सरस वाजपेयी
बसंत पंचमी केवल ऋतु परिवर्तन का पर्व नहीं, बल्कि ज्ञान, चेतना और सृजन के प्राकट्य का प्रतीक है। इसी दिन माता सरस्वती की पूजा का विधान वेदों और पुराणों में गहन दार्शनिक अर्थ के साथ वर्णित है। 23 जनवरी 2026 को मनाई जाने वाली बसंत पंचमी माघ शुक्ल पंचमी की तिथि को आती है। बसंत को ऋतुओं का राजा कहा गया है, क्योंकि इसी काल में प्रकृति जड़ता त्यागकर नवजीवन की ओर अग्रसर होती है। शीत ऋतु की निष्क्रियता समाप्त होकर सृजन, ऊर्जा और उल्लास का संचार होता है। यह परिवर्तन केवल बाह्य प्रकृति तक सीमित नहीं, बल्कि मानव चेतना में भी नवीनता और बौद्धिक जागरण का संकेत देता है।
बसंत पंचमी और सरस्वती तत्त्व का गहरा संबंध
ज्योतिष सेवा संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष पंडित पवन तिवारी का कहना है कि योग और वेदांत में बसंत पंचमी को नई साधना, अध्ययन और विद्या आरंभ के लिए श्रेष्ठ माना गया है। इसी कारण गुरुकुलों में विद्यारंभ संस्कार इसी दिन होता है। माता सरस्वती ज्ञान, विवेक, वाणी और स्मृति की अधिष्ठात्री देवी हैं। बसंत पंचमी पर उनकी पूजा का तात्पर्य है—मन, बुद्धि और चित्त का परिष्कार तथा अज्ञान के आवरण का क्षय। जैसे बसंत में प्रकृति पुष्पित होती है, वैसे ही सरस्वती उपासना से साधक की चेतना में ज्ञान का अंकुर फूटता है। ऋग्वेद में माता सरस्वती का उल्लेख नदी और देवी दोनों रूपों में मिलता है। उन्हें पवित्रता, प्रेरणा और जीवनदायिनी शक्ति के रूप में वर्णित किया गया है। प्रसिद्ध वैदिक मंत्र
“अम्बितमे, नदीतमे, देवितमे सरस्वति”
यह दर्शाता है कि वे मातृत्व, प्रवाह और दिव्यता तीनों की श्रेष्ठ अभिव्यक्ति हैं। वेदों में वाणी, यज्ञ और मंत्र को सरस्वती की कृपा से ही सिद्ध माना गया है। बिना सरस्वती तत्त्व के ज्ञान, वेदपाठ और साधना अधूरी मानी जाती है। उपनिषदों में माता सरस्वती को ब्रह्मविद्या से जोड़ा गया है वह विद्या जो जीव को अज्ञान से मुक्त कर ब्रह्म का साक्षात्कार कराती है। पुराणों में उन्हें भगवान ब्रह्मा की मानस पुत्री और शक्ति कहा गया है। देवी भागवत और स्कंद पुराण के अनुसार, वे माया से परे ले जाने वाली चेतना हैं। ब्रह्मा को सृष्टि के लिए जो विवेक और सृजन शक्ति प्राप्त होती है, वह सरस्वती तत्त्व से ही संभव है।
विवेक का प्रतीक है मां सरस्वती का वाहन हंस

