ओ पी पाण्डेय
चेहरे पर दृढ़ता और दिल में हर परेशान व्यक्ति के प्रति भावुकता तथा मदद का भाव रखने वाले अलीगढ़ के जिलाधिकारी संजीव रंजन के जीवन का मकसद ही समाज में निचली पायदान में खड़े हर वंचित की मदद कर उनके चेहरे पर मुस्कराहट लाना है। मूलरूप से बिहार के रहने वाले आईएएस संजीव रंजन ने अलीगढ़ में अपनी तैनाती के बाद इसी मकसद को पूरा करने की दिशा में काम किया जो अब फलीभूत होने की स्थिति में है। आईएएस संजीव रंजन की धर्मपत्नी बिहार राज्य की राजधानी पटना की सुप्रसिद्ध चिकित्सक होने के साथ ही मरीजों की सेवा में लगी रहती हैं।
जनसेवा को ही तपस्या मानते हैं आईएएस संजीव रंजन

आईएएस संजीव रंजन जनसेवा को ही तपस्या मानते हैं और उन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्र सेवा एवं जन सेवा के लिए न्योछावर करने के लिए बचपन से ही मन बना लिया था । अपने जीवन का उद्देश्य पूरा करने के लिए प्रशासनिक सिविल सेवा सर्विस परीक्षा को पास कर वह उत्तर प्रदेश कैडर के आईएएस बने। राष्ट्रसेवा एवं जनसेवा के जुनून में सरोबर होकर उन्होंने समाज के गरीब, कमजोर वर्ग के लोगों की समस्याओं का समाधान कर उनके जीवन स्तर को उज्जवल बनाने की शपथ ली। समाज के अंतिम पायदान पर खड़े न्याय के लिए आकांक्षित पीड़ित व्यक्ति की समस्या का समाधान कर उसके चेहरे पर मुस्कान लाना ही उनके जीवन का सर्वप्रथम उद्देश्य है ।
लीक से हटकर रास्ता बनाने पर रखते हैं विश्वास
आईएएस संजीव रंजन उत्तर प्रदेश कैडर के उन प्रशासनिक अधिकारियों में एक हैं जो लीक पर चलने वाले जिलाधिकारी नहीं अपितु लीक से हटकर एक अलग रास्ता बनाने में विश्वास रखते हैं। कार्यशैली से तेजतर्रार, कर्मठ ईमानदार, लगनशील एवं मृदुभाषी स्वभाव के जिलाधिकारी अलीगढ़ संजीव रंजन ने बताया कि जन समस्याओं के समाधान एवं शासन की नीतियों को समाज के सबसे कमजोर वर्ग तक पहुंचाना एवं गरीब कमजोर वर्ग की ज्वलंत समस्याओं को जड़ सहित समाप्त करना उनके जीवन का मुख्य उद्देश्य है, यही उनकी प्राथमिकता है । जनता को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सेवाये उपलब्ध कराना एवं शिक्षा क्षेत्र को बेहतर करना ही उनका लक्ष्य है। जिससे लोगों को अच्छी से अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सके तथा बच्चों को पढ़ने के लिए शिक्षा का बहुत ही अच्छा माहौल मिल सके। शिक्षा क्षेत्र के अच्छे वातावरण में वे उच्च शिक्षा प्राप्त कर देश की तरक्की मे अहम योगदान दे सकें । जीवन के इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए ही उन्होंने सिविल सर्विसेज के क्षेत्र को चुना है।
पीड़ित को देख सड़क चलते रुकवा लेते हैं अपनी गाड़ी
अल्पभाषी होने के साथ ही, मृदुभाषी होना उनकी विवेकशीलता का परिचायक है। बोलने के समय चुप रहना और चुप रहने के समय बोलना उन्होंने सीखा ही नहीं है जो उनके व्यक्तित्व की सबसे प्रमुख विशेषता है।तभी तो उनकी कार किसी भी ऐसी राह पर रुक जाती है जहां उन्हें लगता है कि कोई पीड़ित हाथ में प्रार्थनापत्र लिए खड़ा उनकी प्रतीक्षा कर रहा है। किसी भी जरूरतमंद पीड़ित से मिलकर सारी जानकारी हासिल कर जिलाधिकारी संजीव रंजन त्वरित कार्यवाही के निर्देश देकर समस्या के समाधान हेतु तत्पर रहते हैं। उनकी संवेदनशीलता का आलम यह है कि न्याय के लिए आकांक्षित किसी पीड़ित को निरख कर उनकी नम आंखें तभी सूखती हैं जब वह उसे न्याय प्रदान कर भविष्य के प्रति आश्वस्त कर देते हैं। अति संवेदनशील, लगनशील , ईमानदार, परिश्रमी, मेधावी एवं प्रबुद्ध विवेकशील आईएएस अधिकारी संजीव रंजन को प्रशासनिक अधिकारी के रूप में जहां-जहां नियुक्ति मिली , उन्होंने उत्तर प्रदेश की जटिल से जटिल जन समस्याओं का समाधान कर प्रदेश एवं जनता को लाभान्वित किया ।

