह प्लाट मालिकों पर दबाव बनाते और निर्माण कराने पर अवधबिहारी को कुछ न कुछ देकर उन्हें खुश करकना पड़ता था।
लालसिंह तोमर की सोसाइटी से टकराए यादव
पुलिस को बताया गया कि ज्ञान सहकारी आवास समिति की ज्यादातर जमीन मौजा देहली सुजानपुर में बाईपास के कोयलानगर इलाके में आती थीं, लेकिन अवधबिहारी ने रामपुरम गेट के सामने सेना की जमीन से सटी भूमि (आराजी संख्या-916) में हिस्सा बताकर पूर्व एमएलसी लालसिंह तोमर की सोसाइटी –आनंदनगर हाउसिंग सोसाइटी से भूखंड खरीदने वालों से विवाद करना शुरू कर दिया। आनंदनगर सोसाइटी ने इक्का-दुक्का प्लाट ही बेचे थे, लेकिन अवधबिहारी यादव के विरोध के कारण भूखंड मालिकों को चाहरदीवारी भी नहीं बना पाए थे।
एक लाख वसूले, पांच लाख की और की अतिरिक्त डिमांड
ऑपरेशन महाकाल शुरू होने पर अधिवक्ता अवधबिहारी यादव के खिलाफ कई शिकायतें आईं। गोपाल नगर में रहने वाले देवेंद्र सिंह ने तमाम साक्ष्यों के साथ एसआईटी को बताया कि, उन्होंने आनंदनगर हाउसिंग सोसाइटी से प्लाट खरीदा, लेकिन एक लाख रुपए वसूलने के बावजूद अवधबिहारी यादव तथा उसका बेटा विशाल यादव और सहयोगी संजय कुमार पांच लाख रुपए और रुपये देने का दबाव बना रहे हैं। देवेंद्र ने एसआईटी को यह भी बताया कि अवधबिहारी ने खुद को पूर्व डीजीसी बताते हुए धमकाया था कि, डिमांड पूरी नहीं हुई तो भूखंड को विवादित बनाने के साथ फर्जी मुकदमों में फंसाकर जेल भिजवा देगा।
फर्जी मुकदमों का मास्टरमाइंड शासकीय अधिवक्ता
अवधबिहारी यादव के ऊपर फर्जीवाड़े, कूटरचित दस्तावेज बनाने, साजिश करने, वसूली, की धाराओं में पांच मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस पड़ताल में सामने आया है कि, प्लाट मालिकों से वसूली करने के लिए अवधबिहारी यादव शासकीय अधिवक्ता होने का भय दिखाकर धमकाता था। इसके साथ ही कूटरचित दस्तावेज बनाकर भूखंड को विवादित करता था। इसके बाद कोर्ट के जरिए फर्जी मुकदमा दर्ज कराता था। किसी कारणवश अदालत के जरिए एफआईआर दर्ज नहीं होती थी तो विभिन्न अदालतों में शिकायती वाद दाखिल करके परेशान करता था। कुल मिलाकर जमीन को विवादित करने के बाद उगाही करना और औने-पौने दाम में जमीन को खरीदने के बाद महंगे दाम में बेचना ही अवधबिहारी यादव का कारोबार था।