प्रमुख ज्योतिषी पंडित पवन तिवारी का कहना है कि माता सरस्वती का श्वेत स्वरूप शुद्धता, सात्त्विकता और निर्विकार ज्ञान का प्रतीक है। उनका वीणा धारण करना यह दर्शाता है कि नाद और शब्द ही ब्रह्म तक पहुंचने का माध्यम हैं। मंत्र-जप, भजन और स्वाध्याय इसी नाद-तत्त्व को जाग्रत करते हैं। उनका वाहन हंस विवेक का प्रतीक है, जो दूध और पानी को अलग कर सकता है अर्थात् सत्य और असत्य में भेद करना सिखाता है।
उर्जा आशा और ज्ञान का संकेत है पीला वष्त्र
बसंत पंचमी पर पीले वस्त्र धारण करने की परंपरा भी प्रतीकात्मक है। पीला रंग ऊर्जा, आशा और ज्ञान का संकेत है। यह पर्व बताता है कि जीवन में केवल भौतिक समृद्धि ही नहीं, बल्कि बौद्धिक और आध्यात्मिक उन्नति भी आवश्यक है। माता सरस्वती की पूजा व्यक्ति को अहंकार, भ्रम और जड़ता से मुक्त कर विवेक, करुणा और संतुलन की ओर ले जाती है। बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा इसलिए की जाती है क्योंकि यह तिथि स्वयं ज्ञान के प्राकट्य की द्योतक है। वेद–पुराणों के अनुसार, यह दिन साधक के भीतर सुप्त चेतना को जाग्रत करने का अवसर देता है। माता सरस्वती की उपासना केवल परीक्षा या विद्या तक सीमित नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवन को शुद्ध, सार्थक और विवेकपूर्ण बनाने की साधना है।

इसलिये मनाई जाती है सरस्वती पूजा के दिन बसंत पंचमी
लंबे समय से धार्मिक गतिविधियों की रिपोर्टिंग कर रहे वरिष्ठ पत्रकार वेद गुप्ता का कहना है कि पौराणिक कथा के अनुसार, जब ब्रह्मा जी सृष्टि की रचना कर रहे थे, तो उन्होंने सबसे पहले जीवों और मनुष्यों की रचना की लेकिन, वातावरण इतना शांत था कि सब कुछ विरांग सा लग रहा था,तब ब्रह्मा ने भगवान विष्णु की अनुमति से अपने कमंडल से पृथ्वी पर थोड़ा-सा जल छिड़का, जिससे हाथ में वीणा धारण किए हुए देवी सरस्वती प्रकट हुई,तब ब्रह्माजी ने सरस्वती से कहा कि इस संसार में सभी लोग मूक है, ये सभी लोग बस चल रहे हैं, इन्हें समय और चीजों का ज्ञान नहीं है,इनमें आपसी संवाद नहीं है, ये लोग आपस में बातचीत नहीं कर पाते हैं. इस पर देवी सरस्वती ने पूछा की प्रभु मेरे लिए क्या आज्ञा है? ब्रह्माजी ने कहा देवी आपको अपनी वीणा की मदद से इन्हें ध्वनि प्रदान करें, जिसे ये लोग आपस में बातचीत कर सकें,और अपनी भाव और एक दूसरे की तकलीफ को समझ सकें, इसके बाद मां सरस्वती ने सभी को आवाज प्रदान की. तब से इस तिथि पर बसंत पंचमी का पर्व और सरस्वती पूजा मनाया जाने लगा.
कैसे करें मां सरस्वती की पूजा

मां सरस्वती की पूजा देवी और असुर दोनों ही करते हैं। इस दिन सभी लोग अपने घर, स्कूल, कॉलेज, कार्यस्थल पर मां सरस्वती की पूजा अर्चना करते हैं ,और उसने ज्ञान का वरदान मांगते हैं। इसके अलावा मां के चरणों में गुलाबी रंग का गुलाल चढ़ाएं और सफेद फूलो की माला अर्पित करें, उन्हें श्वेत रंग के वस्त्र भी अर्पित करें,और साथ ही एक पुस्तक ,कॉपी, पेन ,कमल का पुष्प भी अर्पित करना चाहिए और सफेद मिठाई का भोग जरूर लगाए.
श्री पंचमी व सरस्वती पंचमी के नाम से ही जानी जाती है यह पंचमी
मां सरस्वती का जन्म हुआ था. इस को श्री पंचमी और सरस्वती पंचमी से भी जाना जाता है। बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा अर्चना करने से बुद्धि, विद्या, कला, और ज्ञान का वरदान प्राप्त होता है। बसंत पंचमी के दिन लोग पीले रंग के कपड़े पहना शुभ मानते है और पिले और सफेद फूलों से मां सरस्वती की पूजा,वंदना करते हैं.ऐसा माना जाता है की बसंत पंचमी के बाद से बसंत ऋतु का आगमन हो जाता हैं।
