निशंक न्यूज
\कानपुर। नगर निगम में मोटी रकम लेकर ठेके दिलाने के आरोप में मुकदमा दर्ज होने के बाद गोविंद शर्मा की तलाश कर रही पुलिस अब उसके संपर्क में रहे लोगों की कुंडली खंगालने में जुट गई है। पुलिस कमिश्नर ने साफ किया है कि गोविंद की मदद करने वालों के साथ ही उसके इशारे पर काम करने वाले ठेकेदारों और अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी। पुलिस की इस चेतावनी के बाद नगर निगम में गोविंद का नाम लेकर ठेके हासिल करने वाले अधिकारियों और ठेकेदारों में खलबली मच गई है।

नगर निगम से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, करीब आधा दर्जन अधिकारियों और एक दर्जन ठेकेदारों के नाम गोविंद के संपर्क में रहने वालों के तौर पर चर्चा में हैं। इन लोगों को आशंका है कि पुलिस ने गोविंद के मोबाइल नंबर और उसके संपर्क में रहे लोगों की पड़ताल शुरू की तो बातचीत और लेनदेन से जुड़े तथ्य सामने आ सकते हैं। यही वजह है कि मुकदमा दर्ज होने के बाद नगर निगम के गलियारों में गोविंद के करीबियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
कमीशन के बदले ठेकों का आरोप
गोविंद शर्मा पर आरोप है कि वह नगर निगम में प्रभाव का इस्तेमाल कर ठेके दिलाने के नाम पर मोटी रकम वसूलता था। चर्चा यह भी है कि जिन ठेकेदारों से अधिक कमीशन लिया गया, उन्हें काम दिलाने में मदद की गई। अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ठेके दिलाने की प्रक्रिया में किन अधिकारियों की भूमिका रही और गोविंद किन लोगों के संपर्क में था।
पुलिस कमिश्नर के मुताबिक, जांच में सिर्फ गोविंद तक कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी। उसके साथ संपर्क में रहने वाले और उसकी मदद करने वाले लोगों की भूमिका भी सामने आने पर कार्रवाई की जाएगी। इससे नगर निगम के उन अधिकारियों और ठेकेदारों की चिंता बढ़ गई है, जिनका नाम गोविंद के साथ जोड़ा जा रहा है।
घटिया निर्माण की शिकायतें भी जांच के दायरे में

जांच की आंच सिर्फ ठेका दिलाने के कथित खेल तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। आरोप है कि अधिक कमीशन देने वाले कुछ ठेकेदारों को काम मिलने के बाद कई स्थानों पर निर्माण की गुणवत्ता से समझौता किया गया। यदि पुलिस या नगर निगम की जांच में ऐसे निर्माण कार्यों में गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित ठेकेदारों और उनकी फर्मों पर भी कार्रवाई हो सकती है।
निर्माण कार्यों की गुणवत्ता खराब मिलने पर संबंधित फर्मों को काली सूची में डालने की कार्रवाई भी की जा सकती है। ऐसे में गोविंद के संपर्क में रहे ठेकेदारों की चिंता दोहरी हो गई है। एक तरफ उन्हें पुलिस की जांच में मोबाइल और संपर्कों की पड़ताल का डर है, वहीं दूसरी ओर पुराने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच होने की आशंका भी बढ़ गई है।
किसने कितनी बार की बात, खंगाले जाएंगे नंबर

पुलिस की जांच में गोविंद के मोबाइल नंबर महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकते हैं। उसके मोबाइल से अधिकारियों, ठेकेदारों और अन्य लोगों से हुई बातचीत की पड़ताल की गई तो यह सामने आ सकता है कि कौन-कौन लोग लगातार उसके संपर्क में थे। जरूरत पड़ने पर पुलिस कॉल डिटेल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर भी जांच आगे बढ़ा सकती है।
नगर निगम के अधिकारियों और ठेकेदारों में अब इस बात को लेकर चर्चा है कि पुलिस की जांच किस स्तर तक पहुंचेगी। फिलहाल पुलिस गोविंद की तलाश के साथ उसके नेटवर्क से जुड़े लोगों की जानकारी जुटा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच में जिसकी भी भूमिका सामने आएगी, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इन बिंदुओं पर पुलिस की नजर
- गोविंद शर्मा के संपर्क में रहे अधिकारी और ठेकेदार
- ठेका दिलाने के नाम पर कथित लेनदेन
- मोबाइल कॉल और संपर्कों का विवरण
- गोविंद की मदद करने वालों की भूमिका
- उसके इशारे पर काम करने के आरोपों की पड़ताल
- संबंधित ठेकों में निर्माण कार्य की गुणवत्ता
- गड़बड़ी मिलने पर फर्मों पर कार्रवाई और काली सूची में डालने की संभावना
