ऐसा गणेश मंदिर जिससे अंग्रेजो को भी लगता था डर

विकास वाजपेयी

कानपुर। पूरे देश में गणेश मोहत्सव आज बुधवार से शुरू हो गया। पूरे देश में गणेश पूजा की धूम मची है भक्त भगवान गणेश की पूजा अर्चना कर अपनी मनोकामना पूर्ण कराने की प्रार्थना कर रहे हैं। आज निशंक न्यूज की टीम ने उत्तर भारत के कानपुर में स्थित एक ऐसे मंदिर पहुंची जिससे अंग्रेज भी डरते थे और यह मंदिर आजादी के आंदोलन की स्मृतियों को अपने में समेटे है। सामान्यतः मंदिरों में गणेश जी की प्रतिमा भूतल पर ही स्थापित होती है लेकिन कानपुर के घंटाघर में स्थित यह ऐसा मंदिर है जिसमें भगवान की गणेश की प्रतिमा दूसरी मंजिल पर स्थित है औऱ मंदिर की छत पर शुभता की प्रतीक सतिया बनी है। मंदिर की बनावट इस तरह की है कि मंदिर में प्रवेश करने से बाहर निकलने तक में पूरी परिक्रमी हो जाती है।

मंदिर की कुछ खास बातें यह हैं

1- देश मे आज़ादी की अलख लोगों में जगाने और राष्ट्र को एक सूत्र में बांधने के लिए मंदिर का किया गया था निर्माण

2- बालगंगाधर तिलक के कानपुर में आगमन के बाद 1928 में शहर के घंटाघर में बनवाया गया था गणेश जी का सिद्धविनायक मंदिर।

मंदिर के संबंध में जानकारी देते कमेटी से जुड़े लोग व सर्वराकार।

2- मात्र 20 मीटर दूर स्थित मस्जिद के कारण अंग्रेजो ने इस मंदिर के निर्माण में लगाई थी रोक।

3- लोगों में आजादी की अलख पैदा होने के डर से अंग्रेजो ने मंदिर के निर्माण पर लगा दी थी रोक।

4- अंग्रेजों से छुपाकर मंदिर का हुआ था निर्माण।

5- ब्रिटिश हुकूमत से बचाकर, भू-तल पर नहीं बल्कि छत की बालकनी पर बनाया गया था मंदिर।

गणेश मंदिर के बाहर स्थित मूशक की कान में प्रार्थना करते भक्त।

6- मंदिर में देश के सबसे प्रमुख नेताओं के साथ प्रदेश के राज्यपालों को भी इस गणेश मंदिर ने आकर्षित किया हैं।

7- तीन खंड के इस विशाल मंदिर में हवनकुण्ड को सबसे ऊपर की मंजिल में स्थापीत किया गया है।

8- तीन खंड में मंदिर की तीन परिक्रमा पूरा करने का किया गया हैं निर्माण

9 – स्वस्तिक के आकार की बीम से मंदिर की छत का किया गया है निर्माण।

घंटाघर स्थित गणेश मंदिर में दर्शन करने को लगी भक्तों की कतार।

10- गणेश मंदिर में गजानन के साथ रिद्धि सिद्धि की प्रतिमा साथ मे विराजमान।

11- प्रदेश में हजारों मंदिर होने के बावजूद, भक्तो की लगती है अपार भीड़

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