निशंक न्यूज।
कानपुर। कुछ साल पहले तक कंपटीशन की तैयारी करने वाले छात्र-छात्राओं की पसंद रहने वाले नेगी क्लासेस के संचालक गजेंद्र सिंह नेगी में छात्र-छात्राओं को पढ़ाते पढ़ाते और पैसा कमाने की ऐसी भूख बढ़ी कि वह जमीन के काम में उतर आया और पढ़ाई से बच्चों को भविष्य बनाने के लिये बेहतर पढ़ाई करने वाला नेगी बाद में लोगों को बेहतर फ्लैट दुकान तथा आफिस का सपना दिखाकर लोगों से टप्पेबाजी करने लगा। उसने एक ही फ्लैट का कई लोगों से सौदा किया और एडवांस लेकर बैठ गया कब्जा किसी को नहीं दिया। पुलिस आयुक्त द्वारा शहर में शुरू कराए गए आपरेशन महाकाल में उसका भेद खुला एक नहीं एक दर्जन से ज्यादा लोगों ने उसके खिलाफ शिकायत की जांच के बाद पुलिस ने नेगी से प्रताड़ित योगेश कुमार की तहरीर पर गजेंद्र सिंह नेगी व उसके भाईयों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
नेगी सर के नाम से काकादेव कोचिंग मंडी में मशहूर था गजेंद्र सिंह
बताया गया है कि करीब बीस साल पहले जमीन के काम में सक्रिय हुए गजेंद्र सिंह नेगी ने जैसे ही केशवपुरम आवास विकास क्षेत्र में तेजी से बस्ती बढ़ी इस इलाके में जमीन खरीदनी शुरू कर दी और यहां होटल- गेस्ट हाउस तथा फ्लैट आदि खरीदने शूरू कर दिये। जमीन का काम शुरू करने वाला गजेंद्र सिंह नेगी शुरुआती दौर में दो भाइयों के साथ मिलकर कोचिंग-हास्टल के जरिए कमाई करता था। किसी वक्त गजेंद्र का काकादेव में नेगी सर के नाम से कोचिंग संस्थान था और छात्र नेगी सर की क्लास में दाखिला लेने के लिये प्रयासरत रहते थे। अपनी पहचान के चलते नेगी ने शहर के कई बड़े लोगों से उधार रकम लेकर जमीन में के काम में अपना प्रभाव बढ़ाया। वह तय समय पर लोगों को पैसा भी देता था जिससे उसके साथ पैसा लगाने वालों की संख्या बढ़ती गई। पुलिस को शिकायत मिली है कि इसके बाद उसने कई लोगों का पैसा वापस नहीं किया और अपना काम बढ़ा लिया।
फ्लैट-आफिस का लालच देकर कई लोगों को ठगा

पुलिस सूत्रों की मानी जाए तो पुलिस से की गई शिकायतों में कहा गया है कि गजेंद्र नेगी ने सबसे पहले आवास-विकास के भूखंड पर अपार्टमेंट बनाकर बुकिंग के नाम पर लोगों से रुपये लिये। पैसा जुटाने के लिये उसने एक-एक फ्लैट का कई- कई लोगों से इकरारनामा किया गया। बाद में नेगी ने अपार्टमेंट के कमरों को तोड़कर गेस्ट हाउस बना दिया। बुकिंग करने वालों ने रकम वापस मांगी तो अपने संपर्कों के सहारे पैसे मांगने वालों को धमकाने लगा। कुछ लोगों की शिकायत पर उस समय नेगी को जेल जाना पड़ा था। जेल से लौटने के बाद नेगी ने पैसा मांगने वालों को धमकाना शुरू किया। कहा जा रहा है कि इसके बाद नेगी ने केडीएमए स्कूल से कुछ आगे व्यवसायिक कांप्लेक्स बनाने के नाम पर लोगों से पैसा लिया और पैसा लेने के बाद परिसर को होटल के रूप में बदल दिया। उसने दुकान का सौदा करने के बाद पीछे की ओर शटर के अंदर दीवार बनाकर हॉल किराये पर उठा दिया। जानकारी पर कुछ दुकान मालिक पहुंचे तो शटर के पीछे दो-तीन फीट जमीन मिली।
दस लाख रंगदारी और 50 हजार महीना देने का दबाव
सोमवार को योगेश सिंह की शिकायत पर रावतपुर थाने में गजेंद्र सिंह तथा उसके दो भाइयों- सुमित सिंह नेगी और वासुदेव नेगी के खिलाफ मुकदमा लिखा गया। योगेश ने पुलिस को बताया कि नेगी एन्क्लेव में आफिस खरीदने के बाद फर्नीचर व्यवस्थित किया था। योगेश कुछ दिन के लिए शहर के बाहर गए तो नेगी व उसके भाईयों ने शटर के अंदर दीवार बनाकर कब्जा कर लिया और फर्नीचर लूट लिया। उसने विरोध किया तो नेगी व उसके लोगों ने रिवाल्वर लगाकर धमकाया। नेगी व उसके भाईयों ने दस लाख रुपए की रंगदारी मांगने के साथ-साथ पास हजार रुपए महीना अदा करने की शर्त पर रखी तो योगेश घबराकर यहां से वापस हो लिये।
वकालत की डिग्री ली नहीं है काउंसिल में पंजीकरण
एसआईटी की जांच में सामने आया कि गजेंद्र नेगी ने वकालत के पेशे को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उसने वकालत की डिग्री ली लेकिन बॉर काउंसिल में पंजीकरण नहीं कराया इसके बाद भी नेगी कचहरी तथा बाहर भी अक्सर काला कोट पहनकर ही रहता था। वर्ष 2019 में नेगी को भू-माफिया घोषित किया गया तो वह राहत के लिए हाईकोर्ट गया, लेकिन उसे राहत नहीं मिली। पुलिस का कहना है कि गजेंद्र नेगी के ऊपर दस मुकदमे हैं, पुलिस अब लोगों को ठगने के आरोपी नेगी की हिस्ट्रीशीट खोलने की तैयारी कर रही है।