ब्रह्मा विष्ण महेश तीनों देवताओं को समर्पित है यह मंदिर

वेद गुप्ता वरिष्ठ पत्रकार

आज गुरुवार है आज आपको एक ऐसे मंदिर की कथा बताने का प्रयास कर रहा हूं जो ब्रह्मा विष्ण-महेश तीनों ही देवताओं को समर्पित है। केरल के नागरकोविल के पास स्थित इस मंदिर में हजारों लोग आज भी मनोकामना की पूर्ति के लिये जाते हैं। कहा जाता है कि सुचिंद्रम कन्याकुमारी के निकट सुचिन्द्रम नामक एक तीर्थ है , जहाँ धार्मिक आस्था श्रद्धालुओं को खींच लाती है। इस स्थान पर भव्य स्थानुमलयन मन्दिर है। यह मन्दिर ब्रह्मा , विष्णु एवं महेश की त्रिमूर्ति को समर्पित है। यह त्रिमूर्ति वहाँ एक लिंग के रूप में विराजमान है।

केरल में स्थित यह भव्य मंदिर।

मंदिर के मुख्य देवता हैं स्तनुमालयन

कहा जाता है कि मन्दिर के मुख्य देवता स्तनुमालयन हैं – यह शब्द शिव (स्तनु) , मल (विष्णु) और अयन (ब्रह्मा) की त्रिमूर्ति को दर्शाता है। भारत में त्रिमूर्ति को समर्पित मन्दिर बहुत दुर्लभ हैं ; फिर भी , ऐसे मन्दिर जहाँ तीनों देवता एक ही मूर्ति के रूप में विद्यमान हों , अत्यंत दुर्लभ हैं। यहाँ त्रिदेवों की पूजा एक विशाल लिंग के रूप में की जाती है। इसके तीन भाग हैं , जिनमें सबसे ऊपर शिव, बीच में विष्णु और लिंग के सबसे नीचे क्रमशः ब्रह्मा विराजमान हैं। त्रिदेवों के अलावा , विघ्नेश्वरी ( विनायगा का स्त्री रूप) , देवी आराम वलर्थ नायकी , इंद्र विनायगा , काल भैरव और साक्षी गणपति की भी यहाँ पूजा की जाती है।

इसी स्थान पर इंद्र को मिली थी महर्षि गौतम के श्राप से मुक्ति

ऐतिहासिक किंवदंतियों के अनुसार, सभी देवताओं के राजा भगवान इन्द्र को इसी स्थान पर महर्षि गौतम द्वारा दिए गए श्राप से मुक्ति मिली थी। इस प्रकार जिस स्थान पर मन्दिर स्थित है उसका नाम सुचिंद्रम पड़ा जिसका अर्थ है वह स्थान जहाँ भगवान इन्द्र शुद्ध हुए। सुचिन्द्रम केरल में हिंदुओं द्वारा पूजनीय 108 शिव मन्दिरों में से एक है। मन्दिर परिसर 2 एकड़ में फैला है और इसमें दो मीनारें हैं जिन्हें ‘गोपुरम’ कहा जाता है जो प्रवेश द्वार हैं। पूर्वी मीनार 11 मंजिला है और 44 मीटर ऊँची है। मन्दिर के भीतर 30 मन्दिर हैं। मन्दिर का निर्माण 9वीं शताब्दी में हुआ माना जाता है। उस काल के कुछ शिलालेख मन्दिर में मौजूद हैं। 17वीं शताब्दी में इस मन्दिर को नया रूप दिया गया था।

दर्शनीय है हनुमान जी की 18 फुट ऊंची प्रतिमा

इस मन्दिर में भगवान विष्णु की एक अष्टधातु की प्रतिमा एवं पवनपुत्र हनुमानजी की 18 फुट ऊँची प्रतिमा विशेष रूप से दर्शनीय है।मन्दिर का सप्तसोपान गोपुरम भी भक्तों को प्रभावित करता है। मन्दिर के निकट ही एक सरोवर है। जिसके मध्य एक मंडप है। सुचिन्द्रम कन्याकुमारी से मात्र 13 कि.मी.दूर है। यह रास्ता नारियल के कुंचों से भरा है। वहाँ से 8 कि.मी. दूरी पर नागरकोविल शहर है। यह शहर नागराज मन्दिर के लिए प्रसिद्ध है। इस मन्दिर का वैशिष्ट्य देखते ही बनता है। देखने में यह मन्दिर चीन की वास्तुशैली के बौद्ध विहार जैसा प्रतीत होता है। मन्दिर में नागराज की मूर्ति आधारतल में अवस्थित है। यहाँ नाग देवता के साथ भगवान विष्णु एवं भगवान शिव भी उपस्थित हैं। मन्दिर के स्तंभों पर जैन तीर्थकरों की प्रतिमा उकेरी नजर आती है। जो थोड़े आश्चर्य की बात है। नागरकोविल एक छोटा-सा व्यवसायिक शहर है। इसलिए यहाँ हर प्रकार की सुविधाए उपलब्ध हैं।

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