वट सावित्री व्रत पूजन के लिये यह समय शुभ


डॉ प्रीती अग्निहोत्री
सह विभागाध्यक्ष संस्कृत महा विद्यालय

वट सावित्री व्रत हिंदू धर्म में विवाहित महिलाओं द्वारा रखा जाने वाला एक बहुत ही महत्वपूर्ण व्रत है महिलाएं यह व्रत अपने पति की लंबी उम्र,अच्छे स्वास्थ्य और सुख‑समृद्धि के लिए करती हैं इस व्रत का संबंध माता सावित्री और सत्यवान की कथा से जुड़ा है सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प और अटूट प्रेम से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस ले लिए थे इसी कारण यह व्रत पति की रक्षा और वैवाहिक सुख का प्रतीक माना जाता है।
पं पवन तिवारी ने बताया कि वट सावित्री व्रत 16 मई शनिवार को रखा जाएगा, जो ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि पर पड़ रहा है अमावस्या तिथि का आरंभ 16 मई 2026 को सुबह 5 बजकर 11 मिनट पर होगा अमावस्या तिथि का समापन 16 मई को ही देर रात 1 बजकर 30 मिनट पर होगा उदयातिथि को देखते हुए इस साल वट सावित्री का व्रत 16 मई 2026, शनिवार के दिन रखा जाएगा।


वट सावित्री व्रत पर पूजा के लिए सबसे उत्तम शुभ मुहूर्त सुबह 7:12 बजे से 08:24 मिनट तक रहेगा इस दिन अभिजीत मुहूर्त दिन के 11:50 से दोपहर के 12: 45 मिनट तक रहेगा इस साल वट सावित्री व्रत पर सौभाग्य योग और शोभग योग का संयोग भी रहेगा।
डॉ प्रीती अग्निहोत्री (सह विभागाध्यक्ष संस्कृत महा विद्यालय) ने बताया कि व्रत रखने वाली महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करती हैं इसके बाद साफ और पारंपरिक कपड़े पहनती हैं, आमतौर पर लाल या पीले रंग के विवाहित महिलाएं सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी और सोलह शृंगार करती हैं इसके बाद विधि‑विधान से पूजा और व्रत की शुरुआत की जाती है कई महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं, यानी पूजा पूरी होने तक न तो खाना खाती हैं और न ही पानी पीती हैं हालांकि, जो महिलाएं पहली बार व्रत रख रही हों, उम्रदराज हों या किसी बीमारी से परेशान हों, वे फल और पानी लेकर सरल व्रत रख सकती हैं।

ऐसे करें वट सावित्री व्रत की पूजा

सबसे पहले पूजा की जगह को साफ करें और पूजा की सामग्री तैयार रखें
पूजा मंदिर में या पास के किसी बरगद (वट) के पेड़ के नीचे की जाती है
बरगद के पेड़ पर जल, फूल, फल और रोली चढ़ाएं
दीया और अगरबत्ती जलाएं
कच्चा सूत (धागा) लेकर पेड़ के चारों ओर बारह परिक्रमा करें
पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली की कामना करें
12 बरगदा, 12सूत का माला,12 बार बरगद के पेड़ से भेट, और बरगद की कोपल के साथ 12 चने के दाने खा कर व्रत पूर्ण होता है। और विशेष रूप से आम,लीची व खरबूजा का फल जरूर चढ़ाया जाता है।
अमरता का प्रतीक है बरगद का पेड़
बरगद के वृक्ष को अमरता और स्थायित्व का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इसकी पूजा वैवाहिक जीवन की लंबी उम्र और मजबूती का संकेत देती है।

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