वेद गुप्ता
आज शनिवार का दिन कर्मफल दाता भगवान शनि की पूजा करने का सबसे उपयुक्त दिन माना जाता है। वैसे हो हर दिन भगवान की पूजा आरधना करने के लिये शुभ है लेकिन शनिवार को भगवान शनि की पूजा करना उनके सामने तेल का दीपक जलाना ज्यादा शुभकारी होता है। वैसे को देश में भगवान शनि के कई मंदिर हैं लेकिन मुरैना में भगवान शनि का एक ऐसा मंदिर है जहां भगवान शनि से गले मिलकर भक्त अपना दुख दर्द बांटते हैं। इस मंदिर में बताई गई पूजन विधि के अनुसार पूजा करने से भक्त को दरिद्रता और पापों से मुक्ति मिल जाता है।
त्रेता युग का माना जाता है मुरैना का यह शनि मंदिर

कहा जाता है कि भगवान सूर्य के पुत्र शनिदेन सभी लोगो को उनके कर्मो के आधार पर फल देते हैं गलत कर्म करने वाले सजा देते है, और उनके क्रोध और कुदृष्टि से सभी को भय लगता है। भारत के मुरैना (मध्य प्रदेश) मे शनिश्चरा मंदिर को शनिदेव के सबसे प्राचिन मंदिरों में माना जाता है। यह मंदिर त्रेतायुग का माना जाता है, जो पुरे भारत मे प्रसिद्ध है और ऐसा माना जाता है की शनिदेव की यह प्रतिमा आसमान से टुट कर गिरी एक उल्का पिण्ड से बनी है। शनिदेव का यह मंदिर अदभुत और प्रभावशाली है,तथा दुनिया भर से यहां लोग शनिदेव के दर्शन के लिए आते है।
प्रतिमा पर तेल चढ़ाने के बाद गले मिलते हैं भक्त
बताया गया है कि इस प्रसिद्ध मंदिर में एक अनोखी परम्परा है। इस मंदिर मे भक्त शनिदेव की प्रतिमा मे तेल चढाने के बाद उनके गले मिलते हैं। ऐसा माना जाता है कि ऐसा कर भक्त अपने सभी दुख दर्द भगवान शनिदेव के साथ बांटते हैं। इसके बाद भक्त घर जाने से पुर्व अपने धारण किये हुए वस्त्र,धोती,जुते,चप्पल मंदिर मे ही छोड जाते है। ऐसा करने से भक्त को उनके सभी पापो और दरिद्रताओं से मुक्ति मिलती है। हर शनिचरी अमावश्या को यहां बहुत लाखों भक्तों की भीड़ होती है,और इस दिन यहां बहुत ही विशाल मेला लगता है।
पौराणिक कथा के अनुसार रावण ने लंका मे शनिदेव को कैद कर रखा था,लंका जलाते समय हनुमान जी ने शनिदेव को रावण के कैद मे देखा, शनिदेव ने उन्हे इशारो मे निवेदन किया की अगर आप मुझे रावण की कैद से आजाद कर दो तो मै आपको रावण की लंका को नष्ट करने मे मदद करुंगा, शनितेव रावण की कैद मे काफी दुर्बल हो चुके थे, हनुमान जी ने उन्हे सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए उन्हे लंका से फेंका तब शनिदेव इस स्थान पर आकर स्थापित हो गए। एक कथा में यह भी कहां जाता है की महाभारत युद्ध से पुर्व अर्जुन ने ब्रहाास्त्र पाने के लिए शनिदेव की यहां विधिवत पूजा अर्चना की थी। इस मंदिर का निर्माण विक्रमादित्यने करवाया था,मराठो के शासन काल मे सिंधिया शासको ने इसका जिर्णोद्धार कराया।

किस्मत चमकाने वाले देवता कहे जाते हैं भगवान शनि
पौराणिक शास्त्रो के अनुसार शनि न्याय के देवता एवंभगवान सूर्य के पुत्र है। शनि को किस्मत चमकाने वाला देवता भी कहा जाता है, शनिदेव मनुष्य के अच्छे कर्मो से प्रसन्न होते है,यही कारण है की उन्हे भाग्य विधाता भी कहां जाता है। भगवान शनिदेव के दस कल्याणकारी नामो का निरन्तर जाप करने से मनुष्य का कल्याण होता है,ज्सोतिष शास्त्रो के अनुसार शनि शुभ होने पर अपार सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
