निशंक न्यूज।
कानपुर के बिल्हौर विकासखंड में मनरेगा कार्यों में बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। सीडीओ दीक्षा जैन द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने 20.59 लाख रुपयों की धनराशि के दुरुपयोग की पुष्टि की है। जिस पर ग्राम प्रधान, ग्राम सचिव और तकनीकी सहायक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने और पूरी धनराशि की वसूली के आदेश दिए गए हैं।
जांच में पर्यवेक्षण में लापरवाही पाए जाने पर कार्यक्रम अधिकारी, अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी, लेखाकार व ऑपरेटर समेत कई अधिकारियों पर मनरेगा अधिनियम-2005 की धारा 25 के तहत एक–एक हजार रुपये का अर्थदंड और सीआईबी बोर्ड न लगाने पर कुल 3.08 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। साथ ही मनरेगा कार्मिकों की संदिग्ध कार्यशैली को देखते हुए संबंधित संविदा समाप्ति की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। इसके अलावा गांव के प्रधान विमलेश कुमार से करीब 6.87 लाख, तत्कालीन ग्राम सचिव संदीप ज्ञानवीर से 70 हजार, ग्राम सचिव शिवपाल से 5 लाख, ग्राम विकास अधिकारी रोहन कनौजिया से 1.79 लाख, तकनीकी सहायक इंद्र कुमार से 70 हजार, तकनीकी सहायक प्रमोद कुमार से 6.79 लाख, तत्कालीन बीडीओ शिवनारायण कश्यप से 37 हजार वसूली से आदेश दिए गए हैं। इसी तरह तत्कालीन खंड विकास अधिकारी आशीष मिश्र करीब 15 हजार, तत्कालीन खंड विकास अधिकारी बलराम से 13 हजार, अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी शिशिर कुमार से 9 हजार, अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी दीप सिंह 35 हजार, अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी प्रीति अग्निहोत्री से 21 हजार, लेखाकार देवेन्द्र शर्मा से 63 हजार और लेखा सहायक प्रदीप तिवारी, कंप्यूटर ऑपरेटर ललित कुमार पर एक–एक हजार की वसूली के आदेश दिए गए। प्रशासन ने साफ किया है कि मनरेगा कार्यों में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदारों पर आगे भी कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
