निशंक न्यूज डेस्क
मुंबई में हुए आतंकी हमले के बाद मीडिया में हर तरफ आलोचना होने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री से इस्तीफा देने वाले कांग्रेस के वरिष्ट नेता व पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज सिंह पाटिल का शुक्रवार 12 दिसंबर को निधन हो गया। वह देश की राजनीति में शायद ऐसे पहले नेता थे जिन्हें लोकसभा का चुनाव हारने के बाद भी केंद्र सरकार में गृह मंत्री बनाया गया था। वह महाराष्ट्र की राजनीति में काफी समय तक कांग्रेस की धुरी रहे। पिछले कुछ समय से वह उम्र संबंधी बीमारियों को लेकर परेशान थे। उनका निधन 90 साल की उम्र में हुआ।
सात बार लातूर से सांसद रहे थे पाटिल
पू्र्व केंद्रीय मंत्री शिवराज पाटिल का कांग्रेस हाई कमान के अतिकरीबी लोगों में एक माना जाता था और वह महाराष्ट्र की राजनीति में कांग्रेस की धुरी बनकर रहते थे हालांकि पूर्व मंत्री शरद पवार भी महाराष्ट्र की राजनीति में अपनी अलग पैठ बना चुके थे। उस्मानिया यूनिवर्सिटी से साइंस से स्नातक करने वाले पाटिल अधिवक्ता भी थे और उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय से लाॅ की डिग्री ली थी। वह करीब सात बार महाराष्ट्र की प्रमुख लातूर लोकसभा क्षेत्र से सांसद रहे। इस क्षेत्र से वह उस बार चुनाव में पराजित हुए जिस साल केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनी।
गृह मंत्री बनने पर विवादों में घिरे पाटिल

कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में एक शिवराज पाटिल अपने राजनीतिक जीवन के दौरान कई प्रमुख पदों पर रहे और बेहतर ढंग से अपने कार्यकाल को पूरा किया। वह गृह मंत्री रहने के साथ ही केंद्र सरकार में रक्षा मंत्री भी रहे। इसके साथ ही वह पंजाब के राज्यपाल भी रहे, उन्होंने कांग्रेस लोकसभा अध्यक्ष के पद की जिम्मेदारी भी कुशलता पूर्वक निभाई लेकिन कांग्रेस सरकार में केंद्रीय गृह मंत्री बनने के बाद वह राजनीतिक रूप से विवादों में घिरते गये। उनके कार्यकाल में ही मुंबई बम धमाके की घटना हुई। इस घटना के दौरान विपक्ष ने उनपर कई गंभीर आरोप लगाया। विपक्ष तथा मीडिया में उनके द्वारा हर निरीक्षण के दौरान कपड़े बदलने की बात को भी मुद्दा बनाया गया। इस घटना में विपक्ष द्वारा लगातार घेराबंदी करने के बाद श्री पाटिल ने केंद्रीय गृह मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उन्होंने स्वयं को सक्रिय राजनीति से किनारा कर लिया और वर्तमान में लातूर में ही रह रहे थे जहां वह उम्र संबंधी बीमारी से परेशान होने के कारण स्वास्थ्य लाभ ले रहे थे।
मालेगांव बम विस्फोट और नंदीग्राम विवाद में भी हुई थी आलोचना

मालेगांव बम विस्फोट और नंदीग्राम विवाद पर भी शिवराज पाटिल पर विपक्षी द्वारों द्वार आरोप लगाए गए थे। 2008 में मालेगांव में मुस्लिम बाहुल्य इलाके में बम धमाका हुआ था। जिसमें करीब आधा दर्जन लोगों की जान गई और तमाम लोग घायल हुए थे। इस हमले के बाद हिंदू आतंकवाद शब्द चलन में आया और पाटिल पर यह आरोप लगा कि उन्होंने इस मामले में ठीक तरीके से एक्शन नहीं लिया। इसी तरह 2007 में नंदीग्राम में जब भूमि अधिग्रहण का मामला चर्चा में आया तभ भी श्री पाटिल पर आरोप लगाया गया कि बंगाल सरकार ने गृह मंत्रालय से सेंट्रल रिजर्व फोर्स की मांग की थी लेकिन गृह मंत्री रहते श्री पाटिल ने बंगाल सरकार की मांग नहीं की। इस मामले को भी विपक्ष ने मुद्दा बनाया था।
