निशंक न्यूज
लखनऊ । योगी सरकार की कैबिनेट बैठक में प्रदेश के पांच जनपदों- मुरादाबाद, कानपुर नगर, औरैया, ललितपुर और भदोही में नवीन जिला कारागारों के निर्माण की परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की गई। इन परियोजनाओं पर 1460 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आएगी। सरकार का उद्देश्य कारागारों में भीड़भाड़ कम करना, बंदियों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना तथा कारागार प्रशासन को अधिक आधुनिक और व्यवस्थित बनाना है।
निर्णय के अनुसार मुरादाबाद में 2000 बंदी क्षमता का नया जिला कारागार 386.91 करोड़ रुपये की लागत से, कानपुर नगर में 2030 बंदी क्षमता का कारागार 384.05 करोड़ रुपये की लागत से तथा औरैया में 1056 बंदी क्षमता का कारागार 264.96 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित किया जाएगा। इसी प्रकार ललितपुर में 552 बंदी क्षमता की नई जेल 225.06 करोड़ रुपये तथा भदोही में 574 बंदी क्षमता की नई जेल 209.18 करोड़ रुपये की लागत से बनाई जाएगी। नए कारागारों के निर्माण से बंदियों के आवास, सुरक्षा, स्वास्थ्य और सुधारात्मक गतिविधियों के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध होगा।
इन प्रस्तावों को भी मिली मंजूरी
झांसी में गोआश्रय और पशु सेवा केंद्र के लिए एमओयू को मंजूरी, पशुपालन विभाग की 5 एकड़ भूमि पर निजी संस्था के सहयोग से संचालित होंगी पशु कल्याण गतिविधियां
कानपुर में ईएसआई अस्पतालों के हस्तांतरण को मंजूरी, राज्य सरकार द्वारा संचालित पांडुनगर अस्पताल भारत सरकार को और भारत सरकार द्वारा संचालित जाजमऊ अस्पताल राज्य सरकार को सौंपा जाएगा

राज्य विधि अधिकारियों की बढ़ेगी फीस
लखनऊ । कैबिनेट बैठक में राज्य विधि अधिकारियों को दी जाने वाली रिटेनरशिप एवं प्रति सुनवाई फीस में वृद्धि के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। यह निर्णय उत्तर प्रदेश सरकार से संबंधित मुकदमों और वादों की प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।
प्रदेश सरकार की ओर से विभिन्न जिला न्यायालयों, इलाहाबाद उच्च न्यायालय, लखनऊ खंडपीठ तथा उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली में आबद्ध राज्य विधि अधिकारी राज्य के हितों की रक्षा और प्रभावी विधिक प्रतिनिधित्व का महत्वपूर्ण दायित्व निभाते हैं। वर्तमान में उन्हें देय रिटेनरशिप एवं बहस शुल्क का निर्धारण 10 से 15 वर्ष पूर्व जारी शासनादेशों के आधार पर किया जा रहा था। बदलते समय, बढ़ती पेशेवर जिम्मेदारियों और न्यायिक प्रक्रियाओं की जटिलताओं को देखते हुए राज्य सरकार ने इन शुल्कों में वृद्धि का निर्णय लिया है।
योगी सरकार के इस फैसले से अनुभवी एवं दक्ष अधिवक्ताओं को प्रोत्साहन मिलेगा तथा विभिन्न न्यायालयों में राज्य सरकार के पक्ष की और अधिक प्रभावी पैरवी सुनिश्चित हो सकेगी। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही न्याय विभाग द्वारा की जाएगी।
