पंडित पवन तिवारी
संस्थापक अध्यक्ष ज्योतिष सेवा संस्थान
हर एक को नवग्रह से मिलने वाले कष्टों से बचाने वाली पूर्णिमा माघी पूर्णिमा आ रही है। इस वर्ष यह पूर्णिमा एक फरवरी रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन पूजा अर्चना व दान के माध्यम से हर कोई नवग्रह से होने वाले कष्ट को कम कर सकता है। इस पूर्णिमा को साल की प्रमुख पूर्णिमा में एक माना जाता है।
पूर्णिमा के दिन अधिक सक्रिय होती हैं सकारात्मक शक्तियां
एक वर्ष में बारह पूर्णिमा और बारह अमावस्या आती हैं, सभी का महत्व अलग-अलग है। भारतीय चन्द्र मास की गणना में चन्द्रमा की गति एवं कला के आधार पर 15-15 दिनों के दो पक्ष बांटे गए हैं, जिन्हें शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष के नाम से जाना जाता है। शुक्ल पक्ष में पूर्णिमा और कृष्ण पक्ष में अमावस्या आती है।

प्रमुख ज्योतिषी पंडित पवन तिवारी का कहना है कि अमावस्या को नकारात्मक शक्तियां अधिक सक्रिय रहती हैं, वहीं पूर्णिमा को सकारात्मक शक्तियां की सक्रियता अधिक होती है। तिथियों की गणना में पूर्णिमा तिथि को स्नान, दान, जप, तप के साथ शुभ कार्य करने के लिए श्रेष्ठ माना गया है। नन्दा, भद्रा, जया, रिक्ता, पूर्णा यह पांच प्रकार की तिथियों का समूह माना गया है, शुक्ल पक्ष की पूर्णा तिथि, पूर्णिमा का विशेष महत्व धर्मशास्त्रों में वर्णित है। माघ मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को माघी पूर्णिमा कहलाती हैं। इस दिन शुभ कर्मों के साथ स्नान, दान, ध्यान का विशेष महत्व है जिससे मानव कल्याण सुनिश्चित है। इस पूर्णिमा के दिन जो भी ग्रह आपको पीड़ा दे रहा हो, उसे सरलतापूर्वक जप, दान, पुण्य कर शांत किया जा सकता है।
यह करने से समाप्त हो जाते हैं नवग्रह जनित दोष
माघी पूर्णिमा के दिन स्नान, दान, जप, हवन आदि करने से अनंत फल की प्राप्ति के साथ ही नवग्रह जनित दोष समाप्त हो जाते हैं। पर्व के सुअवसर पर माघ मास में माघी पूर्णिमा को प्रातः स्नान करके यदि सूर्य को अर्घ्य दें तथा आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ, लाल चन्दन, लाल वस्त्र, गेहूं का दान करें तो सूर्य का दोष समाप्त हो जाता है। इसी प्रकार अगर जन्मकुण्डली में चंद्रमा निर्बल हो तो चंद्र दोष दूर करने के लिए चंद्रमा के निमित्त मिसरी, शक्कर एवं चावल का दान करें। कर्ज का बोझ अथवा मंगल का कष्ट होने पर माघी पूर्णिमा के दिन मंगल के निमित चने की दाल, गुड़ एवं लाल वस्त्र, ताम्बे के बर्तन आदि का दान अवश्य करना चाहिए। बुद्धि विवेक में वृद्धि एवं बुध की अनुकूलता के लिए बुध के निमित्त आवंला, आवंले का तेल, हरी सब्जियों का दान करना चाहिए। विवाह में बाधा हो अथवा गुरु दोष दूर करने के लिए गुरु के निमित्त पीली सरसों, केसर, पीला चंदन, मक्का, सामर्थ्य अनुसार सोने का दान करना चाहिए। दाम्पत्य जीवन में मधुरता अथवा शुक्र दोष दूर करने के लिए शुक्र के निमित्त शुक्रवार को माघी पूर्णिमा पर कपूर, देसी घी, मक्खन, सफेद तिल, गजक आदि का दान करना चाहिए।
किस ग्रह के दोष दूर करने के लिये क्या करना होगा बेहतर
साढ़ेसाती, ढैय्या से बचाव अथवा शनिदोष दूर करने के लिए माघी पूर्णिमा पर काले तिल, तिल्ली का तेल, लोहपात्र, काला वस्त्र आदि दान करना चाहिए। इसी प्रकार राहु के लिए चितकबरा कंबल, भोजन, अधोवस्त्र आदि तथा केतु के निमित्त स्कार्फ, टोपी, पगड़ी आदि का दान तथा दिव्यांगजनों की सहायता करने से सभी ग्रहों के कारण होने वाले विकारों को दूर किया जा सकता है। माघी पूर्णिमा के दिन पितरों को तर्पण करने का विशेष महत्व होता है। माघी पूर्णिमा का स्नान, यज्ञ, जप-तप-व्रत, दानादि का विशेष महत्व है। तीर्थराज प्रयागराज के संगम के तट पर एक महीने का कल्पवास की अवधि पूर्णकर कल्पवासी माघ पूर्णिमा के दिन स्नान, गंगा पूजन, आरती, हवनादि कर पूरे माघ महीने किए गए कल्पवास, साधना, जप-तप-व्रत, दान, तपस्या की पूर्ति स्वरूप गंगा माता की रेणुका प्रसाद के रूप में लेकर फिर अगले वर्ष जीवनदायिनी गंगा मैया की गोद में आने की प्रार्थना कर अपने-अपने नगर ग्राम के लिए प्रस्थान करते हैं।
माघी पूर्णिमा का दिन और शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार इस बार पूर्णिमा तिथि 1 फरवरी को सुबह 05:52 से शुरू होकर 2 फरवरी की सुबह 03:38 तक रहेगी (स्थानीय पंचांग अनुसार कुछ शहरों में समय में मामूली अंतर हो सकता है)। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त स्नान-दान के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
माघी पूर्णिमा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
माघ मास को पवित्र मास माना जाता है और माघी पूर्णिमा को इस मास की अंतिम और सबसे फलदायी पूर्णिमा कहा जाता है। इस दिन गंगा, यमुना और पवित्र नदियों में स्नान करने से आत्मिक शुद्धि और पापकर्मों के नाश का लाभ मिलता है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किया गया दान और स्नान विशेष पुण्य देता है और जीवन के क्लेशों से मुक्ति में सहायक होता है।
