दशमोत्तर छात्रवृत्ति से वंचित 3.16 लाख छात्रों को फिर मिलेगा मौका

निशंक न्यूज ब्यूरो

लखनऊ। वित्तीय वर्ष 2025-26 में तकनीकी कारणों से दशमोत्तर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति से वंचित रह गए पात्र छात्र-छात्राओं के लिए योगी सरकार ने राहत भरा कदम उठाया है। इसके लिये सरकार छात्रों की मदद करने की तैयारी कर रही है। सरकार के इस फैंसले से छात्रों व उनके अभिभावकों को राहत मिल सकती है।

1 सितंबर से खुलेगा छात्रवृत्ति पोर्टल, 2 अक्टूबर तक सीधे खातों में पहुंचेगी धनराशि

समाज कल्याण विभाग ने ऐसे विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति का लाभ दिलाने के लिए पोर्टल दोबारा खोलने का निर्णय लिया है। इसके तहत 1 सितंबर 2026 से छात्रवृत्ति पोर्टल दोबारा खोला जाएगा। छात्रवृत्ति की धनराशि 29 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 के बीच पीएफएमएस (पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम) के माध्यम से सीधे विद्यार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाएगी।

सरकार के इस फैसले से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, सामान्य वर्ग और अल्पसंख्यक वर्ग समेत सभी पात्र छात्र-छात्राओं को लाभ मिलेगा। इस पहल से उन विद्यार्थियों को विशेष राहत मिलेगी, जो पात्र होने के बावजूद तकनीकी खामियों या प्रक्रियागत कारणों से पिछले सत्र में छात्रवृत्ति प्राप्त नहीं कर सके थे।

पढ़ाई में आर्थिक बाधा नहीं बनने देगी सरकार

समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक पात्र छात्र-छात्रा को छात्रवृत्ति का लाभ मिले। प्रदेश सरकार का संकल्प है कि किसी भी बच्चे की पढ़ाई पैसे या तकनीकी बाधाओं के कारण प्रभावित न हो। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि संवेदनशील और जनहितकारी निर्णयों के माध्यम से प्रदेश सरकार विद्यार्थियों और युवाओं के हितों को प्राथमिकता दे रही है। छात्रवृत्ति पोर्टल दोबारा खोलने का फैसला इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

3.16 लाख विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ

समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह ने बताया कि वर्ष 2025-26 में तकनीकी कारणों से कुल 3,16,057 छात्र-छात्राएं दशमोत्तर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति से वंचित रह गए थे। इनमें शासकीय संस्थानों के 31,836, शासकीय सहायता प्राप्त संस्थानों के 37,795 और निजी संस्थानों के 2,46,426 विद्यार्थी शामिल हैं। वंचित विद्यार्थियों में सबसे बड़ी संख्या निजी संस्थानों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की है। सरकार के इस निर्णय से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता मिलने का रास्ता साफ हुआ है। छात्रवृत्ति सीधे बैंक खातों में भेजे जाने से पारदर्शिता और भुगतान की निगरानी भी सुनिश्चित होगी।

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