हर सरकारी योजना को पात्र तक पहुंचाने का रहता है प्रयास
अपने अधीनस्थ विभाग एवं कर्मचारियों पर अपनी सजग दृष्टि सदैव केंद्रित रखते हुए संजीव रंजन द्वारा उन्हें उनकी कर्त्तव्यनिष्ठा के प्रति सजग रहने का संकेत समय-समय पर देते रहते हैं ताकि हर सरकारी आदेश का सुचारू रूप से पालन संभव हो सके और हर वह सरकारी योजना उन जरूरतमंदों तक अवश्य पहुंचे जिनके कल्याण के लिए सरकार ने उन योजनाओं को आरंभ किया हो। किसी भी जरूरतमंद के लिए सदैव तत्पर रहने वालेn जिलाधिकारी संजीव रंजन अधीनस्थ अधिकारियों पर अंकुश रख सरकारी सुविधाओं को उनके वास्तविक जरूरतमंद पात्रों तक पहुंचाने के प्रति सदैव सचेष्ट रहते हैं, यह उनकी संवेदनशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण है।
स्वास्थ्य व शिक्षा के क्षेत्र में रहती है पैनी नजर
शिक्षा और स्वास्थ्य के प्रति उनकी संवेदनशीलता देखते ही बनती है। स्वास्थ्य एवं शिक्षा विभाग पर उनकी प्रखर दृष्टि सदैव बनी रहती है जिनका निरीक्षण एवं परीक्षण वह कभी भी बिना पूर्व सूचना के करते रहते हैं। स्वास्थ्य विभाग के सरकारी परीक्षण उपकरण सुचारु रूप से क्रियान्वित हैं या नहीं इस पर उन्होंने सदा नज़र रखी है। जरूरतमंद गरीब मरीज को समय पर सुविधानुसार उपचार मिले और सरकार उनके लिए समुचित व्यवस्था कर औषधियों का इंतजाम करे इस पर उन्होंने सदैव अपनी नज़र रखी है तथा आवश्यकता पड़ने पर गरीब मरीज को अपने प्रयास से सरकार द्वारा समुचित धन की व्यवस्था के लिए भी उन्होंने हमेशा रास्ते खोजे और अनेक जरूरतमंद गरीब मरीजों को सरकारी धन की मदद भी मुहैया कराई। शिक्षा विभाग को अनियमितताओं से दूर रखते हुए उन्होंने इस बात का सदैव ख्याल रखा कि हर पात्र को समय पर स्कॉलरशिप मिले।उनके संज्ञान में जब भी यह आया कि धनाभाव के कारण कोई शिक्षा से वंचित रह रहा है तो उन्होंने उसकी किसी न किसी प्रकार अपनी ओर से सहायता कर एक उत्कृष्ट उदाहरण अवश्य प्रस्तुत किया।
ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय एवं घर जैसी बुनियादी आवश्यकता पर उनकी दृष्टि सदैव पैनी रही। किसान सम्मान निधि हो या वृद्ध एवं विधवा पेंशन योजना सभी का लाभ उन्होंने पात्र पात्रों तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका का निर्वहन किया। अपनी इसी संवेदनशीलता के कारण वह अलीगढ़ जनपद की जनता के लिए मसीहा बन गए। केन्द्र व उत्तर प्रदेश सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय, अलीगढ़’ के त्वरित गति से हो रहे निर्माण में उनकी सक्रिय भूमिका और समर्पण को जनपद की जनता कभी विस्मृत नहीं कर पाएगी।
बेजा राजनीतिक दबाव मानने से करते हैं परहेज
एक अच्छा और कुशल प्रशासनिक अधिकारी वही माना जाता है जो निष्पक्षता की राह पर चलकर तर्कसंगत न्याय के पथ को अपनाता है। दुराग्रहवश या किसी राजनीतिक दबाव में लिया गया निर्णय सदैव असंतोष का कारण होता है। प्रभावी पक्ष ऐसे निर्णय से कभी संतुष्ट हो नहीं सकता।अपनी न्यायप्रियता एवं निष्पक्षता से अपनी एक पृथक पहचान बनाने वाले आईएएस संजीव रंजन मे यह प्रमुख विशेषता है कि वह कभी किसी राजनीतिक दबाव को नहीं स्वीकारते है। फलत: उनके द्वारा दिए गए निर्णय सदैव सर्वमान्य बन जाते हैं। नि:संदेह राजनीतिक दबाव में लिया गया निर्णय आक्रोश का कारण बन समाज में अराजकता को जन्म देता है इसीलिए उन्होंने सदैव राजनीतिक दबाव को अस्वीकारते हुए स्वछंद रूप से निर्णय लिए हैं जो उनकी दृढ़ता की परिणति है।
