विकास वाजपेयी
कानपुर कलेक्ट्रेट परिसर में शुक्रवार को सोंठ हल्द की महक फैली थी। आसपास से जो निकलता वह स्वतः ही उस तरफ घूम जाता जिधर से ऐसी सोंधी महक आ रही थी। मौके पर जाकर देखा गया तो सामने आया जहां जिले भर से आए लोगों की समस्या का समाधान किया जाता है वहां सेहत के मार्ग पर जाने का रास्ता बताया जा रहा है वह भी स्वादिष्ट लड्डू खिलाने के साथ। मौका था कलेक्ट्रेट परिसर में लगे लड्डू बाजार का। सेहत के इस राज को जानने के लिये जिलाधिकारी भी यहां पहुंचे और इन लड्डओं की खूबिया जानने के बाद कहा कि आज भी स्वास्थ्यवर्धक रेस्पी बड़े होटल में नहीं बल्कि घर के रसोई में तैयार हो रही है। लड्डू बाज़ार उत्सव में सर्दियों के मौसम में सेहत से जुड़ी पारंपरिक मिठास को समर्पित इस आयोजन में सोंठ, अलसी–मेथी, कच्ची हल्दी और मिलेट्स से बने लड्डू विशेष आकर्षण रहे।
तैयार हो रहे शुद्ध-ताजा व पौष्टिक आहारः डीएम
कार्यक्रम का उद्घाटन करने के बाद जिलाधिकारी ने कहा कि भारत की सर्वश्रेष्ठ और स्वास्थ्यवर्धक रेसिपी बड़े होटलों में नहीं, बल्कि घरों की रसोई में विकसित हुई हैं। उन्होंने कहा कि जनपद की अनेक महिलाएं छोटे स्तर पर घरेलू उद्योग संचालित कर रही हैं, जो शुद्ध, ताज़ा और पौष्टिक उत्पाद तैयार कर रही हैं। ऐसे आयोजनों से इन प्रयासों को पहचान मिलने के साथ-साथ उन्हें बाज़ार से भी जोड़ा जा रहा है।
सामान्य बाजार में नहीं मिलता ऐसा पोष्टिक सामान
उन्होंने बताया कि लड्डू बाज़ार उत्सव के माध्यम से मानस उद्योग सहित कई स्थानीय महिला उद्यमी और संस्थान जुड़े हैं, जो मौसम के अनुरूप ऐसे पारंपरिक लड्डू तैयार कर रहे हैं, जो सामान्य बाज़ार में आसानी से उपलब्ध नहीं होते। जिलाधिकारी ने कहा कि घरों में बनने वाली पारंपरिक मिठाइयाँ स्वास्थ्य के लिए अधिक लाभकारी होती हैं, जबकि खुले बाज़ार में कई बार पुराने उत्पाद दोबारा गर्म कर बेचे जाते हैं, जो स्वास्थ्य के अनुकूल नहीं होते।
उत्पादन को उचित मंच दिला रहे जिलाधिकारी

जिलाधिकारी ने यह भी बताया कि कलेक्ट्रेट परिसर में इस प्रकार का आयोजन नियमित रूप से किया जाएगा, जिससे स्थानीय उत्पादों को स्थायी मंच मिल सके और आमजन को शुद्ध, ताज़ा एवं स्वास्थ्यकारी खाद्य सामग्री उपलब्ध हो। उत्सव में सोंठ, अलसी–मेथी और कच्ची हल्दी के लड्डू, शुगर-फ्री गजक तथा मिलेट्स आधारित लड्डू और स्नैक्स प्रदर्शित किए गए। आयोजन में स्थानीय महिला उद्यमियों और लघु उद्योगों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।
लड्डू बाजार में दिखा सेहत का खजाना

आज के कार्यक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली चिकी अग्रवाल ने निशंक न्यूज को बताया कि आम लोगों को सेहत के प्रति जागरूक करने के लिये पिछले कुछ वर्षों से पारंपरिक निर्माण किया जा रहा है। जिनमें बेसन, तिल, अलसी, बाजरा और सोंठ जैसे घटक शामिल हैं। इन अनोखे खाद्य पदार्थों के माध्यम से लोगों को सेहतमंद करने के काम में जुटे माधव फूड इंडस्ट्रीज के प्रतिनिधि हेमंत तिवारी ने बताया कि उनके स्टार्टअप के माध्यम से मिलेट्स आधारित लड्डू, कच्ची हल्दी के लड्डू और बिना गुड़-चीनी के तिल के लड्डू तैयार किए जा रहे हैं। डॉ. ज्योति चौहान ने बताया कि एमएसएमई से जुड़े प्रशिक्षण के बाद वे मिलेट्स आधारित उत्पादों का निर्माण कर रही हैं, जिनमें ज्वार, बाजरा, रागी और अलसी के लड्डू के साथ रागी नमकीन और अलसी से बना बुकनू शामिल है, जिसकी वर्तमान में अच्छी मांग है। चौबेपुर के बिरैचामऊ क्षेत्र की अन्नपूर्णा महिला स्वयं सहायता समूह ने भी अपने उत्पादों का प्रदर्शन किया। समूह राष्ट्रीय आजीविका मिशन से जुड़कर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रहा है। वर्ष 2019 में “मानस ग्राम” ब्रांड की स्थापना के बाद समूह द्वारा दलहन, तिलहन, अनाज, अचार, मुरब्बे, मसाले और दलिया सहित अनेक जैविक उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें प्रमाणिक परीक्षण और विपणन सुविधाओं का लाभ मिल रहा है।
