इस बार यह है भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करने का सबसे शुभ मुहूर्त

आचार्य पवन तिवारी (संस्थापक अध्यक्ष ज्योतिष सेवा संस्थान)

गणेश महोत्सव 27 अगस्त को शुरू हो जाएगा। 10 दिन बाद 6 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन इसका समापन होगा।

गणेश चतुर्थी पर शुभ योग, शुक्ल योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग बन रहे हैं। इसके साथ ही हस्त नक्षत्र और चित्रा नक्षत्र भी रहेगा।

सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 5:57 बजे से 6:04 तक

रवि योग सुबह 5:57 बजे से 6:04 बजे तक

शुभ योग सुबह से दोपहर 12:35 बजे तक

इसके बाद शुक्ल योग बनेगा। गणेश चतुर्दशी के दिन हस्त नक्षत्र प्रात:काल से लेकर अगले दिन सुबह 6:04 बजे तक है। उसके बाद चित्रा नक्षत्र प्रारंभ हो रहा है।

चतुर्थी के दिन चंद्रदर्शन न करें। इस दिन चंद्रोदय सुबह 9:28 बजे होगा। चंद्रमा के अस्त होने का समय रात में 8:57 बजे का है।

गजानन का जन्म दोपहर में हुआ था। उनकी स्थापना इसी काल में होनी चाहिए। इस बार 26 अगस्त को दोपहर 12:40 मिनट से गणेश चतुर्दशी प्रारंभ होगी, जो 27 अगस्त की दोपहर 3:44 बजे तक रहेगी। गणेशजी की स्थापना मुहूर्त वैसे तो बुधवार सुबह सूर्योदय से पूरा दिन ही शुभ है। सुविधानुसार गणेशजी की स्थापना भी की जा सकती है।

सबसे शुभ मुहूर्त-

27 अगस्त को 11:45 से 12:55 बजे तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा।

इस मुहूर्त में गणपित की प्रतिमा की स्थापना सबसे शुभ रहेगी। इसके साथ ही 27 अगस्त को दोपहर 1.39 से शाम 6.05 बजे तक का मुहूर्त भी शुभ है।

गणेश चतुर्थी चौघड़िया मुहूर्त

लाभ – उन्नति – 05:57 ए एम से 07:33 ए एम

अमृत – सर्वोत्तम – 07:33 ए एम से 09:09 ए एम

शुभ – उत्तम – 10:46 ए एम से 12:22 पी एम

लाभ – उन्नति – 05:12 पी एम से 06:48 पी एम

इस मुहूर्त में घर लाएं गणपति

27अगस्त सुबह 7:33 से 09: 09 बजे तक

27अगस्त 10:46 मध्याह्न से 12:22 तक

कुछ लोग एक दिन पहले यानी हरतालिका तीज के दिन भी घर में गणपति मूर्ति ले आते हैं ऐसे में 26 अगस्त को सुबह 09:09 से दोपहर 1:59 तक गणेश मूर्ति घर ला सकते हैं।

मूर्ति स्थापना के लिए सबसे सही दिशा

ईशान कोण- ईशान कोण, यानी उत्तर-पूर्व दिशा को घर का सबसे शुभ और पवित्र स्थान है।

गणेश मूर्ति खरीदते समय ध्यान रखें ये बातें

मिट्‌टी की गणेश मूर्ति लें

बप्पा की सूंड बाईं ओर हो

घर में स्थापना के लिए बैठे हुए गणपति शुभ होते हैं

सिंदूरी और सफेद रंग के गणपति की मूर्ति बहुत प्रभावशाली होती है

ध्यान रहे मूर्ति कहीं से खंडित न हो

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