निशंक न्यूज।
कानपुर। जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में परिषदीय प्राथमिक, राजकीय उच्च प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन एवं एलटी लाइनों को हटाए जाने संबंधी जनपद स्तरीय समिति की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में जिलाधिकारी ने विद्यालयों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि विद्यालय प्रांगण में बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किसी भी प्रकार की विद्युत लाइन का गुजरना अत्यंत संवेदनशील विषय है। जिलाधिकारी ने कहां कि जनपद के 1705 प्राथमिक विद्यालय, 113 सहायता प्राप्त (एडेड) विद्यालय तथा 21 राजकीय विद्यालय संचालित हैं। सर्वे के दौरान एक भी विद्यालय छूटने न पाए ।
96.85 लाख रूपये की धनराशि अवमुक्त
जिलाधिकारी ने कहा कि इस अगस्त, सितंबर 2 माह के अभियान में एक भी विद्यालय छुटने न पाए यह सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने जिला विद्यालय निरीक्षक को निर्देशित करते हुए स्पष्ट कहा कि इस सर्वे में एक भी विद्यालय छूटना नहीं चाहिए। सभी विद्यालयों का भौतिक निरीक्षण कराकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाए ताकि भविष्य में किसी प्रकार की दुर्घटना की संभावना न रहे। सर्वे कार्य के दौरान प्रत्येक विद्यालय का नाम, स्थान, जिले से दूरी, विद्यालय के ऊपर से गुजर रही विद्युत लाइन का प्रकार तथा प्रधानाचार्य का नाम अंकित करते हुए एक डिजिटल डायरी तैयार की जाएगी। यह अभियान अगस्त से सितंबर माह तक चलेगा और समय-समय पर इसकी प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।
ब्लाक शिक्षा अधिकारी को देना होगा प्रमाणपत्र
जिलाधिकारी ने यह भी निर्देश दिए कि सर्वे में जाने वाले ब्लॉक शिक्षा अधिकारी एक प्रमाण-पत्र देंगे कि जिन विद्यालयों का उन्होंने निरीक्षण किया है वहां से कोई विद्युत तार नहीं गुजर रहा है। इस प्रमाणन से रिपोर्ट को प्रामाणिकता एवं विश्वसनीयता मिलेगी। इसके साथ ही जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि केवल विद्युत लाइनों तक ही सीमित न रहकर, विद्यालय प्रांगण में स्थित ट्रांसफार्मर, विद्युत पोल अथवा अन्य विद्युत संरचनाओं की भी विस्तृत जानकारी सर्वे रिपोर्ट में दर्ज की जाए। बैठक में जिला विद्यालय निरीक्षक श्री संतोष राय, अधिशासी अधिकारी दक्षिणांचल समेत संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
छात्र संघ चुनाव बहाली के लिए जिलाधिकारी को दिया ज्ञापन
छात्रसंघ बहाली मोर्चा कानपुर ने प्रदेश सरकार से विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव की बहाली की मांग को लेकर शुक्रवार को एक ज्ञापन राज्यपाल को संबोधित करके जिलाधिकारी को सौंपा।
छात्रों का कहना है कि छात्रसंघ लोकतांत्रिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जो न केवल युवाओं को नेतृत्व और सामाजिक न्याय का मार्ग दिखाता है, बल्कि उन्हें संविधान प्रदत्त अधिकारों के प्रति जागरूक भी करता है। हमारे पास आवाज रखने के लिए कोई मंच नहीं है।
कहा गया कि छात्रसंघ चुनाव युवाओं को लोकतांत्रिक मूल्यों, राजनीतिक समझ, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक उत्तरदायित्व का अनुभव प्रदान करता है। छात्रों ने आरोप लगाया कि लंबे समय से चुनाव न होने के कारण छात्रों के अधिकार और उनकी समस्याएं अनसुनी रह जाती हैं। मोर्चा ने मांग की कि कानपुर समेत प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में शीघ्र छात्रसंघ चुनाव कराए जाएं।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि छात्रावास नियम, शुल्क निर्धारण, पुस्तकालय व्यवस्था और अन्य छात्रहित से जुड़े निर्णयों में निर्वाचित छात्र प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए। छात्रों ने यह भी मांग रखी कि प्रत्येक संस्थान में लैंगिक उत्पीड़न और महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों की निगरानी के लिए आंतरिक शिकायत समिति (ICC) का गठन हो और उसमें छात्र-छात्राओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में लोकपाल समिति का गठन किया जाए और प्राइवेट संस्थानों में एक सरकारी प्रतिनिधि को भी नियुक्त किया जाए, ताकि प्रशासनिक और शैक्षिक कार्यवाही में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे। इस मौके पर अभिजीत राय,पुष्पांशु सिंह, अनस शाहू, शरद कनौजिया, अमन यादव राजवीर शाहू,अनुज त्रिपाठी आदित्य ठाकुर, आकर्षण, दिव्यांशु सिंह, अंशुमान त्रिपाठी, सचिन सिंह, अंशिका दीक्षित,अनुज त्रिपाठी, अभिनव श्रीवास्तव, विक्की ठाकुर, अभिषेक ठाकुर, आर्यन त्रिपाठी, आर्यन ठाकुर आदि सैकड़ों छात्र मौजूद रहे।