निशंक न्यूज
कानपुर। कानपुर नगर निगम में टेंडर प्रक्रिया में चल रहा खेल मंगलवार को सामने आ गया। मुख्यमंत्री की नजर टेढ़ी होने के बाद सक्रिय नगर आयुक्त तथा कानपुर के पुलिस कमिश्नर की जांच के बाद विकास कार्यों के होने वाले टेंडर में चल रही माफिया गिरी को खत्म कर दिया गया। पुलिस ने टेंडर दिलाने के नाम पर खेल करने वाले दो ठेकेदारों को गिरफ्तार कर लिया। इस गिरोह के मुख्य सरगना की तलाश में पुलिस छापे मार रही है। इस मामले में कानपुर के विभिन्न थानाक्षेत्रो में छह मुकदमें लिखाए गए हैं। इधर इस खुलासे के बाद नगर निगम कि टेंडर प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। अब ई-टेंडर से ठेके आवंटित किये जाएंगे। सरकारी टेंडर प्रक्रिया में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्ती के बाद कानपुर नगर निगम में चल रहे टेंडर सिंडिकेट के खेल पर बड़ा ब्रेक लग गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक शिकायत पहुंची थी कि कुछ लोग ठेकेदारों को डराते-धमकाते थे और तय करते थे कि कौन टेंडर डालेगा और कौन नहीं। पुलिस के मुताबिक अपने चहेतों को काम दिलाने के लिए पूरी टेंडर प्रक्रिया को ही हाईजैक कर लिया गया था। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि गोविंद शर्मा नाम का व्यक्ति पूरी प्रक्रिया पर शिकंजा कसे था उसके इशारे पर ही काम आवंटित किया जा रहा है जो काफी कम रेट पर होता था। नगर आयुक्त द्वारा अपने स्तर पर भी इस मामले की जांच की जा रही थी और पुलिस भी ऐसे टेंडर माफियाओं पर शिकंजा कसने की दिशा में काम कर रही थी।
इस बड़े खेल में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 6 आरोपियों पर मुकदमा दर्ज किया है। इनमें 5 केस स्वरूप नगर और एक केस फजलगंज थाने में दर्ज हुआ है। पुलिस ने सिंडिकेट के दो सदस्य संदीप जैन और रज्जन बाजपेई को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि इसका मास्टरमाइंड गोविंद शर्मा अभी फरार है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी गठित कर दी गई है, जो पूरे सिंडिकेट की कुंडली खंगालेगी। एसआईटी यह जांच करेगी कि इस गैंग से कितनी फर्में जुड़ी थीं, कितने टेंडर कब्जाए गए और कितने करोड़ का लेनदेन हुआ।

उधर, नगर निगम ने भी सख्ती दिखाते हुए करीब 100 करोड़ के टेंडर निरस्त कर दिए हैं और अब ई-टेंडरिंग से नए सिरे से प्रक्रिया शुरू की है, ताकि भ्रष्टाचार पर पूरी तरह लगाम लग सके।
