हाथी की प्रतिमा घर में रखने से इस तरह सुखमय होता है जीवन

वेद गुप्त वरिष्ट पत्रकार

हाथी को बहुत ही शुभ माना जाता है, घर में हाथी की प्रतिमा रखने के कई फायदे होते हैं, शास्त्रों में इसका संबंध विघ्नहर्ता गणपति जी से है। शास्त्रों में इस पशु का संबंध विघ्नहर्ता गणपति जी और धन की देवी लक्ष्मीजी से है, हाथी की प्रतिमा को घर में रखने के जो प्रमुख फायदे होते हैं बुधवार के दिन इन प्रमुख बातों को ही आपसे साझा किया जा रहा है।

ऐसे कम हो जाता है पति-पत्नी के बीच होने वाला तनाव

एकः आपका पत्नी से अक्सर बिना किसी बात के ही विवाद हो जाता है। घर के काम अथवा मामूली बात पर पति- पत्नी के बीच सामान्य बात भी बढ़कर विवाद का रूप ले लेती है और घर में कुछ समय के लिये तनाव का माहौल बन जाता है तो इसमें भी कमी आ सकती है अगर पर मन में श्रद्धा व विवाद कम करने की कामना लेकर शयनकक्ष में पीतल का हाथी रख लेते हैं अथवा हाथी की बड़ी तस्वीर लगा लेते हैं तो कहा जाता है कि ऐसा करने से पति-पत्नी में मतभेद खत्म होते हैं।

ऐसा करने से मिलती समृद्धि व शाति

कुछ घरों को छोड़ दिया जाए तो प्रायः हर घर में घर के लोग एक स्थान में कुछ समय के लिये जरूर बैठते हैं और घर में जो भी बाहर का व्यक्ति आता है तो उसे भी उस स्थान अथवा कमरें में बैठाया जाता है। सामान्य बातचीत में इस स्थान को बैठका भी कहते हैं। पीतल का हाथी बैठक रूम में रखा जाए तो, यह शांति और समृद्धि कारक है, इसी के साथ यह जीवन के हर क्षेत्र में सफलता दिलाता है।

राहु का उपाय भी है हाथी, संतान को नहीं होने देता कष्ट

कहा जाता है कि घर में या जेब में ठोस चांदी का हाथी रखना चाहिए, यह पंचम और द्वादश में बैठे राहु का उपाय है, इससे संतान को कष्ट नहीं होता और व्यापार में भी लाभ मिलता है। इसके अलावा चांदी से बने हाथी को घर की उत्तर दिशा में रखना वास्तु की दृष्टि से शुभ माना गया है, यह ऐश्वर्य का प्रतीक है।

मिलती है सकारात्मक उर्जा

हाथी की तस्वीर या मूर्ति घर में रखने से सकारात्मक उर्जा के साथ-साथ धन प्राप्ति के स्रोत बनते हैं, जिस हाथी की तस्वीर या मूर्ति में उसकी सूंड झुकी हो, उसे लिविंग एरिया में लगाना चाहिए। इससे घर में सुख शांति बढ़ती है और यदि हाथी की सूंड ऊपर की ओर उठी हुई है तो, इसे तरक्की होती है, धन और संपत्ति बढ़ती है।

पीतल का हाथी : शयनकक्ष में पीतल का हाथी रखने या हाथी की बड़ी तस्वीर लगाने से पति पत्नी में मतभेद खत्म होते हैं, वैसे भी यदि पीतल का हाथी बैठक रूम में रखा जाए तो, यह शांति और समृद्धि कारक है। इसी के साथ यह जीवन के हर क्षेत्र में सफलता दिलाता है, दरअसल हाथी ऐश्वर्य का प्रतीक है।

ठोस चांदी का हाथी : घर में या जेब में ठोस चांदी का हाथी रखना चाहिए, यह पंचम और द्वादश में बैठे राहु का उपाय है, इससे संतान को कष्ट नहीं होता और व्यापार में भी लाभ मिलता है।

चांदी से बने इस हाथी को घर की उत्तर दिशा में रखना वास्तु की दृष्टि से शुभ माना गया है, हाथी की तस्वीर या मूर्ति घर में रखने से सकारात्मक उर्जा के साथ-साथ धन प्राप्ति के स्रोत बनते हैं, जिस हाथी की तस्वीर या मूर्ति में उसकी सूंड झुकी हो उसे लिविंग एरिया में लगाना चाहिए, इससे घर में सुख शांति बढ़ती है और यदि हाथी की सूंड ऊपर की ओर उठी हुई है तो, इसे तरक्की होती है, धन और संपत्ति बढ़ती है।

यह भी जानें

क्या पता आप किसके पुण्य का मिल रहा आपको लाभ

जब तक विभीषणजी लंका में रहते थे , तब तक रावण ने कितना भी पाप किया, परंतु विभीषणजी के पुण्य के कारण रावण सुखी रहा, परंतु जब विभीषणजी जैसे भगवत वत्सल भक्त को लात मारी और लंका से निकल जाने के लिए कहा, तब से रावण का विनाश होना शुरू हो गया। अंत में रावण की सोने की लंका का दहन हो गया और रावण के पीछे कोई रोने वाला भी नहीं बचा।

ठीक इसी तरह हस्तिनापुर में जब तक विदुरजी जैसे भक्त रहते थे , तब तक कौरवों को सुख ही सुख मिला। परंतु जैसे ही कौरवों ने विदुरजी का अपमान करके राज्यसभा से चले जाने के लिए कहा और विदुर जी का अपमान किया, तब भगवान श्री कृष्ण जी ने विदुरजी से कहा कि काका आप अभी तीर्थ यात्रा के लिए प्रस्थान करिए और भगवान के तीर्थ स्थानों पर यात्रा करिए और भगवान श्री कृष्णजी ने विदुरजी को तीर्थ यात्रा के लिए भेज दिया ,और जैसे ही विदुर जी ने हस्तिनापुर को छोड़ा , कौरवों का पतन होना चालू हो गया और अंत में राज भी गया और कौरवों के पीछे कोई कौरवों का वंश भी नहीं बचा।

परिवार में भी हो सकती है कोई पुण्यवान आत्मा

इसी तरह हमारे परिवार में भी जब तक कोई भक्त और पुण्यवान आत्मा होती है, तब तक हमारे घर में आनंद ही आनंद रहता है। इस लिए परिवार मे किसी का भी अपमान भूलकर भी न करें। और हां , हम जो कमाई खाते हैं वह पता नहीं किसके पुण्य के द्वारा मिल रही है।

इसलिए हमेशा आनंद में रहें ,और कोई व्यक्ति परिवार में भक्ति करता हो तो उसका अपमान ना करें, उसका सम्मान करें, और उसके मार्गदर्शन मे चलने की कोशिश करें । पता नहीं संसार की गाड़ी किस के पुण्य से चलती है। ईश्वर, शास्त्र के प्रति समर्पित रहें। धर्म की जड़ जहाँ होगी वहाँ अशुभ कर्म आने से डरेंगे।

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