विकास वाजपेयी।
बिहार चुनाव जीतकर एक बार यहां के मुख्यमंत्री की कुर्सी में बैठने की तैयारी कर रहे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चुनाव के पहले एक और मजबूत चुनावी तीर चलाया है। इस तीर से उन्होंने विपक्ष के पीडीए के फार्मूले की धार को भोथरा करने की तैयारी की है। चुनाव के पहले सफाई कर्मियों को अपने पाले में करने के लिये नीतीश सरकार ने बिहार में सफाई कर्मचारी आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है। सफाई कर्मचारियों के लिये आयोग के गठन की मांग प्रदेश के सफाई कर्मियों द्वारा काफी समय से की जा रही थी। माना जा रहा है कि पहले चलाए गए चुनावी तीरों की तरह नीतीश का यह चुनावी तीर उनके लिये काफी कारगर साबित हो सकता है। इस घोषणा को सफाई कर्मचारियों के लिये बड़ा तोहफा माना जा रहा है।
आयोग में एक सदस्य होगा महिला या ट्रांसजेंडर

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक संपन्न हो गई। सीएम नीतीश कुमार ने 41 प्रस्तावों पर अपनी मुहर लगा दी। कैबिनेट की बैठक में सफाई कर्मचारी आयोग के गठन को मंजूरी दे दी गई है। इसमें पांच सदस्य होंगे, जिसमें एक महिला या ट्रांसजेंडर और चार अन्य पदेन सदस्य शामिल रहेंगे। बिहार सरकार ने सफाई कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में बिहार राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के गठन को मंजूरी दी गई है। यह आयोग सफाई कर्मचारियों के अधिकारों, कल्याण और सेवा शर्तों पर निगरानी और सुझाव देने का काम करेगा।

आयोग का यह होगा उद्देश्य
यह होगा आयोग का उद्देश्य : आयोग का उद्देश्य राज्य में सफाई कार्यों से जुड़े समाज के वंचित वर्ग के लोगों को मुख्यधारा में जोड़ना और उनके सामाजिक एवं आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना है।
सात सदस्यीय होगा यह आयोग।
जानकार लोगों की मानी जाए तो इस आयोग में सात सदस्य शामिल होंगे। मतलब बिहार राज्य सफाई कर्मचारी आयोग में एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष और पांच सदस्य होंगे, जिनमें एक महिला या ट्रांसजेंडर व्यक्ति को शामिल किया जाएगा।
कर्मचारियों के कल्याण के लिये देगा सुझाव
आयोग सफाई कर्मचारियों के हितों से संबंधित सुझाव देगा, उनके अधिकारों की सुरक्षा के संबंध में सरकार को सलाह देगा और सफाई कार्य में लगे लोगों से संबंधित कल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा और कार्यान्वयन के लिए उचित कार्रवाई करेगा।